Bhilai Jaypee Cement Acquisition: जेपी ग्रुप की एक और कंपनी दिवालिया प्रक्रिया के तहत बिकने जा रही है। इस बार खरीदार अदाणी ग्रुप नहीं, बल्कि 87 साल पुराना डालमिया भारत ग्रुप है। डालमिया भारत की सब्सिडियरी कंपनी डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड ने भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड (BJCL) को खरीदने की बोली जीत ली है।
JP Associates के बाद अब Bhilai Jaypee Cement की बारी
जेपी ग्रुप की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रुप की पैरेंट कंपनी जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) पहले ही दिवालिया प्रक्रिया से गुजरने के बाद अदाणी ग्रुप के हाथों जा चुकी है। इसके अलावा जेपी इंफ्राटेक जैसी कंपनियां भी इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के जरिए बिक चुकी हैं।
अब जेपी ग्रुप की एक और अहम कंपनी भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड (Bhilai Jaypee Cement Limited) दिवालिया समाधान प्रक्रिया के तहत नए मालिक के पास जाने की तैयारी में है। हालांकि इस बार बोली अदाणी ग्रुप ने नहीं, बल्कि सीमेंट सेक्टर की 87 साल पुरानी कंपनी डालमिया भारत लिमिटेड (Dalmia Bharat Limited) ने जीती है।
डालमिया भारत ने जीती अधिग्रहण की बोली
डालमिया भारत लिमिटेड ने जानकारी दी है कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड (DCBL) को भिलाई जेपी सीमेंट के लिए सफल समाधान आवेदक चुना गया है।
कंपनी की ओर से पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को भिलाई जेपी सीमेंट के कर्जदाताओं की समिति (Committee of Creditors – CoC) ने मंजूरी दे दी है।
इसके बाद 28 जुलाई 2026 को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से डालमिया सीमेंट को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी जारी कर दिया गया।
यह पूरी प्रक्रिया इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के माध्यम से पूरी की जा रही है।
मध्य और पूर्वी भारत में मजबूत होगी डालमिया की पकड़
भिलाई जेपी सीमेंट के अधिग्रहण से डालमिया भारत की सीमेंट उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। कंपनी की नजर खास तौर पर मध्य और पूर्वी भारत के बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है।
भिलाई जेपी सीमेंट के पास दो प्रमुख उत्पादन इकाइयां हैं।
1. भिलाई, छत्तीसगढ़ सीमेंट यूनिट
छत्तीसगढ़ के भिलाई में कंपनी के पास:
- 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) क्षमता वाली ग्राइंडिंग यूनिट है।
यह यूनिट डालमिया भारत को छत्तीसगढ़ और आसपास के बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी।
2. बाबूपुर, मध्य प्रदेश क्लिंकर यूनिट
मध्य प्रदेश के बाबूपुर में:
- 1.1 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) क्षमता वाली क्लिंकर यूनिट मौजूद है।
इस यूनिट के जरिए कंपनी को कच्चे माल और उत्पादन क्षमता दोनों में फायदा मिलेगा।
अदाणी से खरीदे गए प्लांट वाली कंपनी अब खुद बिकी
भिलाई जेपी सीमेंट वही कंपनी है जिसने पहले अदाणी ग्रुप से जेपी एसोसिएट्स के सीमेंट प्लांट खरीदे थे।
अदाणी ग्रुप ने जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के बाद ग्रुप की कई संपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद सीमेंट कारोबार में बड़े बदलाव देखने को मिले।
अब भिलाई जेपी सीमेंट खुद दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए नए हाथों में जाने वाली है।
NCLT की मंजूरी के बाद पूरी होगी डील
हालांकि डालमिया भारत ने बोली जीत ली है और कर्जदाताओं की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए:
- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), कटक की मंजूरी
- अन्य नियामकीय मंजूरियां
लेनी होंगी।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में NCLT ने भिलाई जेपी सीमेंट के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।
सीमेंट सेक्टर में बढ़ रही खरीदारी की होड़
भारत में सीमेंट उद्योग में पिछले कुछ वर्षों में बड़े अधिग्रहण देखने को मिले हैं। बड़ी कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए क्षेत्रों में पहुंच बनाने के लिए कमजोर कंपनियों की संपत्तियों का अधिग्रहण कर रही हैं।
डालमिया भारत पहले से ही देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियों में शामिल है और यह अधिग्रहण कंपनी की विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भिलाई जेपी सीमेंट के जुड़ने से कंपनी को मध्य भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने और भविष्य में बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।


