नई दिल्ली। सोने और चांदी में निवेश करने वालों के लिए शुक्रवार का कारोबारी सत्र काफी झटका देने वाला साबित हुआ। सप्ताह भर तक अपेक्षाकृत स्थिर रहने के बाद बुलियन मार्केट में अचानक तेज बिकवाली देखने को मिली और कुछ ही घंटों में सोने तथा चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 4,000 रुपये से अधिक टूट गया, जबकि चांदी में 15,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़े हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत मिलने के बाद निवेशकों ने यह मानना शुरू कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी पर दबाव बढ़ गया।
MCX पर कितना टूटा सोना और चांदी?
शुक्रवार रात के कारोबार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना 4,297 रुपये टूटकर 1,55,250 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। दिन के दौरान इसका उच्च स्तर 1,58,598 रुपये और निचला स्तर 1,55,245 रुपये दर्ज किया गया।
वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी करीब 15,696 रुपये गिरकर 2,49,100 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। कारोबारी सत्र के दौरान इसका उच्च स्तर 2,61,892 रुपये और निचला स्तर 2,48,909 रुपये रहा।
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार इतनी बड़ी गिरावट तब देखने को मिलती है जब किसी बड़े आर्थिक आंकड़े से बाजार की ब्याज दरों को लेकर धारणा अचानक बदल जाए।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने क्यों बढ़ाया दबाव?
अमेरिकी श्रम विभाग (Bureau of Labor Statistics) द्वारा जारी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
मई महीने में अमेरिका में 1.72 लाख नई नौकरियां जुड़ीं। इससे पहले बाजार विशेषज्ञ केवल 85 हजार नई नौकरियों की उम्मीद कर रहे थे। इतना बड़ा अंतर निवेशकों के लिए चौंकाने वाला रहा।
अप्रैल महीने के आंकड़ों को भी संशोधित कर पहले से बेहतर दिखाया गया। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी श्रम बाजार अभी भी मजबूत बना हुआ है और आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती नहीं आई है।
जब रोजगार मजबूत रहता है तो उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है और महंगाई को नियंत्रित करना फेडरल रिजर्व के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्याज दरों का सोने से क्या संबंध है?
सोना और चांदी ऐसे निवेश साधन हैं जिन पर ब्याज नहीं मिलता। जब बैंक जमा, बॉन्ड और अन्य ब्याज आधारित निवेश आकर्षक बनने लगते हैं, तब निवेशक बुलियन से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की ओर जाने लगते हैं।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद यही हुआ। बाजार को लगने लगा कि फेडरल रिजर्व जल्द दर कटौती नहीं करेगा। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।
डॉलर मजबूत होने का सीधा असर सोने पर पड़ता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है और मांग कमजोर पड़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टूटा बुलियन
गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में तेज कमजोरी देखने को मिली।
कॉमेक्स (COMEX) पर गोल्ड फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई और रोजगार आंकड़े जारी होने के बाद सोना 100 डॉलर से ज्यादा टूट गया। इसी तरह चांदी में भी छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
यह दर्शाता है कि गिरावट का कारण किसी एक देश की मांग या आपूर्ति नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतक रहे।
क्या मध्य-पूर्व तनाव का असर खत्म हो गया?
पिछले कुछ महीनों से मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को लगातार समर्थन मिल रहा था। निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जा रहे थे।
हालांकि शुक्रवार को अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का प्रभाव इतना मजबूत रहा कि भू-राजनीतिक चिंताएं पीछे छूट गईं। बाजार फिलहाल इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहा है कि फेडरल रिजर्व आगे क्या कदम उठाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो सोने को फिर से समर्थन मिल सकता है। लेकिन फिलहाल ब्याज दरों का मुद्दा ज्यादा प्रभावी नजर आ रहा है।
RBI की महंगाई चिंता भी अहम
भारत में भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। RBI ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।
ऊर्जा कीमतों में तेजी, कच्चे तेल की बढ़ती लागत और खाद्य वस्तुओं पर संभावित दबाव को देखते हुए महंगाई के जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
ऐसे में यदि घरेलू महंगाई बढ़ती है तो लंबे समय में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है क्योंकि निवेशक इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव के रूप में देखते हैं।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घबराहट में खरीदारी या बिकवाली करने से बचना चाहिए। वर्तमान गिरावट का मुख्य कारण एक आर्थिक डेटा है, लेकिन बुलियन बाजार की दिशा केवल एक रिपोर्ट से तय नहीं होती।
निवेशकों को आने वाली अमेरिकी महंगाई रिपोर्ट, फेडरल रिजर्व की अगली बैठक और डॉलर इंडेक्स की चाल पर नजर रखनी चाहिए। यदि ब्याज दरों में कटौती की संभावना और कमजोर होती है तो सोने में कुछ और दबाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर यदि महंगाई कम होती है और फेड दर कटौती के संकेत देता है तो सोना दोबारा तेजी पकड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
बाजार की नजर अब पूरी तरह अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी हुई है। मजबूत रोजगार आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसका मतलब यह है कि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं।
अल्पकाल में सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी साबित हो सकती है। खासकर उन निवेशकों के लिए जो पोर्टफोलियो में बुलियन का हिस्सा बढ़ाना चाहते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने वैश्विक बुलियन बाजार की दिशा बदल दी है और आने वाले कुछ सप्ताह सोने-चांदी के निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।


