नई दिल्ली: देशभर में E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पेट्रोल में सस्ता इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो E20 की कीमत शुद्ध पेट्रोल या E10 (10% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) से कम क्यों नहीं है? अब केंद्र सरकार ने इस सवाल का विस्तृत जवाब देते हुए इसकी असली वजह स्पष्ट कर दी है।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की ओर से जारी सवाल-जवाब (Q&A) में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार पहले भी 23 जून 2026 को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर चुकी है, जबकि 4 जुलाई 2026 को ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए स्थिति साफ की थी। इसके बावजूद E20 की कीमत को लेकर लोगों के मन में सवाल बने हुए हैं।
E20 सस्ता क्यों नहीं है? सरकार ने बताया पूरा कारण
सरकार के अनुसार, भारत में इथेनॉल किसानों से अच्छी कीमत पर खरीदा जाता है ताकि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उदाहरण के तौर पर मक्के से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत करीब 71.86 रुपये प्रति लीटर है। इसमें GST, परिवहन, भंडारण और डिपो हैंडलिंग जैसी अतिरिक्त लागत शामिल नहीं होती।
यही वजह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तब E20 तैयार करना शुद्ध पेट्रोल की तुलना में सस्ता नहीं पड़ता।
हालांकि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाए, तो स्थिति बदल जाती है और इथेनॉल मिश्रित ईंधन अपेक्षाकृत अधिक किफायती साबित होता है।
असली सवाल कीमत नहीं, स्थिरता है
सरकार का कहना है कि सही सवाल यह नहीं है कि “E20 सस्ता क्यों नहीं है?”, बल्कि यह होना चाहिए कि “भारत ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल की कीमतों को कैसे नियंत्रित रखा?”
सरकार के मुताबिक, आज भारत में बिकने वाले हर लीटर पेट्रोल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर तैयार इथेनॉल होता है। इस हिस्से की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर दिन बदलने वाले ब्रेंट क्रूड, युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या शिपिंग संकट से प्रभावित नहीं होती।
इसका मतलब है कि वाहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन का लगभग पांचवां हिस्सा वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित रहता है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग का मकसद क्या है?
सरकार ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य किसी एक दिन पेट्रोल को सस्ता करना नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य है—
- आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना।
- विदेशी मुद्रा की बचत करना।
- किसानों की आय बढ़ाना।
- पेट्रोल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखना।
- देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना।
इसी रणनीति के कारण पिछले कुछ वर्षों में भारत में ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और पड़ोसी देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग से अब तक क्या हासिल हुआ?
सरकार के अनुसार, वर्ष 2014-15 से शुरू हुए इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के जरिए देश को कई बड़े फायदे मिले हैं।
- 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत।
- लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता कम हुई।
- करीब 952 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई।
- 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों तक पहुंची।
सरकार का कहना है कि अब भारतीय किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि ऊर्जादाता भी बन चुके हैं और देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इथेनॉल उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती थी
सरकार ने बताया कि शुरुआती दौर में भारत का इथेनॉल उत्पादन लगभग पूरी तरह गन्ने पर निर्भर था। इससे सालाना करीब 400 करोड़ लीटर इथेनॉल का ही उत्पादन हो पाता था, जो ब्लेंडिंग के सीमित लक्ष्यों के लिए भी पर्याप्त नहीं था।
इसी चुनौती को देखते हुए मई 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) लागू की गई। इसके तहत इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए कई मंत्रालयों ने मिलकर काम किया।
सरकार ने फीडस्टॉक बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, लॉजिस्टिक्स मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए।
डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट लगाने की पहल
अगस्त 2021 में इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी तेल विपणन कंपनियों ने उन क्षेत्रों में डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट (DEP) स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किए, जहां इथेनॉल उत्पादन की कमी थी।
इस पहल का उद्देश्य देशभर में इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाकर E20 कार्यक्रम को सफल बनाना और आयातित ईंधन पर निर्भरता को लगातार कम करना था.


