भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा संकेत देते हुए Lee Jae-myung ने “न्यू वॉयेज” यानी नए सफर का आह्वान किया है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया–कोरिया बिजनेस फोरम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों देश पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर हाई-टेक साझेदारी, बढ़े हुए व्यापार और गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव की दिशा में कदम बढ़ाएं।
उन्होंने Narendra Modi की “विकसित भारत 2047” दृष्टि की सराहना करते हुए भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का उभरता हुआ स्तंभ बताया।
भारत: वैश्विक ग्रोथ का नया इंजन
राष्ट्रपति ली ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए की।
उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन चुका है और वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बन रहा है।
“विकसित भारत 2047” के विज़न का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की नजर अब भारत के इस परिवर्तन पर है।
2000 साल पुराना रिश्ता: इतिहास से वर्तमान तक
भारत और कोरिया के रिश्ते केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। Gimhae में मौजूद एक प्राचीन पगोडा इसका प्रतीक है, जिसमें इस्तेमाल हुए कुछ पत्थरों को भारत से आया हुआ माना जाता है।
यह ऐतिहासिक संदर्भ इस बात को दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हजारों साल पुराना है।
इंडस्ट्री से इकोनॉमी तक: मजबूत होती साझेदारी
आज के समय में यह रिश्ता औद्योगिक और आर्थिक सहयोग के रूप में भी मजबूत हुआ है।
Samsung, LG और Hyundai जैसी कंपनियां भारत की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
वहीं Reliance Industries, Tata Group और JSW Group जैसे भारतीय समूह भी कोरियाई कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
ट्रेड और निवेश: दोगुना करने का लक्ष्य
राष्ट्रपति ली ने साफ कहा कि मौजूदा व्यापार स्तर दोनों देशों की क्षमता को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत–कोरिया व्यापार को दोगुना किया जा सकता है।
इसके लिए दोनों देशों ने Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को अपग्रेड करने पर सहमति जताई है, जिससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी।
हाई-टेक पार्टनरशिप: भविष्य की कुंजी
भविष्य की साझेदारी को लेकर राष्ट्रपति ली ने हाई-टेक सेक्टर्स पर खास जोर दिया।
- भारत: AI और सॉफ्टवेयर में मजबूत
- कोरिया: सेमीकंडक्टर, बैटरी और ऑटोमोबाइल में अग्रणी
अगर दोनों देश इन क्षेत्रों में मिलकर काम करें, तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत टेक्नोलॉजी गठबंधन बन सकता है।
संस्कृति: रिश्तों की असली ताकत
राष्ट्रपति ली ने कहा कि आर्थिक सहयोग एक जहाज की तरह है, लेकिन संस्कृति वह हवा है जो उसे आगे बढ़ाती है।
भारत में K-pop और K-drama की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, वहीं कोरिया में बॉलीवुड, योग और भारतीय भोजन की पहचान मजबूत हो रही है।
यह सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बना रहा है।
“जुगाड़ + कोरियाई अनुशासन” = ग्लोबल ताकत
राष्ट्रपति ली ने एक दिलचस्प बात कही—भारत की “जुगाड़” यानी रचनात्मक समस्या-समाधान क्षमता और कोरिया की अनुशासन व सामुदायिक भावना अगर साथ आएं, तो यह साझेदारी दुनिया में मिसाल बन सकती है।
यह विचार केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि इनोवेशन और इंडस्ट्री के स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच नई रणनीति
आज जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं और डिजिटल प्रतिबंधों का सामना कर रही है, ऐसे में दोनों देशों के लिए यह साझेदारी और भी अहम हो जाती है।
राष्ट्रपति ली ने कहा कि अब समय है “पुरानी सोच” को छोड़कर नई रणनीति अपनाने का।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह “नया सफर”?
यह पहल कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
- भारत को टेक्नोलॉजी और निवेश में फायदा
- कोरिया को बड़ा बाजार और टैलेंट
- वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति
यह साझेदारी आने वाले वर्षों में एशिया की आर्थिक दिशा को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
Lee Jae-myung का “न्यू वॉयेज” का आह्वान केवल एक भाषण नहीं, बल्कि भारत–कोरिया संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत है।
India और South Korea अगर इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो यह साझेदारी व्यापार, तकनीक और संस्कृति—तीनों क्षेत्रों में एक नई मिसाल बन सकती है।
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