नई दिल्ली। बाजार नियामक SEBI द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच सोना रिफाइनिंग और ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) ने अपना पक्ष सामने रखा है। कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने दावा किया है कि SEBI ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को समझने में बुनियादी गलती की है और इसी वजह से कंपनी पर राजस्व (Revenue) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि कंपनी की सफाई के बावजूद निवेशकों की चिंता कम होती नहीं दिख रही। सोमवार को भी कंपनी के शेयर में लोअर सर्किट लग गया और शेयर करीब 5 फीसदी टूटकर खुला। बाजार में यह मामला निवेशकों और विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि SEBI का आरोप और कंपनी की सफाई एक-दूसरे से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
SEBI ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में आरोप लगाया था कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान अपने राजस्व आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। नियामक के मुताबिक कंपनी की रिपोर्टिंग में करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का अंतर दिखाई देता है, जिसे लेकर जांच शुरू की गई।
यह आरोप सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों को आशंका हुई कि यदि आरोप सही साबित हुए तो कंपनी की वित्तीय विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि यह पूरा मामला अकाउंटिंग डेटा की गलत व्याख्या का परिणाम है।
राजेश मेहता ने SEBI पर क्या आरोप लगाया?
राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता का कहना है कि SEBI ने EBITDA को Revenue समझ लिया है, जबकि दोनों पूरी तरह अलग वित्तीय मापदंड हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी पहले ही SEBI को 300 से 400 जीबी तक के दस्तावेज सौंप चुकी है, जिनमें लाखों पन्नों के वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं। उनके मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में डेटा होने के कारण संभव है कि नियामक सही दस्तावेजों तक नहीं पहुंच पाया हो।
राजेश मेहता ने कहा कि SEBI द्वारा निकाला गया 15.15 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा इसी गलतफहमी का परिणाम है। उनका दावा है कि यदि दस्तावेजों की सही तरीके से समीक्षा की जाए तो पूरा मामला साफ हो जाएगा।
EBITDA और Revenue में क्या अंतर है?
इस विवाद का केंद्र EBITDA और Revenue के बीच का अंतर है।
Revenue किसी कंपनी की कुल बिक्री या कारोबार को दर्शाता है। दूसरी ओर EBITDA कंपनी की परिचालन गतिविधियों से होने वाली कमाई का एक मापदंड है, जिसमें ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और अमोर्टाइजेशन को शामिल नहीं किया जाता।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार दोनों आंकड़े अलग-अलग उद्देश्य से उपयोग किए जाते हैं और किसी भी कंपनी के प्रदर्शन का आकलन करते समय इन्हें अलग-अलग देखा जाता है।
राजेश मेहता का दावा है कि SEBI ने EBITDA को Revenue के रूप में पढ़ लिया, जिससे आंकड़े वास्तविकता से अलग दिखाई देने लगे।
उदाहरण देकर समझाया पूरा मामला
राजेश मेहता ने विवाद को आसान भाषा में समझाने के लिए एक ज्वैलरी दुकान का उदाहरण दिया।
उनके मुताबिक यदि कोई ग्राहक 30,000 रुपये का सोना खरीदता है तो कंपनी का Revenue 30,000 रुपये माना जाएगा। इस बिक्री पर यदि कंपनी को 1,000 रुपये का सकल लाभ (Gross Profit) और 500 रुपये का शुद्ध लाभ (Net Profit) मिलता है तो Revenue और Profit अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किए जाते हैं।
मेहता का आरोप है कि SEBI ने इसी तरह के मामलों में Revenue और EBITDA के बीच अंतर को गलत तरीके से समझा और इसी वजह से गलत निष्कर्ष निकाला।
कंपनी ने फिर से दस्तावेज देने का किया वादा
राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि वह अगले 15 दिनों के भीतर सभी जरूरी दस्तावेज दोबारा SEBI को उपलब्ध कराएगी।
कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य नियामक के साथ पूरा सहयोग करना है ताकि मामले का समाधान जल्द हो सके। कंपनी ने यह भी दोहराया कि उसके सभी वित्तीय रिकॉर्ड पारदर्शी हैं और उसने किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं की है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में SEBI और कंपनी के बीच दस्तावेजों की समीक्षा के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
क्या किसी कंपनी को Revenue बढ़ाकर दिखाने से फायदा होता है?
राजेश मेहता का कहना है कि किसी कंपनी के लिए केवल Revenue बढ़ाकर दिखाने का कोई वास्तविक लाभ नहीं होता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी वित्तीय हेरफेर करना चाहे तो वह आमतौर पर मुनाफे (Profit) को बढ़ाकर दिखाने की कोशिश करती है क्योंकि इससे निवेशकों और बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। केवल Revenue बढ़ाकर दिखाने से कंपनी को कोई विशेष फायदा नहीं मिलता।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व आंकड़ों की सटीकता भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इन्हीं के आधार पर कंपनी के आकार, बाजार हिस्सेदारी और कारोबार की स्थिति का आकलन किया जाता है।
निवेशकों की चिंता क्यों बनी हुई है?
कंपनी की सफाई के बावजूद निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह लौटता नहीं दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा संकेत शेयर में लगातार लग रहा लोअर सर्किट है।
सोमवार को कंपनी का शेयर BSE पर 99.45 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले करीब 5 फीसदी टूटकर 94.50 रुपये पर खुला। लगातार गिरावट यह दर्शाती है कि बाजार अभी भी SEBI की जांच को लेकर सतर्क है।
शेयर बाजार में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब तक नियामकीय जांच पूरी नहीं हो जाती, निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में शेयर की दिशा काफी हद तक SEBI की अगली कार्रवाई और कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर निर्भर करेगी।
क्या शेयर में वापसी संभव है?
राजेश मेहता ने भरोसा जताया है कि कंपनी का शेयर भविष्य में फिर से अपनी पुरानी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि कंपनी का कारोबार मजबूत है और वित्तीय रिकॉर्ड पूरी तरह साफ हैं।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों की राय थोड़ी सतर्क है। उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं आता, तब तक शेयर में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे आधिकारिक सूचनाओं और नियामकीय अपडेट पर नजर रखें। किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जांच से जुड़े घटनाक्रमों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर
यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


