मुंबई, 22 अप्रैल 2026: भारत के वित्तीय बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं—और यह बदलाव केवल आकार (scale) का नहीं, बल्कि “स्मार्ट विस्तार” यानी intelligent scale का होगा। यह बात Challa Sreenivasulu Setty, चेयरमैन, State Bank of India (SBI) ने मुंबई में Clearing Corporation of India Limited (CCIL) के 25वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान कही।
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में वित्तीय बाजारों की दिशा केवल पूंजी के विस्तार से तय नहीं होगी, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगी कि सिस्टम कितना “इंटेलिजेंट” यानी डेटा-सक्षम, टेक्नोलॉजी-चालित और जोखिम-संवेदनशील है।
‘इंटेलिजेंट स्केल’ क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है
परंपरागत रूप से वित्तीय बाजारों में “स्केल” का मतलब अधिक निवेश, अधिक लेन-देन और बड़े मार्केट साइज से रहा है। लेकिन Challa Sreenivasulu Setty के अनुसार, अब यह परिभाषा बदल रही है।
आज के दौर में स्केल का मतलब है—
डेटा का बेहतर उपयोग,
रीयल-टाइम निर्णय क्षमता,
और जोखिम की पहले से पहचान।
यानी, केवल बड़े होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि “स्मार्ट तरीके से बड़ा होना” जरूरी है। यही “इंटेलिजेंट स्केल” की अवधारणा है, जो आने वाले 25 वर्षों में वित्तीय संस्थानों की सफलता तय करेगी।
AI बनेगा गेमचेंजर: जोखिम प्रबंधन से लेकर ऑपरेशन तक
इस बदलाव के केंद्र में Artificial Intelligence (AI) है। SBI चेयरमैन ने कहा कि AI न केवल जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाएगा, बल्कि ऑपरेशनल दक्षता और मार्केट सर्विलांस को भी नए स्तर पर ले जाएगा।
AI की मदद से बैंक और वित्तीय संस्थान बड़े डेटा सेट—जैसे ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, काउंटरपार्टी व्यवहार और मार्केट ट्रेंड—का विश्लेषण कर सकते हैं। इससे उन्हें रीयल-टाइम में जोखिम का आकलन करने और संभावित संकटों को पहले ही पहचानने में मदद मिलेगी।
यह खास तौर पर उस समय महत्वपूर्ण है जब बाजार अधिक जटिल (complex) और आपस में जुड़े (interconnected) होते जा रहे हैं।
छिपे हुए जोखिम: सिस्टमेटिक खतरे क्यों बढ़ रहे हैं
Challa Sreenivasulu Setty ने अपने संबोधन में एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया—भविष्य के जोखिम “कम दिखाई देने वाले” (less visible) लेकिन “ज्यादा खतरनाक” (systemic) होंगे।
इसका मतलब यह है कि पारंपरिक जोखिम मॉडल अब पर्याप्त नहीं रहेंगे। उदाहरण के लिए, एक छोटे से मार्केट इवेंट का असर ग्लोबल स्तर पर तेजी से फैल सकता है, जैसा कि पिछले वर्षों में कई बार देखा गया है।
इसलिए, जोखिम प्रबंधन को अधिक डायनामिक और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाना अनिवार्य हो गया है।
RBI की भूमिका: स्थिरता और लचीलापन के बीच संतुलन
इसी संदर्भ में Reserve Bank of India (RBI) की हालिया नीतियां भी महत्वपूर्ण हैं। RBI के डिप्टी गवर्नर T. Rabi Sankar ने हाल ही में बताया कि ऑफशोर Non-Deliverable Forward (NDF) ट्रेडिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों को आंशिक रूप से वापस लिया गया है।
यह कदम उस समय उठाया गया था जब रुपये के बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव (volatility) देखा गया था। अब जब स्थिति कुछ हद तक स्थिर हुई है, तो RBI धीरे-धीरे बाजार को सामान्य स्थिति में ला रहा है।
रुपया बाजार और ग्लोबल इंटीग्रेशन
RBI का दीर्घकालिक लक्ष्य स्पष्ट है—एक ऐसा वैश्विक बाजार बनाना जहां रुपये से जुड़े जोखिम वाले निवेशक दुनिया में कहीं से भी ट्रेड कर सकें।
T. Rabi Sankar ने यह भी संकेत दिया कि NDF प्रतिबंध अस्थायी थे और उनका उद्देश्य केवल बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना था।
यह दृष्टिकोण “इंटेलिजेंट स्केल” की अवधारणा से मेल खाता है—जहां बाजार को खुला भी रखा जाता है और जोखिम को नियंत्रित भी किया जाता है।
डिजिटल एसेट्स और भविष्य का बाजार
SBI चेयरमैन ने अपने संबोधन में डिजिटल एसेट्स का भी जिक्र किया, जो आने वाले समय में वित्तीय बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में अभी भी नियामकीय स्पष्टता (regulatory clarity) की जरूरत है, लेकिन यह तय है कि ब्लॉकचेन, टोकनाइजेशन और डिजिटल करेंसी जैसे तत्व भविष्य के बाजार को आकार देंगे।
भारत के लिए क्या मायने: अवसर और चुनौतियां
भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार के लिए यह बदलाव एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी।
एक ओर जहां AI और टेक्नोलॉजी भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनने में मदद कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर जोखिम, डेटा सुरक्षा और नियामकीय ढांचे जैसी चुनौतियां भी सामने आएंगी।
इसलिए, “इंटेलिजेंट स्केल” केवल टेक्नोलॉजी अपनाने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक समग्र रणनीति है जिसमें नीति, तकनीक और बाजार व्यवहार सभी शामिल हैं।
निष्कर्ष: स्मार्ट ग्रोथ ही भविष्य का रास्ता
SBI चेयरमैन का “इंटेलिजेंट स्केल” वाला बयान केवल एक विचार नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप है।
वित्तीय बाजार अब केवल आकार में नहीं, बल्कि अपनी समझ, गति और लचीलापन में भी बढ़ेंगे। AI, डेटा और वैश्विक इंटीग्रेशन इस बदलाव के प्रमुख स्तंभ होंगे।
अंततः, वही संस्थान और बाजार सफल होंगे जो न केवल तेजी से बढ़ेंगे, बल्कि समझदारी से और स्थिरता के साथ बढ़ेंगे।
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