भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का असर अब साफ दिखने लगा है। इस समझौते के बाद भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में तेज़ी आने की उम्मीद जताई जा रही है। उद्योग संगठनों के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में यह निर्यात लगभग दोगुना होकर 280-300 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
दरअसल, इस FTA के तहत भारतीय उत्पादों को न्यूज़ीलैंड में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिला है। इसका सीधा मतलब है कि अब भारतीय कंपनियों को वहां अपने उत्पाद बेचने के लिए अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इससे भारतीय उत्पाद कीमत के मामले में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और मांग बढ़ेगी।
MSME सेक्टर के लिए बड़ा मौका
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) को मिलने वाला है। EEPC India के चेयरमैन पंकज चड्ढा के अनुसार, यह डील MSME सेक्टर के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकती है। कम ट्रेड बैरियर और स्थिर बाजार पहुंच के कारण छोटे निर्यातकों को अब नए अवसर मिलेंगे।
किन सेक्टरों में दिखेगी सबसे ज्यादा ग्रोथ?
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि न्यूज़ीलैंड को भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में पहले से ही स्थिर वृद्धि हो रही है। साल 2025-26 में यह आंकड़ा 8% बढ़कर 140.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इस ग्रोथ में कुछ खास सेक्टरों का योगदान रहा:
- ऑटोमोबाइल सेक्टर
- डेयरी मशीनरी
- मेडिकल और साइंटिफिक उपकरण
- आयरन-स्टील, एल्युमिनियम और जिंक जैसे मेटल प्रोडक्ट
FTA के बाद इन सेक्टरों में और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि लागत कम होने से ऑर्डर बढ़ सकते हैं।
छोटे बाजार में बड़ा पोटेंशियल
हालांकि न्यूज़ीलैंड का बाजार आकार में छोटा है, लेकिन वहां की क्रय शक्ति और स्थिर अर्थव्यवस्था इसे एक हाई-पोटेंशियल डेस्टिनेशन बनाती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि “कम प्रतिस्पर्धा + उच्च गुणवत्ता की मांग” का कॉम्बिनेशन भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद रहेगा।
2030 तक बड़ा लक्ष्य
भारत का इंजीनियरिंग सेक्टर 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ऐसे में FTA जैसे समझौते इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारत पहले ही Australia और United Arab Emirates के साथ समझौते कर चुका है, जिससे निर्यात के नए रास्ते खुले हैं। वहीं, European Union और United States के साथ प्रस्तावित समझौते भविष्य में और बड़ा असर डाल सकते हैं।
क्या है बड़ा संकेत?
यह FTA सिर्फ एक ट्रेड डील नहीं, बल्कि भारत के ग्लोबल एक्सपोर्ट स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। इसका साफ संदेश है कि भारत अब “मैन्युफैक्चरिंग + एक्सपोर्ट पावर” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत के इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स की मौजूदगी दुनिया के और बड़े बाजारों में मजबूत होती नजर आ सकती है।
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