ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, हाइफा की तेल रिफाइनरी में ईरानी हमलों के कारण आग लग गई, लेकिन इजरायल ने कहा है कि इससे तेल सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने घोषणा की कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए सहमति दी है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में जारी युद्ध को जल्द और स्थायी रूप से खत्म करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा की गई है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा:
“यह युद्ध किसी के पक्ष में नहीं है और इससे सिर्फ मौतें और विनाश ही होगा। इस चुनौतीपूर्ण समय में मुस्लिम उम्माह की एकता बहुत जरूरी है।”
अमेरिकी और इजरायली स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि अमेरिका खार्ग द्वीप और ईरान के तेल पर कब्जा कर सकता है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति सुरक्षित रहे।
हालांकि, तेहरान में हमले लगातार जारी हैं। कई बुनियादी ढांचा क्षति और बिजली कटौती की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों के लिए जीवन कठिन हो गया है।
इज़रायल सरकार ने हाइफा की तेल रिफाइनरी में लगी आग को नियंत्रित करने का दावा किया है और बताया कि सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।
युद्ध और वैश्विक प्रभाव
- तेल की आपूर्ति: होर्मुज़ जलमार्ग और ईरानी तेल निर्यात पर हमले की वजह से वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
- सैन्य गतिविधियां: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य हमले जारी हैं, जबकि पाकिस्तान मध्यस्थ भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
- मानव हानि और संकट: स्थानीय बुनियादी ढांचे पर हमले और बिजली कटौती ने नागरिक जीवन को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत सफल रही तो युद्ध को जल्द समाप्त किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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