शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी के पोर्टफोलियो में शामिल केमिकल कंपनी भागीरधा केमिकल्स एंड इंडस्ट्रीज (Bhagiradha Chemicals & Industries) एक बार फिर निवेशकों के रडार पर है। कंपनी ने अपने कारोबार के विस्तार के लिए 850 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना बनाई है और दावा किया है कि अगले 4-5 वर्षों में अपनी आय को करीब 250 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करेगी। हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना के साथ बढ़ता कर्ज और नए प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।
दमानी की हिस्सेदारी वाली कंपनी पर निवेशकों की नजर
राधाकिशन दमानी की इस कंपनी में करीब 3.3 फीसदी हिस्सेदारी है। यही वजह है कि कंपनी से जुड़ी हर बड़ी घोषणा निवेशकों का ध्यान आकर्षित करती है।
फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹3,750 करोड़ है और शेयर करीब ₹289 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। पिछले 52 सप्ताह में यह शेयर ₹170.60 से ₹325 के दायरे में रहा है। कंपनी का P/E अनुपात 206 के आसपास है, जो इसकी ऊंची वैल्यूएशन को दर्शाता है।
कंपनी के प्रमुख आंकड़े
| पैरामीटर | आंकड़ा |
|---|---|
| मार्केट कैप | ₹3,749 करोड़ |
| मौजूदा शेयर भाव | ₹289 |
| 52 सप्ताह का हाई | ₹325 |
| 52 सप्ताह का लो | ₹170.60 |
| P/E रेशियो | 206 |
| बुक वैल्यू | ₹53.8 |
| ROCE | 4.53% |
| ROE | 2.63% |
| प्रमोटर होल्डिंग | 19.6% |
| राधाकिशन दमानी की हिस्सेदारी | 3.3% |
₹850 करोड़ के विस्तार पर बड़ा दांव
कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 850 करोड़ रुपये से अधिक का कैपेक्स (Capital Expenditure) शुरू किया है।
- करीब ₹200 करोड़ जमीन और भवन पर खर्च किए जा रहे हैं।
- लगभग ₹600 करोड़ प्लांट और मशीनरी पर निवेश किया जा रहा है।
- नया प्लांट कर्नाटक के कदेचुर में स्थापित किया गया है।
- इस यूनिट का संचालन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Bheema Fine Chemicals करेगी।
कंपनी के मुताबिक, नए प्लांट में आधुनिक तकनीक, सोलर पावर और Zero Liquid Discharge जैसी सुविधाएं लगाई गई हैं, जिससे उत्पादन लागत कम करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
5 साल में 250% आय बढ़ाने का लक्ष्य
भागीरधा केमिकल्स ने अगले 4-5 वर्षों में अपनी कुल आय को लगभग 250 फीसदी तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी कई मोर्चों पर काम कर रही है।
- नई उत्पादन क्षमता जोड़ना।
- नए प्रोडक्ट लॉन्च करना।
- कच्चे माल का इन-हाउस उत्पादन बढ़ाना।
- उत्पादन लागत कम करना।
कंपनी की आय में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। FY20 में कंपनी की आय 246 करोड़ रुपये थी, जो FY26 में बढ़कर करीब 536 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
खुद कच्चा माल बनाकर घटा रही लागत
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसकी Backward Integration Strategy मानी जा रही है। कंपनी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल का उत्पादन स्वयं करती है, जिससे बाहरी सप्लायर्स और चीन पर निर्भरता कम होती है।
इस रणनीति से कंपनी को कई फायदे मिलते हैं।
- कच्चे माल की लागत में कमी।
- सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण।
- मार्जिन में सुधार।
- वैश्विक सप्लाई बाधाओं का सीमित असर।
FY26 के दौरान कंपनी ने 3 नए प्रोडक्ट लॉन्च किए और 19 नए ग्राहक जोड़े। अब उसके पोर्टफोलियो में 35 अलग-अलग उत्पाद शामिल हैं।
भारत पर ज्यादा निर्भर कारोबार
कंपनी की लगभग 98 फीसदी आय घरेलू बाजार से आती है, जबकि केवल 2 फीसदी राजस्व निर्यात से प्राप्त होता है।
हालांकि निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका, यूरोप, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजारों में जाता है, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ाने की संभावना बनी हुई है।
चुनौतियां भी कम नहीं
कंपनी की विस्तार योजना जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
- नए प्लांट की वजह से कर्ज बढ़ा है।
- ब्याज खर्च FY25 के ₹7.1 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹17.5 करोड़ हो गया।
- नए प्लांट के कारण परिचालन खर्च भी बढ़े हैं।
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- नए प्लांट का समय पर पूरी क्षमता तक पहुंचना कंपनी की सफलता के लिए अहम होगा।
यदि कंपनी समय पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए ग्राहकों को जोड़ने और कर्ज को नियंत्रित रखने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में उसका ग्रोथ प्लान निवेशकों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


