Success Story of Ritu Pathak: रांची की उद्यमी रितु पाठक ने महज 6 लाख रुपये की बचत से ऐसा कारोबार शुरू किया, जो आज 2.2 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनकी कंपनी HM Herbals न सिर्फ पर्यावरण-अनुकूल डिस्टिलेशन मशीनें बना रही है, बल्कि देशभर के सैकड़ों किसानों और छोटे उद्यमियों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
6 लाख रुपये से शुरू हुआ करोड़ों का सफर

कहते हैं कि बड़ी सफलता के लिए हमेशा बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही समस्या की पहचान और उसका समाधान ही असली पूंजी होती है। रांची की उद्यमी रितु पाठक ने इस बात को सच साबित कर दिखाया।
साल 2013 में रितु पाठक ने अपने सह-संस्थापक बिनोद सिंह के साथ केवल 6 लाख रुपये की बचत के दम पर HM Herbals की शुरुआत की। आज उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 2.2 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसे 10 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
समस्या ने दिया बिजनेस आइडिया

रितु खुद एरोमैटिक और औषधीय पौधों की खेती से जुड़ी थीं। उन्हें खेती के लिए एक भरोसेमंद डिस्टिलेशन यूनिट की जरूरत थी, लेकिन बाजार में उपलब्ध मशीनें कई कमियों से भरी थीं।
इन मशीनों में ईंधन की अधिक खपत होती थी, जल्दी खराब हो जाती थीं और आवश्यक तेल (Essential Oil) की गुणवत्ता व मात्रा भी संतोषजनक नहीं थी।
यहीं से रितु और बिनोद को अपना खुद का समाधान विकसित करने का विचार आया। दोनों ने अपनी तकनीकी समझ और अनुभव के आधार पर पर्यावरण-अनुकूल डिस्टिलेशन मशीनें डिजाइन करनी शुरू कीं।
पहली मशीन से मिली सफलता
कंपनी की पहली 2,000 लीटर क्षमता वाली हाइड्रो डिस्टिलेशन यूनिट एक किसान को करीब 1.5 लाख रुपये में बेची गई। हालांकि शुरुआती दिनों में ग्राहकों का भरोसा जीतना आसान नहीं था।
रितु ने इस चुनौती का सामना बेहतर फील्ड सपोर्ट, ग्राहकों को प्रशिक्षण और शुरुआती डिस्काउंट देकर किया। धीरे-धीरे उनकी मशीनों की गुणवत्ता और प्रदर्शन ने बाजार में पहचान बना ली।
छोटे उद्यमियों पर लगाया दांव

जहां बड़ी कंपनियां भारी-भरकम औद्योगिक मशीनों पर फोकस कर रही थीं, वहीं HM Herbals ने छोटे किसानों और लघु उद्यमियों की जरूरतों को समझा।
आज कंपनी का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो चुका है, जिसमें शामिल हैं—
- मिनी डिस्टिलेशन यूनिट
- फील्ड डिस्टिलेशन सिस्टम
- हाइड्रो डिस्टिलेशन मशीन
- अर्क डिस्टिलेशन यूनिट
- इलेक्ट्रिक डिस्टिलेशन सिस्टम
इन मशीनों की कीमत 15,000 रुपये से लेकर 80 लाख रुपये तक है। इनका उपयोग आयुर्वेद, फार्मास्युटिकल, कॉस्मेटिक्स, वेलनेस इंडस्ट्री, हर्बल एक्सट्रैक्ट, एसेंशियल ऑयल और गुलाब जल तैयार करने में किया जाता है।
तकनीक से बढ़ाई दक्षता

HM Herbals ने केवल मशीनें ही नहीं बनाईं, बल्कि उनमें लगातार तकनीकी सुधार भी किए।
कंपनी की नई इलेक्ट्रिक डिस्टिलेशन मशीनें—
- ईंधन की खपत करीब 30% तक कम करती हैं।
- पारंपरिक सिस्टम की तुलना में केवल 5% पानी का उपयोग करती हैं।
- टच-पैनल आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी काम चल रहा है, जिससे मशीनों का संचालन आसान होगा और श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी।
भारत से विदेश तक पहुंचा कारोबार
आज HM Herbals के पास—
- 24 कर्मचारियों की टीम
- 6,700 वर्ग फीट का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
- 4,000 से अधिक ग्राहक
- 1,122 से ज्यादा मशीनों की बिक्री का रिकॉर्ड
कंपनी को पहला विदेशी ऑर्डर 2016 में फेसबुक के जरिए दक्षिण अफ्रीका से मिला था। इसके बाद कारोबार का विस्तार नेपाल, केन्या, श्रीलंका और खाड़ी देशों तक हो गया। वर्तमान में कंपनी की कुल आय का करीब 10% हिस्सा निर्यात से आता है।
बड़े कॉर्पोरेट भी बने ग्राहक
HM Herbals की ग्राहक सूची में अब कई बड़ी संस्थाएं भी शामिल हैं। कंपनी ने अपनी गुणवत्ता और विश्वसनीयता के दम पर हिंडाल्को और टाटा CSR जैसी संस्थाओं का भरोसा भी हासिल किया है।
किसानों की आय बढ़ाने में निभाई अहम भूमिका
रितु पाठक की सफलता केवल कारोबार तक सीमित नहीं रही। कंपनी ने देशभर में लगभग 5,900 एकड़ में फैली खेती से जुड़े 600 से 650 किसानों को आधुनिक डिस्टिलेशन तकनीक उपलब्ध कराई है।
इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी, लागत घटी और कई किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यही वजह है कि HM Herbals आज केवल एक मशीन निर्माता नहीं, बल्कि कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली कंपनी के रूप में भी पहचान बना चुकी है।
सफलता का सबसे बड़ा सबक
रितु पाठक की कहानी बताती है कि यदि किसी समस्या को सही ढंग से समझकर उसका व्यावहारिक समाधान तैयार किया जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। महज 6 लाख रुपये की बचत से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों रुपये के कारोबार में बदल चुका है और आने वाले समय में कंपनी का लक्ष्य 10 करोड़ रुपये के राजस्व तक पहुंचना है।


