UN:BLOC Launch: Healthians के फाउंडर दीपक साहनी के नए हेल्थकेयर वेंचर UN:BLOC ने अपनी वेबसाइट लॉन्च कर दी है। कंपनी ने पहले 300 मरीजों के फाउंडिंग कोहॉर्ट के लिए एनरोलमेंट भी शुरू कर दिया है।
गुरुग्राम, 25 अगस्त 2026: Healthians के फाउंडर दीपक साहनी के नए हेल्थकेयर वेंचर UN:BLOC ने मंगलवार को अपनी वेबसाइट लॉन्च कर दी। कंपनी ने अपने पहले 300 मरीजों के फाउंडिंग कोहॉर्ट के लिए आवेदन भी शुरू कर दिए हैं। UN:BLOC का दावा है कि उसका मॉडल हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, PCOS और मोटापे जैसी क्रॉनिक कंडीशंस में केवल लक्षणों को नियंत्रित करने के बजाय बीमारी के पीछे मौजूद मूल कारणों की पहचान करने पर फोकस करता है।
कंपनी ने अपने इस मॉडल को Block Medicine नाम दिया है। इसके तहत आयुर्वेद के सिद्धांतों और मॉडर्न डायग्नोस्टिक्स को एक साथ इस्तेमाल करने की बात कही गई है। UN:BLOC के मुताबिक, इसका उद्देश्य मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, बायोलॉजी और लाइफस्टाइल को एक साथ समझकर बीमारी के पीछे काम कर रहे संभावित ‘ब्लॉक्स’ की पहचान करना है।
₹2,499 में होगा BlocMarker Assessment

UN:BLOC की वेबसाइट के जरिए पहले 300 मरीजों के कोहॉर्ट में शामिल होने वाले लोगों को शुरुआत में ₹2,499 की वन-टाइम फीस देनी होगी। यह फीस BlocMarker™ Assessment के लिए है।
इस असेसमेंट में मरीज की कई तरह की जानकारी शामिल की जाती है, जैसे:
- मेडिकल हिस्ट्री
- फैमिली हेल्थ हिस्ट्री
- मौजूदा बीमारियां और लक्षण
- लाइफस्टाइल पैटर्न
- उपलब्ध लैब रिपोर्ट्स
- वियरेबल डिवाइस से मिलने वाला डेटा, अगर उपलब्ध हो
इस डेटा की समीक्षा UnblocPanel™ करता है। कंपनी के अनुसार, यह डॉक्टरों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम है, जो मरीज की जानकारी के आधार पर उन ‘ब्लॉक्स’ की पहचान करती है जिन्हें UN:BLOC बीमारी के पीछे मौजूद फिजियोलॉजिकल कारणों के रूप में देखता है।
असेसमेंट पूरा होने के बाद मरीज को शुरुआती रिपोर्ट मिलती है। कंपनी के मुताबिक, पूरी तरह डॉक्टरों द्वारा रिव्यू की गई रिपोर्ट 48 से 72 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जाती है।
अगर मरीज इसके बाद UN:BLOC का इलाज आगे जारी रखने का फैसला करता है, तो BlocMarker के लिए दी गई ₹2,499 की फीस UnblocProtocol™ यानी ट्रीटमेंट प्लान में एडजस्ट कर दी जाती है।
खुद दीपक साहनी बने Block Medicine के पहले मरीज

UN:BLOC के फाउंडर दीपक साहनी के मुताबिक, इस मॉडल की शुरुआत उनके अपने स्वास्थ्य अनुभव से हुई। उन्होंने बताया कि करीब 10 साल पहले उन्हें टाइप-2 डायबिटीज का पता चला था। समय के साथ उनकी दवाओं की संख्या बढ़कर 12 तक पहुंच गई।
साहनी के अनुसार, उन्हें यह महसूस हुआ कि इलाज के दौरान मुख्य सवाल यह नहीं पूछा जा रहा था कि उनकी स्थिति लगातार बिगड़ क्यों रही है। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर के साथ मिलकर अपने शरीर में मौजूद उन पैटर्न और संभावित अंडरलाइंग ब्लॉक्स पर काम किया, जिन्हें वे अपनी बीमारी की वजह मानते थे।
कंपनी के मुताबिक, मेडिकल निगरानी में किए गए इस प्रोटोकॉल के बाद साहनी ने 90 दिनों में अपनी दवाओं की मात्रा 75% तक कम की। UN:BLOC का कहना है कि इसके बाद उसकी क्लिनिकल टीम ने कई सौ केस स्टडीज पर काम किया और सार्वजनिक लॉन्च से पहले साहनी के अलावा 30 से ज्यादा मरीजों का इलाज इस फ्रेमवर्क के तहत किया जा चुका था।
साहनी ने कहा, “मैंने सालों तक सिर्फ लक्षणों का इलाज कराया, जबकि किसी ने यह नहीं पूछा कि ये बार-बार लौट क्यों आते हैं। यही सवाल UN:BLOC की शुरुआत बना, और इसके जवाब ने मेरी जिंदगी बदल दी।”
क्या है Block Medicine?
UN:BLOC के क्लिनिकल मॉडल का आधार Block Medicine है। कंपनी के अनुसार, इसमें आयुर्वेद से मिलने वाली समझ और मॉडर्न मेडिकल डायग्नोस्टिक्स को मिलाकर मरीज की स्थिति को समझने की कोशिश की जाती है।
कंपनी का कहना है कि अब तक इस फ्रेमवर्क में 51 बायोलॉजिकल ब्लॉक्स मैप किए जा चुके हैं। इनका इस्तेमाल क्लिनिकल टीम लक्षणों और संभावित फिजियोलॉजिकल कारणों के बीच संबंध तलाशने के लिए करती है।
UN:BLOC का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारियों का लंबे समय तक प्रभाव नर्वस सिस्टम सहित शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। डायबिटीज में नर्व डैमेज जैसी जटिलताएं और लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर से मस्तिष्क तथा हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि UN:BLOC का ‘Block Medicine’ एक कंपनी-विशिष्ट क्लिनिकल फ्रेमवर्क है और इसके दावों को सामान्य चिकित्सा उपचार का स्थापित विकल्प मानने से पहले स्वतंत्र वैज्ञानिक और क्लिनिकल प्रमाणों का मूल्यांकन जरूरी है।
डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम करेगी मरीजों की समीक्षा
UN:BLOC के फाउंडिंग क्लिनिकल पार्टनर और चीफ क्लिनिकल ऑफिसर डॉ. आशीष कल्ला के मुताबिक, इस मॉडल की खासियत यह है कि यह किसी एक मेडिकल सिस्टम को चुनने के बजाय मरीज की पूरी हिस्ट्री, बायोलॉजी और लाइफस्टाइल को एक साथ देखने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि यह तरीका मरीज को केवल एक मेडिकल लेबल तक सीमित रखने के बजाय बीमारी के संभावित कारण तक पहुंचने पर जोर देता है।
UN:BLOC की क्लिनिकल टीम को अलग-अलग विशेषज्ञताओं वाले मेडिकल बोर्ड का मार्गदर्शन भी मिलता है। इसमें शामिल हैं:
- डॉ. जॉय चक्रबर्ती — इंटरनल मेडिसिन
- डॉ. पीयूष ओझा — न्यूरोलॉजी
- डॉ. प्रणव कुमार झा — नेफ्रोलॉजी
- डॉ. अनुराग पासी — कार्डियोलॉजी
- डॉ. सजत चिवाने — कार्डियोलॉजी
कंपनी के अनुसार, इस मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच का उद्देश्य मरीज की समस्या को अलग-अलग मेडिकल एंगल से समझना है।
युवराज सिंह भी हैं UN:BLOC के निवेशक
UN:BLOC को क्रिकेटर युवराज सिंह का भी समर्थन मिला है। वह कंपनी के निवेशकों में शामिल हैं और इसकी फाउंडिंग टीम का हिस्सा भी हैं।
यह दीपक साहनी के साथ युवराज सिंह का दूसरा निवेश है। इससे पहले वह करीब एक दशक पहले साहनी की डायग्नोस्टिक्स कंपनी Healthians में निवेश कर चुके हैं।
युवराज सिंह ने UN:BLOC में निवेश को लेकर कहा है कि वह साहनी के साथ एक ऐसे हेल्थकेयर मॉडल पर काम करने को लेकर उत्साहित हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य को देखने के तरीके में बदलाव लाने की कोशिश करता है।
300 मरीजों के लिए खुला है आवेदन
UN:BLOC ने फिलहाल अपने पहले 300 मरीजों के फाउंडिंग कोहॉर्ट के लिए आवेदन शुरू किए हैं। इच्छुक लोग कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर enrollment प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
कंपनी के आधिकारिक Terms of Service के अनुसार, UN:BLOC Health India Private Limited का प्लेटफॉर्म BlocMarker assessment, physician-supervised personalised health protocols और संबंधित हेल्थकेयर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है।
UN:BLOC का दावा क्या है?
कंपनी अपने मॉडल को ऐसे हेल्थकेयर अप्रोच के तौर पर पेश कर रही है, जिसमें आयुर्वेद की समझ और मॉडर्न साइंस की डायग्नोस्टिक क्षमताओं को साथ लाकर बीमारी के पीछे मौजूद संभावित कारणों की पहचान करने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, किसी भी क्रॉनिक बीमारी में दवा बंद करना, कम करना या इलाज में बदलाव बिना योग्य डॉक्टर की निगरानी के नहीं किया जाना चाहिए। UN:BLOC की अपनी जानकारी के अनुसार भी इसके उपचार प्रोटोकॉल physician-supervised हैं।
फिलहाल 300 मरीजों का यह फाउंडिंग कोहॉर्ट UN:BLOC के लिए महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है। कंपनी का दावा है कि इस दौरान मिलने वाले क्लिनिकल डेटा और अनुभव उसके Block Medicine मॉडल को आगे विकसित करने में मदद करेंगे।


