अनिल अंबानी को मिली बड़ी कानूनी राहत
रिलायंस समूह के पूर्व चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अंबानी को कथित टैक्स चोरी से जुड़े मामले में बंबई हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत उनके खिलाफ प्रस्तावित अभियोजन और जुर्माने जैसी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं है और मामले की अंतिम सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।
न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने अनिल अंबानी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने काला धन अधिनियम की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। अदालत ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद आयकर विभाग द्वारा अगस्त 2022 में जारी किए गए एक नोटिस से जुड़ा है। विभाग का आरोप है कि अनिल अंबानी ने स्विट्जरलैंड स्थित दो बैंक खातों में रखी गई 814 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा भारतीय कर अधिकारियों के समक्ष नहीं किया। विभाग के अनुसार इन परिसंपत्तियों पर करीब 420 करोड़ रुपये का कर देय था।
आयकर विभाग का कहना है कि विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी आयकर रिटर्न में न देकर काला धन अधिनियम का उल्लंघन किया गया। विभाग ने इसे जानबूझकर की गई कर चोरी का मामला बताया है और इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी।
किन विदेशी संस्थाओं का नाम सामने आया?
आयकर विभाग के नोटिस में दावा किया गया है कि अनिल अंबानी बहामास स्थित “डायमंड ट्रस्ट” और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थापित “नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (NATU)” से जुड़े हुए थे। विभाग का आरोप है कि वह इन संस्थाओं के आर्थिक योगदानकर्ता और लाभकारी स्वामी थे।
कर अधिकारियों के अनुसार इन संस्थाओं से संबंधित परिसंपत्तियों का खुलासा भारतीय आयकर रिटर्न में नहीं किया गया। विभाग ने दोनों खातों और परिसंपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 814.27 करोड़ रुपये आंका है।
अनिल अंबानी की दलील क्या है?
अनिल अंबानी ने अपनी याचिका में कहा है कि जिन लेनदेन और परिसंपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है वे आकलन वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। दूसरी ओर काला धन अधिनियम वर्ष 2015 में लागू हुआ था।
उनका तर्क है कि किसी कानून को पूर्व प्रभाव यानी रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया है कि यदि कथित लेनदेन कानून लागू होने से पहले के हैं तो उन पर बाद में बने कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई करना संविधान के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
यही संवैधानिक सवाल इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है और हाईकोर्ट अब इसी बिंदु पर विस्तृत सुनवाई करेगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
बंबई हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी के खिलाफ पारित आकलन आदेश और उससे जुड़ी अपील की प्रक्रिया जारी रह सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष लंबित अपील पर सुनवाई और आदेश पारित करने में कोई बाधा नहीं है।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस रिट याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक अनिल अंबानी के खिलाफ अभियोजन, जुर्माना या अन्य किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह आदेश अंबानी को तत्काल राहत देता है लेकिन मामले को पूरी तरह समाप्त नहीं करता।
काला धन अधिनियम में क्या है प्रावधान?
काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 को विदेशों में छिपाई गई संपत्तियों और आय पर कार्रवाई के लिए लागू किया गया था। इस कानून के तहत विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं करने पर भारी जुर्माना और आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान है।
धारा 50 और 51 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ टैक्स विवाद नहीं बल्कि संभावित आपराधिक कार्रवाई से भी जुड़ा हुआ है।
अब आगे क्या होगा?
मामले का अगला चरण हाईकोर्ट में संवैधानिक चुनौती की सुनवाई होगा। केंद्र सरकार अपना पक्ष हलफनामे के जरिए पेश करेगी। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि काला धन अधिनियम की संबंधित धाराएं संविधान के अनुरूप हैं या नहीं और क्या उन्हें पुराने मामलों पर लागू किया जा सकता है।
साथ ही आयकर विभाग द्वारा जारी आकलन आदेश के खिलाफ अनिल अंबानी की अपील भी समानांतर रूप से आगे बढ़ेगी। यदि अपीलीय प्राधिकरण विभाग के पक्ष में फैसला देता है तो कर देनदारी का मुद्दा अलग से जारी रह सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का अंतिम फैसला केवल अनिल अंबानी के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण होगा जिनमें काला धन अधिनियम को पुराने वित्तीय लेनदेन पर लागू करने का सवाल उठता है।
निष्कर्ष
फिलहाल बंबई हाईकोर्ट के आदेश से अनिल अंबानी को बड़ी राहत मिली है क्योंकि उनके खिलाफ अभियोजन और जुर्माने जैसी कार्रवाई पर रोक लग गई है। हालांकि यह अंतिम जीत नहीं है। अदालत ने केवल अंतरिम राहत दी है और मामले की मूल संवैधानिक चुनौती पर फैसला अभी बाकी है। आने वाले महीनों में इस केस की सुनवाई पर कारोबारी जगत और कर विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी क्योंकि इसका प्रभाव भविष्य के कई टैक्स विवादों पर पड़ सकता है।


