US Higher Tariffs: भारत समेत 60 देशों पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अमेरिकी प्रस्ताव का विरोध अब खुद अमेरिका की बड़ी कंपनियां कर रही हैं। Intel, IBM, Dell Technologies, Honeywell Aerospace और Ford जैसी कंपनियों का कहना है कि यह फैसला अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग, कारोबार और उपभोक्ताओं के लिए महंगा साबित होगा। कंपनियों का मानना है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने के बजाय लागत बढ़ेगी और अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है।
अमेरिका द्वारा भारत सहित करीब 60 देशों पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां एक ओर अमेरिकी प्रशासन इस कदम को व्यापार नीति का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों ने इसे उल्टा पड़ने वाला फैसला करार दिया है। इन कंपनियों ने अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
अमेरिकी कंपनियों ने जताई चिंता
टेक दिग्गज Intel ने कहा कि अतिरिक्त टैरिफ लगाने से अमेरिका में सामान बनाना बाकी देशों की तुलना में और महंगा हो जाएगा। कंपनी के अनुसार यह कदम घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रशासन के लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।
IBM, Dow Chemicals Thailand, GE Appliances और Dell Technologies ने भी इसी तरह की चिंता जताई। Dell का कहना है कि सरकार को ऐसे नीति विकल्प अपनाने चाहिए जो उत्पादन और अंतिम उपभोक्ता पर अतिरिक्त लागत का बोझ डाले बिना अपने उद्देश्य पूरे कर सकें।
आयात पर निर्भरता बढ़ाएगी मुश्किलें
Honeywell Aerospace ने कहा कि एयरोस्पेस उद्योग रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिटिकल मेटल्स, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, डिस्प्ले और अन्य विशेष कंपोनेंट्स के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ से सोर्सिंग बदलने के बजाय उत्पादन और रखरखाव की लागत ही बढ़ेगी।
वहीं De Beers ने प्राकृतिक हीरों पर अतिरिक्त शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी ज्वेलरी निर्माताओं, रिटेलर्स और ग्राहकों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, जबकि घरेलू विकल्प विकसित होने की संभावना बेहद सीमित है।
Ford ने भी मांगी छूट
Ford Motor ने उन चार उत्पाद श्रेणियों के लिए छूट की मांग की है जिन पर पहले से ही सेक्शन 232 के तहत 50% तक टैरिफ लागू है। कंपनी का कहना है कि यदि सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो अमेरिकी ऑटो उद्योग पर भारी लागत का दबाव आएगा, जबकि जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े मुद्दों के समाधान में इसका कोई विशेष योगदान नहीं होगा।
भारत ने भी अमेरिका से किया पुनर्विचार का आग्रह
भारत सरकार ने अमेरिका से प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ पर दोबारा विचार करने की अपील की है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह USTR के साथ बातचीत के जरिए सभी चिंताओं का समाधान करने के लिए तैयार है।
भारत का तर्क है कि केवल इस आधार पर किसी देश को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ का दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि उसके यहां जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। इसके लिए पर्याप्त कानूनी और तथ्यात्मक सबूत जरूरी हैं।
USTR की जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
भारत ने कहा कि USTR ने जिन 60 देशों की समीक्षा की, उनके कानूनों और व्यवस्थाओं का अलग-अलग आर्थिक विश्लेषण नहीं किया। इसके बजाय सभी देशों के लिए एक जैसा निष्कर्ष निकाल लिया गया, जबकि प्रत्येक देश की नीतियां और परिस्थितियां अलग हैं।
भारत का यह भी कहना है कि अमेरिकी पक्ष यह साबित नहीं कर पाया है कि भारत में जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर कथित कमी का अमेरिकी उद्योग पर प्रत्यक्ष और अनुचित प्रभाव पड़ता है। भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में भी ऐसे किसी संबंध के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं।
क्या हो सकता है असर?
यदि अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है तो इसका असर सिर्फ भारत जैसे निर्यातक देशों तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिकी कंपनियों के अनुसार इससे कच्चे माल, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और औद्योगिक उत्पादों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले व्यापक समीक्षा की मांग कर रही हैं।


