घरेलू बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें 7 जून से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद देश के चारों प्रमुख महानगरों में रसोई गैस पहले के मुकाबले अधिक महंगी हो गई है। ऐसे समय में जब खाद्य पदार्थों और अन्य घरेलू खर्चों में पहले से बढ़ोतरी देखी जा रही है, एलपीजी सिलेंडर का महंगा होना आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
सरकारी कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और लागत के आधार पर एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इस बार भी कंपनियों ने वैश्विक बाजार में बढ़ती लागत का हवाला देते हुए कीमतों में संशोधन किया है।
चारों महानगरों में क्या हो गए नए दाम?
ताजा बढ़ोतरी के बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव इस प्रकार हुआ है।
| शहर | पुरानी कीमत (₹) | नई कीमत (₹) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 913 | 942 |
| कोलकाता | 939 | 968 |
| मुंबई | 912.50 | 941.50 |
| चेन्नई | 928.50 | 957.50 |
दिल्ली में सिलेंडर का दाम ₹942 पहुंच गया है, जबकि कोलकाता में यह ₹968 तक पहुंच चुका है। महानगरों के अलावा अन्य शहरों में भी स्थानीय करों और परिवहन लागत के आधार पर कीमतों में बदलाव देखने को मिलेगा।
महीने के बीच में कीमतें बढ़ाना क्यों महत्वपूर्ण है?
आमतौर पर तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी, एटीएफ और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। कई बार 15 तारीख को भी संशोधन किया जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के अनुसार महीने के बीच में भी कीमतें बदल रही हैं।
मार्च 2026 में भी कंपनियों ने 7 मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹60 की बढ़ोतरी की थी। अब जून में फिर 7 तारीख को कीमत बढ़ाई गई है। इससे संकेत मिलता है कि तेल कंपनियां केवल तय कैलेंडर तिथियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं और लागत बढ़ने पर तत्काल मूल्य संशोधन कर रही हैं।
आखिर क्यों बढ़ाए गए घरेलू गैस सिलेंडर के दाम?
एलपीजी की कीमतें केवल भारत के घरेलू बाजार से तय नहीं होतीं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने पर उसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है।
पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर गैस उपलब्ध कराई जा रही थी। परिणामस्वरूप सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था।
इसी वजह से कंपनियों ने कीमतों में संशोधन का फैसला लिया है ताकि नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके।
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है?
एलपीजी कीमतों पर चर्चा के दौरान सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कंपनियां नुकसान का दावा क्यों करती हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर तेल कंपनियों को लंबे समय से अंडर-रिकवरी झेलनी पड़ रही है।
ताजा मूल्य वृद्धि से पहले सरकारी कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर लगभग ₹703 का नुकसान हो रहा था। नई बढ़ोतरी के बाद यह नुकसान लगभग ₹42 कम हुआ है। हालांकि इसके बावजूद कंपनियां अभी भी हर सिलेंडर पर भारी वित्तीय बोझ उठा रही हैं।
यही कारण है कि सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर कीमतों में बदलाव करने को मजबूर होती हैं।
क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार जिम्मेदार है?
वैश्विक ऊर्जा बाजार पिछले कुछ महीनों से अस्थिर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री मार्गों से जुड़ी अनिश्चितता और कच्चे तेल एवं गैस की बढ़ती मांग ने ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर दबाव बनाया है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी महंगी होती है तो उसका प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो आने वाले महीनों में एलपीजी की कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है।
क्या सरकार सब्सिडी बढ़ा सकती है?
एलपीजी सब्सिडी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को विशेष सहायता उपलब्ध कराती है। हालांकि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी का दायरा पहले की तुलना में काफी सीमित हो चुका है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे—या तो सब्सिडी का बोझ बढ़ाया जाए या फिर बाजार आधारित कीमतों को स्वीकार किया जाए। फिलहाल सरकार की ओर से अतिरिक्त सब्सिडी को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई है।
आम परिवारों के बजट पर कितना असर पड़ेगा?
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी पहली नजर में छोटी लग सकती है, लेकिन मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है। पहले से बढ़ती खाद्य महंगाई, शिक्षा खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली बिलों के बीच रसोई गैस का महंगा होना मासिक बजट को प्रभावित करेगा।
विशेष रूप से उन परिवारों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा जो हर महीने एक से अधिक सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर महसूस किया जा सकता है, जहां एलपीजी को स्वच्छ ईंधन के रूप में अपनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आगे क्या हो सकते हैं दाम?
आने वाले महीनों में एलपीजी की कीमतें मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करेंगी—अंतरराष्ट्रीय एलपीजी दरें, कच्चे तेल की कीमतें और सरकार की सब्सिडी नीति। यदि वैश्विक बाजार में राहत मिलती है तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं। वहीं ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ने पर आगे और संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी खबर यही है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब ₹29 महंगा हो चुका है और नई कीमतें पूरे देश में लागू हो गई हैं। आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेगी कि रसोई गैस और महंगी होगी या उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।


