पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लगातार असर देखने को मिल रहा है। ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन में बाधा और महंगाई के दबाव के बाद अब इसका सीधा असर खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ने लगा है। खासकर अमेरिका में हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं, जहां गेहूं उत्पादन और बुवाई दोनों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
अमेरिका, जो दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक माना जाता है, वहां अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि किसानों के लिए गेहूं की खेती फायदे का सौदा नहीं रह गई है। इसी कारण देश में गेहूं की बुवाई इतिहास के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गई है।
वैश्विक संकट का सीधा असर: तेल से शुरू होकर खेतों तक पहुंची समस्या

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने फर्टिलाइजर, ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर प्रोडक्शन की लागत को भी प्रभावित किया है। यही वजह है कि अमेरिकी किसानों के लिए खेती की लागत तेजी से बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर धीरे-धीरे खाद्य उत्पादन और वैश्विक महंगाई पर भी दिखने लगा है।
अमेरिका में गेहूं की कीमतों में तेज उछाल
हाल के ट्रेडिंग सत्र में अमेरिकी गेहूं बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया।
मंगलवार को गेहूं की फ्यूचर कीमत में करीब 4.1% की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह लगभग 6.58 डॉलर प्रति बुशेल तक पहुंच गई। यह स्तर जून 2024 के बाद सबसे ऊंचा माना जा रहा है।
अगर सालाना आधार पर देखें तो अमेरिका में गेहूं की कीमतों में लगभग 30% तक की वृद्धि हो चुकी है। इसका सीधा असर उपभोक्ता बाजार पर भी पड़ रहा है, जहां खाने-पीने की चीजें महंगी होती जा रही हैं।
खेती के हालात: बुवाई ऐतिहासिक स्तर पर कमजोर
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के आंकड़ों के अनुसार इस साल स्थिति काफी असामान्य है।
रिपोर्ट बताती है कि देश में केवल लगभग 30% गेहूं ही “उच्च गुणवत्ता” की श्रेणी में आता है। बाकी फसल मौसम, सूखे और अन्य कारणों से प्रभावित हो रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि फसल की पकने की गति सामान्य वर्षों से तेज है। जहां पिछले 5 वर्षों में इस समय तक केवल लगभग 21% फसल तैयार होती थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा काफी अधिक है। इसका मतलब है कि फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सूखा और लागत ने बढ़ाई मुश्किलें
अमेरिका के कई गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में सूखा एक बड़ी समस्या बन चुका है। पानी की कमी के कारण न सिर्फ उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी कमजोर हो रही है।
इसके साथ ही फर्टिलाइजर, बीज और कृषि उपकरणों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। कई किसानों का कहना है कि गेहूं की खेती अब पहले जितनी लाभकारी नहीं रही।
इसी कारण बड़ी संख्या में किसान गेहूं की बुवाई कम कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में सप्लाई और भी कम हो सकती है।
ऐतिहासिक गिरावट की ओर बुवाई का रुझान
अमेरिका में गेहूं की बुवाई का रिकॉर्ड 1919 से रखा जा रहा है। लेकिन इस साल का ट्रेंड इस पूरे इतिहास में सबसे कमजोर माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, किसान अब गेहूं की जगह ऐसे फसलों की ओर रुख कर रहे हैं जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे सकें। यह बदलाव लंबे समय में अमेरिकी कृषि ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है।
महंगाई का नया खतरा: सिर्फ अमेरिका नहीं, दुनिया प्रभावित
गेहूं सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक जरूरी खाद्य वस्तु है। अमेरिका में उत्पादन घटने का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अगर उत्पादन में गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में:
- वैश्विक खाद्य कीमतें और बढ़ सकती हैं
- विकासशील देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है
- सप्लाई चेन और कमजोर हो सकती है
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति अगर लंबे समय तक बनी रही तो यह एक नए खाद्य महंगाई चक्र को जन्म दे सकती है।
ईरान युद्ध और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर
ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जैसे कदमों की चर्चा ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
इस तरह की घटनाओं का असर सीधे तौर पर ऊर्जा बाजार और फिर कृषि उत्पादन तक पहुंचता है। यही वजह है कि आज सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि खाने की चीजें भी महंगी होती जा रही हैं।
निष्कर्ष: आने वाले समय में चुनौती और बढ़ सकती है
अमेरिका में गेहूं संकट सिर्फ एक कृषि समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ बड़ा मुद्दा बन चुका है।
सूखे, बढ़ती लागत, युद्ध और सप्लाई बाधाओं के बीच गेहूं उत्पादन का गिरना आने वाले समय में खाद्य महंगाई को और तेज कर सकता है।
फिलहाल स्थिति यही दिखा रही है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को इसका असर झेलना पड़ सकता है।
Also Read:


