नई दिल्ली। करोड़ों होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजर इस समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है। 3 जून से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक का फैसला 5 जून को सामने आएगा। इसी दिन RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा रेपो रेट और मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों की घोषणा करेंगे।
इस बार की बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई को लेकर चिंताओं के बीच RBI को विकास दर और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाना है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या होम लोन की EMI में राहत मिलेगी या फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।
SBI चेयरमैन ने क्या कहा?
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल RBI ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए रेपो रेट में विराम लगाना सबसे उचित विकल्प हो सकता है।
सेट्टी का मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर अभी भी मजबूत बनी हुई है, हालांकि RBI के 6.9 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले वास्तविक वृद्धि दर लगभग 6.6 प्रतिशत रह सकती है। वहीं महंगाई दर 4.6 से 4.7 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है।
उनके अनुसार जब तक महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाती और वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं होगा।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए धन उधार देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और इसका असर ग्राहकों की EMI पर पड़ता है।
इसके विपरीत, जब रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंक आमतौर पर लोन सस्ता करते हैं और होम लोन, कार लोन तथा अन्य कर्जों की EMI कम हो सकती है।
अगर RBI दरें स्थिर रखता है तो क्या होगा?
यदि MPC रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करती है तो अधिकांश बैंक अपने लोन की ब्याज दरों को वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकते हैं।
इसका मतलब होगा:
- होम लोन की EMI में तत्काल राहत नहीं मिलेगी।
- नए कर्ज लेने वालों के लिए ब्याज दरें लगभग मौजूदा स्तर पर रहेंगी।
- बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता बनी रहेगी।
- निवेशकों और बाजार को स्पष्ट नीति संकेत मिलेगा।
क्या ब्याज दर बढ़ने की भी संभावना है?
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल से महंगाई बढ़ सकती है। यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो भविष्य में RBI पर सख्त रुख अपनाने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि फिलहाल अधिकांश बाजार विशेषज्ञ किसी तत्काल दर वृद्धि की संभावना नहीं देख रहे हैं। बाजार की व्यापक राय यही है कि RBI इस बार “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाएगा।
होम लोन लेने वालों के लिए क्या है संदेश?
यदि आप नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं या पहले से फ्लोटिंग रेट पर लोन चला रहे हैं तो 5 जून का फैसला आपके लिए महत्वपूर्ण होगा। यदि RBI दरें स्थिर रखता है तो EMI में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं भविष्य में महंगाई नियंत्रण में रहने पर वर्ष के दूसरे हिस्से में दर कटौती की संभावनाएं फिर बन सकती हैं।
5 जून पर टिकी हैं निगाहें
RBI MPC की बैठक का अंतिम फैसला 5 जून को सुबह घोषित किया जाएगा। केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक की आर्थिक वृद्धि, महंगाई और तरलता को लेकर भविष्य की रणनीति पर भी बाजार की नजर रहेगी। यही संकेत तय करेंगे कि आने वाले महीनों में होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज सस्ते होंगे या महंगे।


