Market Outlook: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली करा दी। सेंसेक्स 1,677 अंक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ। अब निवेशकों की नजर 9 जुलाई के कारोबार पर है, जहां 23,800 का स्तर बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
US-ईरान तनाव से बाजार में मचा हड़कंप
मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,677.12 अंक (2.15%) गिरकर 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 516.65 अंक (2.12%) टूटकर 23,882.05 पर आ गया।
बाजार की चौड़ाई भी बेहद कमजोर रही। बीएसई पर 1,023 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 3,070 शेयर लाल निशान में बंद हुए। 159 शेयरों में कोई बदलाव नहीं आया।
निफ्टी के टॉप लूजर्स में जियो फाइनेंशियल, इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) शामिल रहे। वहीं ONGC, हिंडाल्को, कोल इंडिया और बजाज ऑटो ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
सभी सेक्टर दबाव में, इंडिया VIX में 25% की छलांग
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
- निफ्टी PSU बैंक: -2.7%
- निफ्टी बैंक: -2.5%
- निफ्टी प्राइवेट बैंक: -2.5%
- निफ्टी FMCG: -2.5%
- निफ्टी मीडिया: -2.33%
- निफ्टी ऑटो: -2.2%
- निफ्टी ऑयल एंड गैस: -2.2%
- निफ्टी इंफ्रा: -2%
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1.5% और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.2% गिर गया। इस दौरान India VIX में लगभग 25% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार में बढ़ती घबराहट का संकेत है।
एक्सपर्ट की राय: अनिश्चितता का दौर अभी खत्म नहीं
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इससे बाजार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है। जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
वहीं, एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर खत्म होने संबंधी बयान के बाद निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली।
टेक्निकल संकेत क्या कहते हैं?
तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने एक मजबूत Bearish Candle बनाई है, जो 30 मार्च 2026 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट मानी जा रही है।
- ADX इंडिकेटर में DI- ने DI+ को पार कर लिया है, जो बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।
- RSI में भी कमजोरी देखने को मिली है, जिससे शॉर्ट टर्म में मंदी का संकेत मिल रहा है।
23,800 का स्तर रहेगा सबसे अहम
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी को 23,070 से 24,348 तक की पिछली तेजी के 50% Fibonacci Retracement यानी करीब 23,800 के स्तर पर सपोर्ट मिला है।
उनका मानना है कि यदि निफ्टी 23,800 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि यह स्तर टूट जाता है तो गिरावट का दौर और लंबा खिंच सकता है।
आगे किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि बाजार फिलहाल कई बड़े जोखिमों का सामना कर रहा है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इन प्रमुख फैक्टर्स पर रहेगी—
- अमेरिका-ईरान तनाव में आगे क्या होता है।
- कच्चे तेल की कीमतों की दिशा।
- पहली तिमाही (Q1) के कॉर्पोरेट नतीजे और कंपनियों की मैनेजमेंट गाइडेंस।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई मौद्रिक नीति बैठक।
- अमेरिका के टैरिफ समझौतों की समय-सीमा और उसका असर।
- वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई के संकेत।
9 जुलाई के लिए बाजार का आउटलुक
विशेषज्ञों का मानना है कि 9 जुलाई का कारोबार भी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। यदि निफ्टी 23,800 के महत्वपूर्ण सपोर्ट के ऊपर टिकता है तो शॉर्ट-कवरिंग के चलते सीमित रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं, इस स्तर के नीचे फिसलने पर बिकवाली और तेज होने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने के बजाय वैश्विक घटनाक्रम, Q1 नतीजों और तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


