भारत में शादी और परिवार को हमेशा से एक मजबूत सामाजिक संस्था माना गया है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तलाक के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या रिश्ते पहले से ज्यादा कमजोर हो रहे हैं? क्या कानून संतुलित है? और क्या न्याय प्रणाली हर किसी को बराबर सुन पाती है?
इन्हीं अहम सवालों पर गहरी और ईमानदार बातचीत देखने को मिली लोकप्रिय पॉडकास्ट Mic Pe Milenge Podcast के एक खास एपिसोड में, जहां होस्ट Tamanna ने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Advocate Ishita Sinha से विस्तार से चर्चा की।
यह एपिसोड सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली, रिश्तों और जेंडर रियलिटी पर एक गहरा विश्लेषण है।
📺 पूरा एपिसोड देखें
⚖️ बढ़ते तलाक के मामले: क्या है असली वजह?
Advocate Ishita Sinha के अनुसार, भारत में तलाक के मामलों में बढ़ोतरी सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक संरचना का संकेत है।
पहले जहां लोग सामाजिक दबाव के कारण रिश्ते निभाते थे, वहीं अब व्यक्ति अपनी मानसिक शांति और आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देने लगा है। शहरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता और जागरूकता ने लोगों को यह समझने में मदद की है कि एक अस्वस्थ रिश्ते में रहने से बेहतर है अलग हो जाना।
लेकिन इसके साथ ही एक चिंता भी जुड़ी है—क्या हर मामला सच में इतना गंभीर होता है कि तलाक ही एकमात्र समाधान बन जाए?
🧠 कोर्टरूम की सच्चाई: हर केस के पीछे एक कहानी
इशिता सिन्हा ने बताया कि कोर्ट में आने वाला हर केस सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं होता, बल्कि उसके पीछे एक भावनात्मक और मानवीय कहानी होती है।
“हर व्यक्ति जो कोर्ट में आता है, उसकी अपनी एक कहानी होती है—और एक वकील के रूप में आपको सिर्फ केस नहीं, उस इंसान को समझना होता है।”
उनके मुताबिक, कई बार छोटे-छोटे गलतफहमियां बड़े विवाद में बदल जाती हैं, जिन्हें समय रहते सुलझाया जा सकता है।
🤝 पहला केस और सुलह का महत्व
इशिता सिन्हा ने अपने पहले केस का जिक्र करते हुए बताया कि वह मामला तलाक तक नहीं पहुंचा, बल्कि सुलह के जरिए खत्म हुआ।
यह अनुभव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे उन्होंने सीखा कि कानून का उद्देश्य सिर्फ जीतना नहीं, बल्कि समाधान निकालना भी है।
🚨 घरेलू हिंसा: एकतरफा नहीं है सच्चाई

भारत में घरेलू हिंसा को अक्सर महिलाओं के खिलाफ अपराध के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस पॉडकास्ट में एक अलग और कम चर्चा वाला पहलू सामने आया।
इशिता सिन्हा के अनुसार:
- कई मामलों में पुरुष भी गंभीर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करते हैं
- लेकिन सामाजिक धारणा और कानूनी ढांचे के कारण उनकी आवाज़ अक्सर दब जाती है
- पुलिस भी कई बार कानूनी सीमाओं के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती
यह बात जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की जरूरत को उजागर करती है।
⚖️ क्या भारतीय कानून सिर्फ महिलाओं के पक्ष में है?
यह एक विवादित लेकिन महत्वपूर्ण सवाल है।
इशिता सिन्हा ने इस धारणा को चुनौती देते हुए कहा कि:
- भारतीय न्याय प्रणाली का आधार निष्पक्षता है
- हर केस में दोनों पक्षों को सुना जाता है
- किसी भी निर्णय से पहले पूरी जांच होती है
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “महिला वकील कानून का दुरुपयोग करती हैं” जैसी धारणाएं गलत और आधारहीन हैं।
🧩 न्याय प्रणाली की सीमाएं और खामियां
पॉडकास्ट में यह भी सामने आया कि भारतीय न्याय प्रणाली में कुछ खामियां मौजूद हैं:
- केसों की लंबी अवधि
- पुलिस के पास सीमित अधिकार
- कुछ कानूनों में अस्पष्टता
इन कारणों से कई बार पीड़ितों को तुरंत न्याय नहीं मिल पाता।
💰 मेंटेनेंस (Maintenance) पर बहस
मेंटेनेंस यानी गुजारा भत्ता एक ऐसा विषय है जिस पर समाज में काफी बहस होती है।
इशिता सिन्हा के अनुसार:
- हर केस में मेंटेनेंस तय नहीं होता
- यह पूरी तरह परिस्थितियों और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है
- कोर्ट यह देखता है कि किसे वास्तव में सहायता की जरूरत है
उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
👩⚖️ कानून में महिलाओं की चुनौतियां
एक महिला वकील के रूप में इशिता सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि:
- उन्हें लगातार खुद को साबित करना पड़ता है
- परिवार और समाज से अपेक्षाएं अलग होती हैं
- प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण होता है
फिर भी उन्होंने यह साबित किया कि क्षमता और मेहनत के दम पर हर बाधा को पार किया जा सकता है।
🧭 क्या है समाधान?
इस पूरी चर्चा से कुछ महत्वपूर्ण समाधान सामने आते हैं:
- रिश्तों में संवाद और समझ बढ़ाना
- कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देना
- जेंडर-न्यूट्रल दृष्टिकोण अपनाना
- न्याय प्रणाली में सुधार और तेजी लाना
📊 समाज के लिए बड़ा संदेश
यह पॉडकास्ट हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि:
- हर कहानी के दो पहलू होते हैं
- कानून का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि संतुलन बनाना है
- समाज को पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर हर मामले को समझना चाहिए
🧾 निष्कर्ष
Advocate Ishita Sinha के साथ यह बातचीत सिर्फ कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों, समाज और इंसानियत की गहराई को छूती है।
Mic Pe Milenge Podcast का यह एपिसोड उन लोगों के लिए खास है जो समझना चाहते हैं कि कोर्टरूम के अंदर क्या होता है, और कैसे हर केस के पीछे एक इंसानी कहानी छिपी होती है।
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