CMR Green Technologies Ltd के शेयर निवेशकों के बीच लगातार चर्चा में बने हुए हैं। नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग सेक्टर की इस कंपनी ने IPO के दौरान रिकॉर्डतोड़ निवेशक भागीदारी हासिल की थी और लिस्टिंग के बाद भी शेयर ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है। शुक्रवार के कारोबार में कंपनी का शेयर 3.61% की तेजी के साथ ₹252.70 पर पहुंच गया, जो इसके IPO के अपर प्राइस बैंड ₹192 से करीब 31.6% अधिक है।
कंपनी का IPO जून 2026 में आया था और इसे निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला था। इश्यू कुल 127.04 गुना सब्सक्राइब हुआ था, जबकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) श्रेणी में 270.46 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) श्रेणी में 172.34 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया था। मजबूत सब्सक्रिप्शन और ऊंचे ग्रे मार्केट प्रीमियम ने उस समय इसे सबसे चर्चित IPO में शामिल कर दिया था।
IPO निवेशकों को कितना मिला रिटर्न?
CMR Green Technologies का IPO ₹182-₹192 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में आया था। यदि किसी निवेशक को IPO में शेयर आवंटित हुए थे और उसने अब तक होल्ड कर रखा है, तो उसे करीब 31.6% का रिटर्न मिल चुका है।
- IPO Price: ₹192
- मौजूदा शेयर भाव: ₹252.70
- प्रति शेयर लाभ: ₹60.70
- कुल रिटर्न: लगभग 31.6%
78 शेयरों के एक लॉट के हिसाब से देखें तो एक लॉट पर निवेशकों को करीब ₹4,735 का लाभ मिला है।
निवेशकों ने क्यों दिखाई थी इतनी दिलचस्पी?
CMR Green Technologies भारत की प्रमुख मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी का कारोबार रीसाइक्ल्ड एल्यूमीनियम और अन्य धातु उत्पादों के निर्माण पर आधारित है। भारत में सर्कुलर इकोनॉमी, कार्बन उत्सर्जन में कमी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर बढ़ते फोकस के कारण इस सेक्टर की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं।
कंपनी की खास बात यह है कि इसके ग्राहक देश की कई बड़ी ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां हैं। इनमें मारुति सुज़ुकी, होंडा कार्स इंडिया, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, रॉयल एनफील्ड और हिंदाल्को जैसी कंपनियां शामिल हैं।
कंपनी क्या करती है?
CMR Green Technologies का मुख्य व्यवसाय धातु कचरे को दोबारा उपयोग योग्य औद्योगिक धातुओं में बदलना है। कंपनी एल्यूमीनियम स्क्रैप, पुराने वाहन पार्ट्स, इंडस्ट्रियल स्क्रैप और अन्य धातु अपशिष्ट को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले रीसाइक्ल्ड उत्पाद तैयार करती है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में हल्के और टिकाऊ मटेरियल की मांग बढ़ने के कारण रीसाइक्ल्ड एल्यूमीनियम की खपत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि विश्लेषक इस कंपनी को भारत की बढ़ती रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण खिलाड़ी मानते हैं।
भारत में क्यों बढ़ रहा है मेटल रीसाइक्लिंग सेक्टर?
भारत सरकार लगातार सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। रीसाइक्ल्ड धातुओं के उपयोग से ऊर्जा की बचत होती है और उत्पादन लागत भी कम होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती है। CMR Green Technologies इसी थीम का प्रमुख लाभार्थी मानी जा रही है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
हालांकि शेयर ने IPO के बाद अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन निवेशकों को कंपनी की आगामी तिमाही आय, मेटल स्क्रैप की कीमतों में उतार-चढ़ाव, ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग और मार्जिन पर नजर रखनी होगी।
कंपनी का कारोबार कमोडिटी कीमतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए एल्यूमीनियम और अन्य धातुओं की वैश्विक कीमतों में तेज बदलाव का असर इसके मुनाफे पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
CMR Green Technologies ने IPO के दौरान मिले निवेशकों के भरोसे को अब तक बनाए रखा है। ₹192 के इश्यू प्राइस से बढ़कर शेयर ₹252.70 तक पहुंच चुका है और निवेशकों को 31% से अधिक रिटर्न दे चुका है। भारत में तेजी से बढ़ती रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग कंपनी के लिए लंबी अवधि में सकारात्मक कारक साबित हो सकते हैं। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)
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