नई दिल्ली। 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12 साल तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं।
साल 2014 में सत्ता संभालने के बाद से मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, टैक्सेशन, रियल एस्टेट, डिजिटल भुगतान और विनिर्माण क्षेत्र में कई बड़े सुधार लागू किए। इन फैसलों का असर केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि करोड़ों आम नागरिकों, उद्योगों और निवेशकों के जीवन पर भी पड़ा।
जन धन योजना और DBT ने बदली सरकारी सहायता की व्यवस्था
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में प्रधानमंत्री जन धन योजना को माना जाता है। अगस्त 2014 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश के हर नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करोड़ों लोगों ने पहली बार बैंक खाते खुलवाए।
जन धन खातों को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़कर सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को मजबूत किया। इससे गैस सब्सिडी, किसान सम्मान निधि, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने लगा। सरकार का दावा है कि इससे फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगी और हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई।
नोटबंदी: सबसे चर्चित और विवादित फैसला
8 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित करने की घोषणा की। इस फैसले को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े आर्थिक निर्णयों में गिना जाता है।
सरकार ने इसका उद्देश्य काले धन, नकली नोटों और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाना बताया था। हालांकि इस फैसले को लेकर अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के बीच लंबे समय तक बहस होती रही।
नोटबंदी का एक बड़ा प्रभाव डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में देखने को मिला। इसके बाद UPI, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में तेज वृद्धि हुई। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल है।
GST ने बनाया एक देश, एक टैक्स सिस्टम
1 जुलाई 2017 को लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत के टैक्स इतिहास का सबसे बड़ा सुधार माना जाता है। इससे पहले अलग-अलग राज्यों और केंद्र सरकार के कई टैक्स लागू होते थे, जिससे व्यापारियों को जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था।
GST लागू होने के बाद पूरे देश में एकीकृत कर व्यवस्था स्थापित हुई। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स अनुपालन बढ़ा, कर संग्रह में सुधार हुआ और कारोबार करना अपेक्षाकृत आसान बना।
हालांकि शुरुआती वर्षों में छोटे व्यापारियों को तकनीकी और अनुपालन संबंधी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन समय के साथ व्यवस्था अधिक स्थिर होती गई।
IBC कानून से मजबूत हुआ बैंकिंग सेक्टर
भारतीय बैंकों में बढ़ते एनपीए (Non-Performing Assets) कई वर्षों से चिंता का विषय थे। इसे देखते हुए मोदी सरकार ने 2016 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) लागू किया।
इस कानून ने दिवालिया कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया। इससे बैंकों को फंसे हुए कर्ज की वसूली का एक प्रभावी कानूनी ढांचा मिला। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि IBC ने भारत की वित्तीय प्रणाली को अधिक अनुशासित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
RERA से बढ़ी घर खरीदारों की सुरक्षा
रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय तक पारदर्शिता की कमी और प्रोजेक्ट्स में देरी जैसी समस्याएं बनी रहीं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) कानून लागू किया।
इस कानून के तहत बिल्डरों के लिए कई नियम तय किए गए और घर खरीदने वालों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई। RERA के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ी और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हुआ।
कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और निवेश को बढ़ावा
साल 2019 में सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स दर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया। इसका उद्देश्य भारत को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाना था।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई नियमों को भी सरल बनाया गया। जून 2026 में सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) हटाने का फैसला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान
सितंबर 2014 में शुरू किया गया मेक इन इंडिया अभियान भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल थी। बाद में आत्मनिर्भर भारत अभियान और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं ने इसे और गति दी।
मोबाइल फोन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, सोलर उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत आज दुनिया के प्रमुख मोबाइल निर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है।
आम आदमी पर क्या पड़ा असर?
मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर अलग-अलग रूप में दिखाई दिया। जन धन योजना और DBT ने गरीब और ग्रामीण आबादी तक सरकारी लाभ पहुंचाने में मदद की। GST ने कर व्यवस्था को सरल बनाया। डिजिटल भुगतान ने लेनदेन को आसान बनाया। वहीं RERA और IBC जैसे कानूनों ने उपभोक्ताओं और वित्तीय संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की।
हालांकि कुछ फैसलों को लेकर आलोचना भी हुई, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
आगे की राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्तमान कार्यकाल में अभी लगभग तीन वर्ष का समय शेष है। ऐसे में निवेश, विनिर्माण, रोजगार और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े नए सुधारों पर सभी की नजर बनी हुई है। पिछले 12 वर्षों के आर्थिक फैसलों ने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी है और आने वाले वर्षों में इनके दीर्घकालिक प्रभाव और अधिक स्पष्ट होकर सामने आ सकते हैं।


