पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी (CNG) उपभोक्ताओं को भी महंगाई का बड़ा झटका लगा है। मंगलवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी गई। नई दरों के मुताबिक दिल्ली में अब सीएनजी ₹83.09 प्रति किलो हो गई है। इससे पहले शनिवार को भी दाम बढ़ाए गए थे। लगातार बढ़ती कीमतों ने ऑटो चालकों, टैक्सी ड्राइवरों और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इस बार सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि 15 मई से अब तक सीएनजी के दाम चार बार बढ़ चुके हैं और कुल मिलाकर ₹6 प्रति किलो की तेजी आ चुकी है। इससे पहले सोमवार को ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में अब ईंधन महंगाई का असर आम आदमी के मासिक बजट पर साफ दिखाई देने लगा है।
दिल्ली-एनसीआर में नई CNG कीमतें
दिल्ली और आसपास के शहरों में नई कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | नई कीमत |
|---|---|
| दिल्ली | ₹83.09 प्रति किलो |
| नोएडा | ₹91.70 प्रति किलो |
| ग्रेटर नोएडा | ₹91.70 प्रति किलो |
| गाजियाबाद | ₹91.70 प्रति किलो |
| गुरुग्राम | ₹88.12 प्रति किलो |
| फरीदाबाद | ₹89.30 प्रति किलो |
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, कैब और निजी वाहनों में होता है। ऐसे में यह बढ़ोतरी सीधे लाखों परिवारों की जेब पर असर डालने वाली है।
15 मई से लगातार बढ़ रहे हैं दाम
पिछले करीब 10 दिनों में सीएनजी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है।
- 15 मई: ₹2 प्रति किलो बढ़ोतरी
- 17 मई: ₹1 प्रति किलो बढ़ोतरी
- 23 मई: ₹1 प्रति किलो बढ़ोतरी
- 26 मई: ₹2 प्रति किलो बढ़ोतरी
यानी सिर्फ कुछ दिनों में सीएनजी कुल ₹6 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। ईंधन बाजार में इतनी तेज बढ़ोतरी आम तौर पर तब देखने को मिलती है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उथल-पुथल हो।
ईरान पर हमले और पश्चिम एशिया तनाव का असर
इस ताजा बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए नए सैन्य हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर असर डालता है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
सीएनजी की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर रोजाना यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ेगा। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे शहरों में लाखों लोग ऑटो और कैब सेवाओं पर निर्भर हैं। सीएनजी महंगी होने से किराया बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण उनकी कमाई प्रभावित हो रही है। यदि दाम और बढ़ते हैं तो उन्हें किराए बढ़ाने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा सीएनजी पर चलता है। ऐसे में बस संचालन की लागत भी बढ़ सकती है।
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं रहतीं। इसका असर पूरी सप्लाई चेन पर पड़ता है। जब माल ढुलाई महंगी होती है तो रोजमर्रा के सामानों की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं।
सब्जियां, दूध, फल, किराना और दवाइयों जैसी चीजों की ढुलाई मुख्य रूप से सड़क मार्ग से होती है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। अगर आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया तनाव और बढ़ता है तो पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत में CNG की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में सीएनजी की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं:
- अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतें
- कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की दरें
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स
- परिवहन और वितरण लागत
हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में तेजी ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
आगे क्या हो सकता है?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में वैश्विक तेल और गैस बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है। इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर ज्यादा पड़ता है। सरकार फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है तो उपभोक्ताओं को आने वाले समय में और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
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