भारत में तेजी से बढ़ते फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई ऊर्जा देने के लिए NIFTEM Thanjavur ने एक अहम पहल की है। संस्थान ने 16 और 17 अप्रैल को अपने परिसर में “Food Business Start-up Enabler Programme 2.0” का आयोजन किया, जिसमें देशभर से आए 82 प्रतिभागियों—छात्रों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इच्छुक उद्यमियों—को फूड बिजनेस शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की ट्रेनिंग दी गई।
यह पहल Ministry of Food Processing Industries के सहयोग से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं को सिर्फ आइडिया देने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें एक सफल बिजनेस में बदलने के लिए जरूरी कौशल सिखाना था।
सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, पूरा बिजनेस इकोसिस्टम समझाया गया
यह कार्यक्रम केवल थ्योरी तक सीमित नहीं था। इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि प्रतिभागियों को फूड स्टार्टअप की पूरी यात्रा का व्यावहारिक अनुभव मिल सके—आइडिया से लेकर मार्केट तक।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में फूड बिजनेस कैसे शुरू किया जाए, उसे कैसे मैनेज किया जाए और आगे कैसे स्केल किया जाए।
फूड बिजनेस मैनेजमेंट विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कि युवा उद्यमियों में न केवल ज्ञान बढ़े, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी विकसित हो।
किन-किन विषयों पर मिला प्रशिक्षण?
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों को फूड इंडस्ट्री के लगभग हर महत्वपूर्ण पहलू से परिचित कराया गया।
उन्हें बताया गया कि एक सफल फूड स्टार्टअप के लिए केवल अच्छा प्रोडक्ट होना काफी नहीं, बल्कि सही रणनीति और सिस्टम भी जरूरी है।
ट्रेनिंग में शामिल प्रमुख क्षेत्र थे:
- पैकेजिंग टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट प्रिजर्वेशन
- कॉर्पोरेट कानून, गवर्नेंस और टैक्सेशन
- ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीतियां
- प्राइसिंग और मार्केट पोजिशनिंग
- एक्सपोर्ट अवसर और इंटरनेशनल मार्केट
इन विषयों के जरिए प्रतिभागियों को यह समझने का मौका मिला कि फूड बिजनेस केवल किचन तक सीमित नहीं, बल्कि एक जटिल और बहुआयामी इंडस्ट्री है।
फूड सेफ्टी और रेगुलेशन पर खास फोकस
भारत में फूड बिजनेस शुरू करने के लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है। इसीलिए कार्यक्रम में फूड सेफ्टी और क्वालिटी एश्योरेंस पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
प्रतिभागियों को बताया गया कि:
- सरकारी नियमों का पालन कैसे करें
- क्वालिटी स्टैंडर्ड्स कैसे बनाए रखें
- उपभोक्ताओं का भरोसा कैसे जीतें
इसके साथ ही उन्हें पब्लिक पॉलिसी और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जिससे वे वित्तीय सहायता और ग्रांट्स का लाभ उठा सकें।
स्टार्टअप सपोर्ट और इन्क्यूबेशन की जानकारी
NIFTEM Thanjavur ने प्रतिभागियों को विभिन्न इन्क्यूबेशन सुविधाओं और संस्थागत समर्थन के बारे में भी बताया।
आज के समय में स्टार्टअप केवल एक आइडिया नहीं होता—उसे सही मार्गदर्शन, नेटवर्क और फंडिंग की जरूरत होती है।
कार्यक्रम में यह समझाया गया कि:
- इन्क्यूबेशन सेंटर कैसे मदद करते हैं
- निवेशकों तक कैसे पहुंच बनाई जाए
- टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे किया जाए
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से सीधा संवाद
इस कार्यक्रम की एक बड़ी खासियत यह रही कि इसमें अनुभवी प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने सीधे प्रतिभागियों से बातचीत की।
उन्होंने अपने अनुभव साझा किए, रियल-लाइफ केस स्टडीज़ बताए और प्रतिभागियों के सवालों का जवाब दिया।
इससे प्रतिभागियों को केवल किताबों की जानकारी नहीं, बल्कि वास्तविक बाजार की समझ भी मिली।
भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर: क्यों है बड़ा मौका?
भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है:
- बढ़ती आबादी और बदलती लाइफस्टाइल
- पैकेज्ड फूड की बढ़ती मांग
- एक्सपोर्ट के नए अवसर
ऐसे में यह सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता दोनों के बड़े अवसर पैदा कर रहा है।
विश्लेषण: ऐसे प्रोग्राम क्यों जरूरी हैं?
इस तरह के कार्यक्रम कई स्तर पर महत्वपूर्ण हैं:
- युवा उद्यमियों को सही दिशा मिलती है
- स्टार्टअप फेल होने की संभावना कम होती है
- देश में नवाचार और रोजगार बढ़ता है
अगर इस तरह की पहल लगातार होती रही, तो भारत का फूड स्टार्टअप इकोसिस्टम और मजबूत हो सकता है।
निष्कर्ष
NIFTEM Thanjavur का यह कार्यक्रम दिखाता है कि भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अब केवल नीतियां ही नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस पहल भी हो रही है।
82 प्रतिभागियों के लिए यह ट्रेनिंग सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि उनके भविष्य के बिजनेस की नींव बन सकती है।
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