नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया एक बार फिर सुर्खियों में है। कंपनी के मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद नए CEO की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। इसी बीच एयर इंडिया का घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे टाटा ग्रुप के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
नए CEO की नियुक्ति में क्यों हो रही देरी?
सूत्रों के मुताबिक, कैंपबेल विल्सन सितंबर में एयर इंडिया छोड़ देंगे। उनके उत्तराधिकारी के तौर पर एयर इंडिया के चीफ कमर्शियल ऑफिसर निपुण अग्रवाल का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उनकी नियुक्ति पर सहमति नहीं बन सकी है।
बताया जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने निपुण अग्रवाल की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। इसी कारण नए CEO की घोषणा फिलहाल टल गई है।
अंतरिम मैनेजमेंट कमिटी संभालेगी जिम्मेदारी
CEO की नियुक्ति में देरी को देखते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन एयर इंडिया के संचालन के लिए एक अंतरिम मैनेजमेंट कमिटी बना रहे हैं।
इस समिति में शामिल हो सकते हैं:
- एन. चंद्रशेखरन
- एयर इंडिया के पूर्व CMD प्रदीप सिंह खरोला
- कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी
यह कमिटी नए CEO के चयन तक कंपनी के संचालन और रणनीतिक फैसलों की जिम्मेदारी संभालेगी।
कौन हैं निपुण अग्रवाल?
निपुण अग्रवाल वर्ष 2022 से एयर इंडिया में चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) के रूप में कार्यरत हैं। वह एयरलाइन के कमर्शियल ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
इससे पहले वह कई बड़ी कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:
- टाटा संस
- बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच
- स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक
- बीपी (BP)
एयरलाइन के अंदर उन्हें अनुभवी और रणनीतिक अधिकारी माना जाता है।
प्रदीप सिंह खरोला की बढ़ी भूमिका
प्रदीप सिंह खरोला को हाल ही में एन. चंद्रशेखरन का एग्जीक्यूटिव एडवाइजर बनाया गया था। अब उन्हें एयर इंडिया के ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
बताया जा रहा है कि चंद्रशेखरन स्वयं एयर इंडिया के कामकाज की साप्ताहिक समीक्षा कर रहे हैं और कंपनी को जल्द से जल्द लाभ में लाने पर फोकस कर रहे हैं।
एयर इंडिया का घाटा रिकॉर्ड स्तर पर
एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। सिंगापुर एयरलाइंस की वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया का घाटा बढ़कर 27,800 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 2,130 करोड़ रुपये था।
एयर इंडिया में हिस्सेदारी:
- टाटा ग्रुप – 74.9%
- सिंगापुर एयरलाइंस – 25.1%
घाटा बढ़ने की बड़ी वजहें
एयर इंडिया के बढ़ते घाटे के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल।
- पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने के कारण यूरोप और उत्तर अमेरिका की उड़ानों को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है।
- लंबी उड़ानों से ईंधन और क्रू लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी।
- परिचालन लागत कम करने के लिए एयर इंडिया ने प्रतिदिन 350 से अधिक उड़ानों में कटौती की है।
इन सभी कारणों ने एयरलाइन के वित्तीय प्रदर्शन पर गंभीर असर डाला है।
टाटा बोर्ड में भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, टाटा संस की हालिया बोर्ड बैठकों में एयर इंडिया के लगातार बढ़ते घाटे और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। नोएल टाटा ने भी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई और प्रबंधन स्तर पर मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
आगे क्या?
एयर इंडिया के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, जल्द से जल्द एक स्थायी और सक्षम CEO की नियुक्ति, और दूसरी, बढ़ते घाटे पर नियंत्रण पाकर एयरलाइन को मुनाफे की राह पर लाना। अंतरिम मैनेजमेंट कमिटी के गठन से फिलहाल संचालन में निरंतरता बनी रहेगी, लेकिन निवेशकों और उद्योग जगत की नजर अब नए नेतृत्व और कंपनी की आगामी रणनीति पर टिकी रहेगी।
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