नई दिल्ली। दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की बढ़ती मांग के बीच केंद्रीय बैंकों की सोने में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। अप्रैल 2026 के आंकड़े बताते हैं कि मार्च में नेट सेलर रहने के बाद दुनिया के केंद्रीय बैंक फिर से सोने के नेट खरीदार बन गए हैं। इस दौरान जितना सोना बेचा गया, उससे करीब 17 टन अधिक सोना खरीदा गया।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जहां चीन ने लगातार 18वें महीने अपने गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की, वहीं यूरोप के अपेक्षाकृत छोटे देश पोलैंड ने सोना खरीदने के मामले में सभी को पीछे छोड़ दिया। पोलैंड का केंद्रीय बैंक इस साल अब तक 45 टन सोना खरीद चुका है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे आक्रामक खरीदारी में से एक मानी जा रही है।
अप्रैल में फिर खरीदार बने केंद्रीय बैंक
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council – WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में केंद्रीय बैंकों ने कुल मिलाकर सकारात्मक खरीदारी दर्ज की। मार्च में रूस और तुर्की की बिक्री के कारण केंद्रीय बैंक नेट सेलर रहे थे, लेकिन अप्रैल में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव के कारण कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। सोने को लंबे समय से ऐसी संपत्ति माना जाता है जो संकट के समय निवेशकों और सरकारों दोनों को सुरक्षा प्रदान करती है।
पोलैंड ने एक बार फिर दिखाई ताकत
अप्रैल में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाला देश पोलैंड रहा। पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने एक महीने में 14 टन सोना खरीदा। इसके साथ ही 2026 में उसकी कुल खरीदारी 45 टन तक पहुंच गई।
इस खरीदारी के बाद पोलैंड का कुल गोल्ड रिजर्व 595 टन हो गया है। यह उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों से पोलैंड लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत कर रहा है और यूरोप में सोना खरीदने वाले सबसे सक्रिय देशों में शामिल हो गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए पोलैंड अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक संतुलित बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
चीन ने लगातार 18वें महीने बढ़ाया गोल्ड रिजर्व
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने भी अप्रैल में सोने की खरीद जारी रखी। चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अप्रैल में 8 टन सोना खरीदा।
यह दिसंबर 2024 के बाद चीन की सबसे बड़ी मासिक खरीदारी मानी जा रही है। इसके साथ ही चीन का कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,322 टन हो गया है।
हालांकि चीन के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में सोने की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 9 प्रतिशत ही है, लेकिन बीते डेढ़ साल से लगातार खरीदारी यह संकेत देती है कि चीन डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपने रिजर्व को अधिक विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे “डी-डॉलराइजेशन” रणनीति का हिस्सा भी मानते हैं, जिसमें देश अमेरिकी डॉलर के बजाय सोना और अन्य परिसंपत्तियों पर अधिक भरोसा बढ़ा रहे हैं।
चेक गणराज्य भी बढ़ा रहा है भंडार
अप्रैल में चेक गणराज्य के केंद्रीय बैंक ने 2 टन सोना खरीदा। इसके साथ ही उसका कुल गोल्ड रिजर्व 79 टन पहुंच गया है।
हालांकि यह मात्रा चीन या पोलैंड की तुलना में काफी कम है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चेक गणराज्य ने लगातार अपने सोने के भंडार में वृद्धि की है। वर्तमान में उसके कुल रिजर्व का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा सोने के रूप में रखा गया है।
उजबेकिस्तान ने बेचा सोना, फिर भी खरीदारी में आगे
अप्रैल में उजबेकिस्तान ने एक टन सोना बेचा, लेकिन पूरे वर्ष के आंकड़े देखें तो स्थिति अलग नजर आती है। 2026 में अब तक उजबेकिस्तान 24 टन सोना खरीद चुका है और इस मामले में पोलैंड के बाद दूसरे स्थान पर है।
उजबेकिस्तान के पास कुल 414 टन गोल्ड रिजर्व है। खास बात यह है कि उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा सोने के रूप में है, जो दुनिया में सबसे ऊंचे अनुपातों में से एक माना जाता है।
रूस लगातार चौथे महीने बना विक्रेता
रूस ने अप्रैल में भी अपने सोने के भंडार में कटौती जारी रखी। रूसी केंद्रीय बैंक ने अप्रैल में 6 टन सोना बेचा।
यह लगातार चौथा महीना है जब रूस ने गोल्ड रिजर्व में कमी दर्ज की है। हालांकि रूस अभी भी दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण भंडार वाले देशों में शामिल है और उसके पास हजारों टन सोना मौजूद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की बिक्री का संबंध विदेशी मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय रणनीतियों से हो सकता है।
तुर्की ने नहीं किया कोई बदलाव
मार्च में बड़ी मात्रा में सोना बेचने वाले तुर्की ने अप्रैल में अपने रिजर्व में कोई बदलाव नहीं किया। तुर्की लंबे समय से सोने को अपनी रिजर्व रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है और उसका गोल्ड रिजर्व दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।
किन क्षेत्रों के देश सबसे ज्यादा खरीद रहे हैं सोना?
WGC के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 36 महीनों में पूर्वी यूरोप और एशिया के केंद्रीय बैंक सोने की खरीद में सबसे आगे रहे हैं।
- पूर्वी यूरोप के देशों ने औसतन 12 टन प्रति माह सोना खरीदा।
- एशियाई देशों ने औसतन 11 टन प्रति माह सोना खरीदा।
यह ट्रेंड बताता है कि विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं दोनों ही अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती हैं।
दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देश
केंद्रीय बैंकों के पास मौजूद कुल गोल्ड रिजर्व के आधार पर अमेरिका अब भी दुनिया में पहले स्थान पर है।
| रैंक | देश | गोल्ड रिजर्व (टन) |
|---|---|---|
| 1 | अमेरिका | 8,133 |
| 2 | जर्मनी | 3,352 |
| 3 | इटली | 2,452 |
| 4 | फ्रांस | 2,437 |
| 5 | रूस | 2,300+ |
| 6 | चीन | 2,322 |
| 7 | स्विट्जरलैंड | 1,040+ |
| 8 | भारत | 880+ |
| 9 | जापान | 846 |
| 10 | तुर्की | 600+ |
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा भंडार के विविधीकरण की रणनीति के तहत सोने की खरीद बढ़ाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और डॉलर में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्रीय बैंकों की सोने में दिलचस्पी और बढ़ सकती है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अप्रैल 2026 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के केंद्रीय बैंक अभी भी सोने को सबसे भरोसेमंद सुरक्षित संपत्तियों में से एक मानते हैं। चीन लगातार 18 महीने से सोना खरीद रहा है, लेकिन इस साल सबसे बड़ी चर्चा पोलैंड की आक्रामक खरीदारी को लेकर है। वहीं अमेरिका अब भी सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाला देश बना हुआ है। यदि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता जारी रहती है तो केंद्रीय बैंकों की सोने की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है, जिससे गोल्ड मार्केट को मजबूत समर्थन मिल सकता है।


