नई दिल्ली। देश के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजर इस समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है। मंगलवार 3 जून से शुरू हुई यह तीन दिवसीय बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
Highlights
- RBI की तीन दिवसीय MPC बैठक शुरू
- शुक्रवार को रेपो रेट पर होगा बड़ा फैसला
- EMI, होम लोन और कार लोन पर रहेगी सबकी नजर
- महंगाई, कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी बने बड़े मुद्दे
- विशेषज्ञों ने ब्याज दरों को लेकर जताए अलग-अलग अनुमान
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति 5 जून को अपने फैसले की घोषणा करेगी। बाजार, उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह तय होगा कि आने वाले महीनों में लोन की EMI बढ़ेगी, घटेगी या मौजूदा स्तर पर बनी रहेगी।
रेपो रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक धन उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है और इसका असर सीधे होम लोन, ऑटो लोन तथा अन्य कर्जों की ब्याज दरों पर पड़ता है।
इसके विपरीत यदि रेपो रेट में कटौती होती है तो बैंकों की फंडिंग लागत कम होती है और ग्राहकों को सस्ती ब्याज दरों का लाभ मिल सकता है। इसी वजह से हर MPC बैठक पर आम लोगों की नजर रहती है।
क्या इस बार EMI में मिलेगी राहत?
पीटीआई द्वारा किए गए सर्वे में शामिल अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। सर्वे में शामिल 11 विशेषज्ञों ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का अनुमान लगाया है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए RBI 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर भी विचार कर सकता है।
यदि रेपो रेट स्थिर रहता है तो मौजूदा EMI पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर RBI दरों में वृद्धि करता है तो आने वाले समय में बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
पिछले साल RBI ने कितनी राहत दी?
भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए RBI ने पिछले वर्ष से अब तक कुल 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इसका लाभ लाखों कर्जधारकों को मिला और कई बैंकों ने अपने लोन सस्ते किए।
लेकिन अब वैश्विक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है।
RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई
RBI का मुख्य लक्ष्य खुदरा महंगाई (CPI Inflation) को 4 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना है। फिलहाल महंगाई इस लक्ष्य के करीब बनी हुई है लेकिन तेल कीमतों में तेजी ने भविष्य की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का मानना है कि RBI के पास फिलहाल इंतजार करने की गुंजाइश है। केंद्रीय बैंक पहले यह देखना चाहेगा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का व्यापक अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता महंगाई पर कितना असर पड़ता है।
इन 3 बड़े बदलावों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
1. महंगाई अनुमान में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बढ़ा सकता है। फिलहाल बाजार में चर्चा है कि यह अनुमान 4.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत के आसपास किया जा सकता है।
Icra की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि जून महीने में खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है।
2. GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती
महंगे तेल और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में RBI अपने आर्थिक विकास (GDP Growth) के अनुमान में मामूली कटौती कर सकता है।
हालांकि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन बाहरी चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपना सकता है।
3. रुपये को लेकर संकेत
हाल के सप्ताहों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी देखने को मिली है। निवेशकों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि RBI विदेशी मुद्रा बाजार और बैंकिंग प्रणाली में नकदी को लेकर क्या रुख अपनाता है।
L&T के ग्रुप चीफ इकोनॉमिस्ट सच्चिदानंद शुक्ला के अनुसार, बाजार RBI के उन संकेतों को ध्यान से देखेगा जो रुपये को स्थिर रखने और वित्तीय बाजारों में भरोसा बनाए रखने से जुड़े होंगे।
होम लोन लेने वालों को क्या करना चाहिए?
यदि आपके पास फ्लोटिंग रेट होम लोन है तो इस बैठक के नतीजों पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों के अनुसार इस बार तत्काल राहत की संभावना कम है, लेकिन ब्याज दरों में स्थिरता भी उधारकर्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।
नए होम लोन लेने की योजना बना रहे लोगों को बैंक ऑफर्स, ब्याज दरों और रीफाइनेंसिंग विकल्पों की तुलना जरूर करनी चाहिए।
साल के अंत तक बदल सकता है समीकरण
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इंडिया की रिसर्च हेड अनुभूति सहाय का मानना है कि घरेलू महंगाई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण आगे चलकर RBI को सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है और रुपये पर दबाव बना रहता है तो वर्ष 2026 के अंत तक ब्याज दरों में 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
RBI की यह MPC बैठक केवल ब्याज दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले महीनों में महंगाई, आर्थिक विकास, रुपये की मजबूती और आम लोगों की EMI का रास्ता तय कर सकती है। फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि केंद्रीय बैंक संतुलित रुख अपनाए और महंगाई तथा विकास के बीच सही संतुलन बनाए रखे। शुक्रवार को आने वाला फैसला करोड़ों भारतीयों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है।


