Ghaziabad-Jewar Namo Bharat Corridor: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को दिल्ली-NCR के प्रमुख इलाकों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी योजना सामने आई है। प्रस्तावित गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर की शुरुआती डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्तावित रूट की कुल लंबाई करीब 72 किलोमीटर होगी और गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक का सफर करीब 50 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह कॉरिडोर केवल नमो भारत सेवा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें मेट्रो सेवाओं को भी शामिल करने की योजना है। इससे गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच तेज सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी विकसित हो सकती है। खास बात यह है कि प्रस्तावित रूट में कुल 23 स्टेशनों की योजना है, जिसमें गाजियाबाद स्टेशन के अलावा 22 नए स्टेशन शामिल होंगे।
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक 72 KM का कॉरिडोर
प्रस्तावित Ghaziabad-Jewar Namo Bharat Corridor गाजियाबाद नमो भारत स्टेशन से शुरू होकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक जाएगा। इसकी लंबाई लगभग 72 किलोमीटर बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक कॉरिडोर का करीब 71 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि लगभग 1 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड बनाया जाएगा।
अंडरग्राउंड हिस्सा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 और ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर के आसपास प्रस्तावित है। यानी एयरपोर्ट परिसर के भीतर यात्रियों को टर्मिनल और अन्य परिवहन सुविधाओं तक पहुंचाने के लिए भूमिगत कनेक्टिविटी विकसित की जा सकती है।
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को NCR के उन हिस्सों से जोड़ना है, जहां से बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्ट तक पहुंच सकते हैं।
50 मिनट से कम में एयरपोर्ट पहुंचने का दावा
प्रस्तावित कॉरिडोर के पूरा होने के बाद गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। योजना के अनुसार, गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक का सफर करीब 50 मिनट से कम में पूरा किया जा सकेगा।
इसके अलावा अलग-अलग NCR क्षेत्रों से एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए भी समय में कमी आने का अनुमान है। प्रस्तावित यात्रा समय के मुताबिक:
- गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 50 मिनट से कम
- सराय काले खां से जेवर एयरपोर्ट: 70 मिनट से कम
- दिल्ली एयरोसिटी से जेवर एयरपोर्ट: 80 मिनट से कम
- बेगमपुल से जेवर एयरपोर्ट: 85 मिनट से कम
अगर यह योजना प्रस्तावित रूप में आगे बढ़ती है, तो दिल्ली-NCR के अलग-अलग हिस्सों से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचना मौजूदा सड़क आधारित यात्रा की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
कॉरिडोर पर 23 स्टेशन बनाने की योजना
प्रस्तावित कॉरिडोर में कुल 23 स्टेशन होने की योजना है। इनमें मौजूदा गाजियाबाद नमो भारत स्टेशन के अलावा 22 स्टेशन शामिल होंगे। अधिकारियों के अनुसार, नए स्टेशनों में अधिकांश एलिवेटेड होंगे और एयरपोर्ट के पास अंतिम स्टेशन अंडरग्राउंड बनाया जाएगा।
रूट पर स्टेशन व्यवस्था को इस तरह तैयार करने का प्रस्ताव है कि नमो भारत और मेट्रो दोनों सेवाओं के बीच यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। इससे केवल एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के विकसित हो रहे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मजबूत हो सकता है।
नमो भारत के साथ मेट्रो सेवा भी मिलेगी
इस कॉरिडोर की खासियत इसका RRTS-कम-मेट्रो मॉडल है। यानी एक ही प्रस्तावित कॉरिडोर पर नमो भारत और मेट्रो सेवाओं को संचालित करने की योजना बनाई गई है।
जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद नमो भारत स्टेशन से Eco-Tech VI तक मेट्रो सेवा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इस हिस्से में 18 स्टेशन शामिल किए जाने की योजना बताई गई है।
कॉरिडोर पर कुल 11 स्टेशनों को मेट्रो और नमो भारत दोनों सेवाओं के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। इनमें से सात स्टेशन दोनों सेवाओं के लिए कॉमन हो सकते हैं। इस तरह यात्रियों को अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच इंटरचेंज की सुविधा मिल सकती है।
प्रस्तावित योजना में भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए भी प्रावधान रखा गया है। बाद के चरण में अलाइनमेंट पर एक नमो भारत स्टेशन और 11 अतिरिक्त मेट्रो स्टेशन जोड़ने की संभावना शामिल की गई है।
दो डिपो भी होंगे प्रस्तावित
कॉरिडोर के संचालन और ट्रेनों के रखरखाव के लिए दो डिपो प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें पहला इकोटेक-VI डिपो होगा, जिसे मुख्य डिपो-कम-वर्कशॉप के रूप में विकसित करने की योजना है।
दूसरा डिपो YEIDA सेक्टर-21 में प्रस्तावित है। इसे सेकेंडरी डिपो के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। दो डिपो होने से भविष्य में इस लंबे कॉरिडोर पर ट्रेन संचालन और रखरखाव की व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
पहले सराय काले खां से जेवर तक सीधे कॉरिडोर पर हुआ था विचार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दिल्ली से कनेक्टिविटी को लेकर पहले एक अलग योजना पर भी विचार किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में सराय काले खां से जेवर एयरपोर्ट तक सीधे दिल्ली कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव सामने आया था।
बाद में इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया और गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर को प्रस्तावित रूट के तौर पर आगे रखा गया। हालांकि, एयरपोर्ट को दिल्ली से सीधे जोड़ने की जरूरत को लेकर चर्चा इसके बाद भी जारी रही।
दिसंबर 2025 में YEIDA की ओर से NCRTC को एक संशोधित अलाइनमेंट के लिए सर्वे करने और नई प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का प्रस्ताव भी दिया गया था। इस रूट में सराय काले खां टावर से नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन और सूरजपुर होते हुए एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी पर विचार किया गया था।
DPR को लेकर मंत्रालय ने उठाए थे सवाल
प्रस्तावित गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर की DPR को लेकर पहले केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) की ओर से कुछ आपत्तियां सामने आई थीं।
मंत्रालय की प्रमुख चिंताओं में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी का था। मंत्रालय का मानना था कि एयरपोर्ट को दिल्ली से जोड़ने के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर की कनेक्टिविटी पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा यात्रियों की वास्तविक जरूरत और संभावित संख्या का आकलन करने के लिए जरूरी डेस्टिनेशन सर्वे को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
किसी भी बड़े सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट के लिए संभावित यात्रियों की संख्या यानी राइडरशिप महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि यात्रियों की संख्या अनुमान से कम रहती है, तो लंबे कॉरिडोर की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से DPR में यात्री मांग का सही आकलन महत्वपूर्ण है।
एक्वा लाइन एक्सटेंशन से ओवरलैप का भी मुद्दा
MoHUA की आपत्तियों में एक और अहम मुद्दा प्रस्तावित कॉरिडोर का NMRC की एक्वा लाइन एक्सटेंशन के साथ संभावित ओवरलैप था।
मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया था कि एक ही एलिवेटेड कॉरिडोर पर नमो भारत और मेट्रो दोनों सेवाओं का सुरक्षित संचालन किस तरह किया जाएगा। चूंकि नमो भारत और मेट्रो सेवाओं की परिचालन जरूरतें अलग हो सकती हैं, इसलिए ट्रैक, सिग्नलिंग, स्टेशन डिजाइन और संचालन व्यवस्था को लेकर विस्तृत तकनीकी योजना जरूरी होगी।
YEIDA की ओर से इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिए गए थे। इसके बावजूद एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, संभावित राइडरशिप और अलाइनमेंट को लेकर सवाल महत्वपूर्ण बने रहे।
ग्रेटर नोएडा के घनी आबादी वाले इलाकों को भी फायदा
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर का संभावित लाभ केवल एयरपोर्ट यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित रूट ग्रेटर नोएडा के कई ऐसे इलाकों को जोड़ सकता है, जहां आने वाले वर्षों में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास भी बड़े पैमाने पर औद्योगिक, लॉजिस्टिक, व्यावसायिक और आवासीय विकास की योजनाएं बन रही हैं। ऐसे में एयरपोर्ट के साथ तेज सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी भविष्य में इन क्षेत्रों के विकास को गति दे सकती है।
गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
नोएडा एयरपोर्ट के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कॉरिडोर?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी होगी। किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की सफलता केवल रनवे और टर्मिनल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह भी जरूरी होता है कि यात्री शहर और आसपास के प्रमुख इलाकों से एयरपोर्ट तक आसानी से पहुंच सकें।
इसी लिहाज से गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि प्रस्तावित योजना आगे बढ़ती है तो NCR के कई हिस्सों से एयरपोर्ट तक तेज रेल कनेक्टिविटी मिल सकती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी यह प्रस्तावित परियोजना है और इसकी DPR को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए स्टेशन, अलाइनमेंट, लागत, निर्माण की समयसीमा और संचालन से जुड़ी अंतिम जानकारी में बदलाव संभव है।
दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी अब भी अहम मुद्दा
इस पूरे प्रोजेक्ट में दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बनी हुई है। प्रस्तावित गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर एयरपोर्ट को गाजियाबाद और NCR के अन्य हिस्सों से जोड़ सकता है, लेकिन दिल्ली के प्रमुख हिस्सों से सीधे एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यात्रियों को इंटरचेंज की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि एयरपोर्ट की दीर्घकालिक कनेक्टिविटी को लेकर दिल्ली से सीधे जुड़ने वाले विकल्पों पर भी चर्चा होती रही है। भविष्य में एयरपोर्ट की यात्री संख्या बढ़ने के साथ इस तरह की कनेक्टिविटी की जरूरत और बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
Ghaziabad-Jewar Namo Bharat Corridor नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दिल्ली-NCR के बीच तेज सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव हो सकता है। करीब 72 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर, लगभग 50 मिनट की यात्रा, 23 प्रस्तावित स्टेशनों, नमो भारत और मेट्रो सेवाओं के संयोजन तथा दो डिपो की योजना इसे एक बड़े रीजनल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के रूप में पेश करती है।
हालांकि, परियोजना को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। DPR को अंतिम रूप देने, अलाइनमेंट, यात्री मांग, दिल्ली कनेक्टिविटी और तकनीकी पहलुओं पर मंजूरी के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर साफ होगी। अगर यह कॉरिडोर प्रस्तावित योजना के अनुसार विकसित होता है, तो आने वाले वर्षों में गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को काफी मजबूत किया जा सकता है।


