नई दिल्ली: भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक कपड़ा बाजार में देश की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कपड़ा मंत्रालय ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तीसरे दौर के तहत 22 नए आवेदकों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ देश के टेक्सटाइल सेक्टर में 2,339.14 करोड़ रुपये के नए निवेश का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का मानना है कि यह निवेश केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और भारत को वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में भी मदद मिलेगी। विशेष रूप से मैन-मेड फाइबर (MMF) और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों पर फोकस भारत को उन बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाएगा, जहां अभी चीन और बांग्लादेश जैसी अर्थव्यवस्थाओं का दबदबा है।
PLI योजना के तीसरे दौर से क्या होगा फायदा?
कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, तीसरे दौर में मंजूर की गई परियोजनाओं से अधिसूचित टेक्सटाइल उत्पादों के माध्यम से लगभग 15,561.34 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार उत्पन्न होने की संभावना है। इसके साथ ही करीब 36,217 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान है।
यह मंजूरी ऐसे समय में दी गई है जब भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि केवल पारंपरिक कपड़ा उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
अब तक कितनी कंपनियां शामिल हुईं?
तीसरे दौर की नई मंजूरियों के बाद PLI योजना के तहत चयनित कंपनियों की कुल संख्या बढ़कर 96 हो गई है। इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से 12,822.67 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार इन परियोजनाओं से कुल 58,294.18 करोड़ रुपये का कारोबार उत्पन्न हो सकता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल उद्योग भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा जोर?
PLI योजना के तहत जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, उनमें मैन-मेड फाइबर आधारित परिधान, मैन-मेड फाइबर फैब्रिक्स और टेक्निकल टेक्सटाइल प्रमुख हैं।
मैन-मेड फाइबर आधारित उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। खेल परिधान, प्रदर्शन आधारित कपड़े और औद्योगिक उपयोग के फैब्रिक्स में इनकी बड़ी हिस्सेदारी है। दूसरी ओर टेक्निकल टेक्सटाइल का उपयोग ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, निर्माण और रक्षा क्षेत्र तक फैल चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश भारत को केवल कपड़ा निर्यातक ही नहीं बल्कि उच्च मूल्य वाले औद्योगिक टेक्सटाइल उत्पादों के निर्माता के रूप में भी स्थापित कर सकता है।
बांग्लादेश और अन्य देशों को मिलेगी चुनौती
पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश वैश्विक रेडीमेड गारमेंट निर्यात में प्रमुख देशों में शामिल रहा है। कम लागत और निर्यात-उन्मुख नीतियों के कारण वहां का वस्त्र उद्योग तेजी से बढ़ा है।
हालांकि भारत के पास विशाल घरेलू बाजार, कच्चे माल की उपलब्धता, कुशल श्रमबल और सरकारी प्रोत्साहन जैसी कई ताकतें मौजूद हैं। PLI योजना के जरिए सरकार इन्हीं ताकतों को व्यवस्थित रूप से उद्योग विस्तार में बदलना चाहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रस्तावित निवेश समय पर धरातल पर उतरता है और उत्पादन लक्ष्य हासिल होते हैं, तो भारत वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार में अपनी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।
रोजगार और निर्यात पर पड़ेगा असर
टेक्सटाइल उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। कृषि के बाद यह सेक्टर लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है।
नई परियोजनाओं से 36 हजार से अधिक रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान केवल शुरुआती प्रभाव को दर्शाता है। जब उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से काम करेंगी, तब लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों में भी अतिरिक्त रोजगार उत्पन्न होगा।
इसके अलावा उत्पादन क्षमता बढ़ने से निर्यात में वृद्धि की संभावना है, जिससे विदेशी मुद्रा आय और व्यापार संतुलन दोनों को मजबूती मिल सकती है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल
सरकार लंबे समय से विनिर्माण क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की वृद्धि का प्रमुख इंजन बनाने पर जोर दे रही है। PLI योजना इसी रणनीति का अहम हिस्सा है। टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ता निवेश न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा बल्कि घरेलू उत्पादन को भी नई गति देगा।
कपड़ा मंत्रालय का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक टेक्सटाइल वैल्यू चेन में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी और देश को एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
आगे क्या?
अब निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। यदि कंपनियां तय समयसीमा में उत्पादन क्षमता स्थापित कर लेती हैं तो अगले कुछ वर्षों में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की तस्वीर बदल सकती है। बढ़ते निवेश, रोजगार सृजन और निर्यात संभावनाओं के कारण यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण ग्रोथ ड्राइवर बनकर उभर सकता है।
FAQs
प्रश्न: PLI योजना के तीसरे दौर में कितनी कंपनियों को मंजूरी मिली है?
उत्तर: तीसरे दौर में 22 नए आवेदकों को मंजूरी मिली है।
प्रश्न: इससे कितना निवेश आएगा?
उत्तर: लगभग 2,339.14 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ हुआ है।
प्रश्न: कितने रोजगार पैदा होने की उम्मीद है?
उत्तर: लगभग 36,217 नए रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान है।


