RBI VRRR Auction: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक 7 सितंबर को ₹7 लाख करोड़ का वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन आयोजित करेगा। इस ऑक्शन के जरिए बैंकों की अतिरिक्त लिक्विडिटी को 30 दिनों के लिए RBI के पास जमा किया जाएगा।
RBI की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह ऑक्शन 7 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10 बजे तक आयोजित होगा। इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी को RBI के पास रखने के लिए बोली लगाएंगे। ऑक्शन के तहत जमा की गई राशि की तय मैच्योरिटी 7 अक्टूबर को होगी।
हालांकि, इस बार बैंकों को मैच्योरिटी से पहले भी अपनी जमा राशि निकालने की सुविधा दी गई है। बैंक जरूरत के अनुसार पूरी या आंशिक रकम वापस लेने का अनुरोध कर सकते हैं।
क्या है VRRR ऑक्शन?
VRRR यानी Variable Rate Reverse Repo एक ऐसा मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसका इस्तेमाल RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से कम करने के लिए करता है।
जब बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी होती है, तो वे उसे RBI के पास जमा कर सकते हैं। इसके बदले उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज मिलता है। इस प्रक्रिया से बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त लिक्विडिटी को कुछ समय के लिए वापस खींचने में मदद मिलती है।
इस बार RBI ने 30 दिनों की अवधि के लिए VRRR ऑक्शन रखा है। इसलिए यह सामान्य छोटी अवधि के लिक्विडिटी मैनेजमेंट ऑपरेशन की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
₹7 लाख करोड़ क्यों जमा कराएगा RBI?
बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी बढ़ने पर लिक्विडिटी की स्थिति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में RBI बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त फंड को मैनेज करने के लिए अलग-अलग लिक्विडिटी ऑपरेशंस का इस्तेमाल करता है।
₹7 लाख करोड़ का VRRR ऑक्शन भी इसी दिशा में एक कदम है। इसके जरिए RBI कुछ समय के लिए बैंकों की अतिरिक्त नकदी को अपने पास रखेगा। इससे बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस लिक्विडिटी को अस्थायी रूप से कम करने में मदद मिलेगी।
7 सितंबर को होगा ऑक्शन
RBI के अनुसार, 7 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10 बजे तक VRRR ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। बैंक इस दौरान अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास जमा करने के लिए बोली लगा सकेंगे।
ऑक्शन में जमा की गई रकम की मूल मैच्योरिटी तारीख 7 अक्टूबर तय की गई है। यानी सामान्य स्थिति में इस तारीख को बैंकों का पैसा RBI की ओर से वापस किया जाएगा।
मैच्योरिटी से पहले भी पैसा निकाल सकेंगे बैंक
इस VRRR ऑक्शन की एक खास बात यह है कि बैंकों को मैच्योरिटी से पहले अपनी रकम निकालने की सुविधा भी दी गई है।
अगर किसी बैंक को 7 अक्टूबर से पहले अपने फंड की जरूरत पड़ती है, तो वह RBI के पास जमा रकम की पूरी या आंशिक राशि वापस लेने का अनुरोध कर सकता है।
इसका मतलब यह है कि बैंक को अनिवार्य रूप से 30 दिनों तक पूरी रकम RBI के पास रखने की जरूरत नहीं होगी।
कितनी रकम वापस निकाल सकते हैं?
RBI की व्यवस्था के तहत बैंक जरूरत के मुताबिक अपनी जमा राशि का कुछ हिस्सा या पूरी राशि वापस लेने का अनुरोध कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर किसी बैंक ने VRRR ऑक्शन में बड़ी रकम जमा की है और बाद में उसे तत्काल लिक्विडिटी की जरूरत पड़ती है, तो वह पूरी रकम निकालने के बजाय केवल जरूरी राशि वापस मांग सकता है।
इससे बैंकों को लिक्विडिटी मैनेजमेंट में ज्यादा लचीलापन मिलेगा।
अनुरोध के बाद कब मिलेगा पैसा?
समय से पहले रकम निकालने के लिए बैंक को RBI के E-Kuber पोर्टल के जरिए अनुरोध करना होगा।
RBI के मुताबिक, ऐसे अनुरोध का सेटलमेंट अगले वर्किंग डे की शुरुआत में किया जाएगा। बैंक के RBI में मौजूद करंट अकाउंट में उसकी प्रिंसिपल अमाउंट और उस अवधि का ब्याज जमा किया जाएगा, जितने समय तक पैसा RBI के पास रहा होगा।
हालांकि, इसके लिए एक समयसीमा भी निर्धारित है। बैंक को 7 अक्टूबर की मूल मैच्योरिटी तारीख से कम से कम दो वर्किंग दिन पहले प्रीमैच्योर विड्रॉल का अनुरोध करना होगा।
E-Kuber पोर्टल से करना होगा प्रीमैच्योर विड्रॉल का अनुरोध
अगर किसी बैंक को मैच्योरिटी से पहले अपनी रकम वापस लेनी है, तो उसे RBI के E-Kuber पोर्टल के जरिए रिक्वेस्ट करनी होगी।
यह सुविधा मुंबई में वर्किंग दिनों के दौरान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
यानी बैंकों को रकम वापस लेने की योजना पहले से बनानी होगी और तय समयसीमा के भीतर RBI को अनुरोध भेजना होगा।
ऑक्शन के बाकी नियम पहले जैसे रहेंगे
RBI ने साफ किया है कि इस ऑक्शन के लिए फरवरी 2020 में VRRR ऑपरेशंस को लेकर जारी ऑपरेशनल गाइडलाइंस लागू रहेंगी।
इसका मतलब है कि प्रीमैच्योर विड्रॉल की अतिरिक्त सुविधा के अलावा ऑक्शन से जुड़े अन्य ऑपरेशनल नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
RBI के इस कदम का क्या मतलब है?
₹7 लाख करोड़ का यह VRRR ऑक्शन बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। RBI इस तरह के ऑपरेशंस के जरिए सिस्टम में नकदी की मात्रा को अपनी जरूरत के अनुसार संतुलित करता है।
30 दिनों के लिए इतनी बड़ी रकम को अपने पास रखने का फैसला यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दे रहा है। वहीं, प्रीमैच्योर विड्रॉल की सुविधा बैंकों को अचानक पैदा होने वाली फंडिंग जरूरतों से निपटने में मदद कर सकती है।
RBI VRRR Auction की मुख्य बातें
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| ऑक्शन की तारीख | 7 सितंबर |
| कुल राशि | ₹7 लाख करोड़ |
| अवधि | 30 दिन |
| ऑक्शन का समय | सुबह 9:30 से 10 बजे |
| मैच्योरिटी | 7 अक्टूबर |
| प्रीमैच्योर विड्रॉल | पूरी या आंशिक राशि |
| अनुरोध का माध्यम | E-Kuber पोर्टल |
| विड्रॉल सुविधा | वर्किंग डे, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे |
| अनुरोध की अंतिम सीमा | मैच्योरिटी से कम से कम 2 वर्किंग दिन पहले |
कुल मिलाकर, RBI का यह VRRR ऑक्शन बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। बैंकों को जहां अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी पर ब्याज कमाने का अवसर मिलेगा, वहीं जरूरत पड़ने पर मैच्योरिटी से पहले फंड निकालने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।


