अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर लगातार दूसरे दिन ग्लोबल ऑयल मार्केट पर देखने को मिला। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। बाजार को सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से तेल सप्लाई पर पड़ने वाले संभावित असर की है।
दूसरे दिन भी जारी रही कच्चे तेल की तेजी
बुधवार को 5% से ज्यादा उछाल दर्ज करने के बाद गुरुवार को भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान में रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हमले रहे। निवेशकों को डर है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI 74 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान की उस क्षमता को कमजोर करने के लिए नए हमले किए हैं, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को बाधित कर सके।
दूसरी ओर, तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ बड़ा जवाबी अभियान शुरू करेगा। इससे दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्ग पर जोखिम और बढ़ गया है।
ट्रंप का सख्त संदेश, तेल कीमतों पर दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौता अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकेबंदी की संभावना जताई और संकेत दिए कि खार्ग आइलैंड स्थित प्रमुख तेल निर्यात केंद्र भी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी जहाजों पर हुए हमलों का “बदला” थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो अमेरिका की प्रतिक्रिया और अधिक कड़ी होगी।
ग्लोबल सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा
मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़े सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा तो तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
ईरान पर फिर कड़े हुए अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान को तेल निर्यात की अनुमति देने वाली प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) भी समाप्त कर दी है। इससे अंतरिम समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खत्म हो गया है।
हाल के सप्ताहों में ईरान ने लाखों बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया था, लेकिन नई पाबंदियों के बाद अब उस सप्लाई पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़ों ने भी बढ़ाई चिंता
अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह कमर्शियल क्रूड ऑयल स्टॉक में लगभग 30 लाख बैरल की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से 62 लाख बैरल तेल निकाले जाने के कारण कुल उपलब्ध भंडार में 30 लाख बैरल से अधिक की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा,
- डिस्टिलेट फ्यूल ऑयल का स्टॉक करीब 50 लाख बैरल घटा।
- गैसोलीन इन्वेंट्री 2012 के बाद के सबसे निचले मौसमी स्तर पर पहुंच गई।
इन आंकड़ों ने भी बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। कमोडिटी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


