South Korea vs India: AI शेयरों के दम पर भारत को पीछे छोड़ने वाला दक्षिण कोरिया अचानक क्यों लड़खड़ा गया?
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार इस साल दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी कंपनियों में आई तेज़ी के कारण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था और मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में उसने भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने का गौरव हासिल कर लिया था। लेकिन सोमवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
कोस्पी इंडेक्स में अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली और यह कारोबार के दौरान करीब 9 फीसदी तक टूट गया। हालात इतने खराब हो गए कि एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों को याद दिलाया कि किसी भी बाजार की तेज़ रैली यदि कुछ चुनिंदा शेयरों पर निर्भर हो जाए तो जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।
दक्षिण कोरिया के इस घटनाक्रम ने केवल वहां के निवेशकों को ही नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजार विशेषज्ञों को भी चिंतित कर दिया है। क्योंकि पिछले एक साल में AI थीम पर आधारित शेयरों में जो उछाल देखने को मिला था, अब उसके टिकाऊ होने पर सवाल उठने लगे हैं।
सैमसंग और SK Hynix में बिकवाली से टूटा बाजार
दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण देश की दो सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां रहीं। Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार के दौरान Samsung Electronics का शेयर 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया जबकि SK Hynix में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। इन दोनों कंपनियों का दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में इतना बड़ा प्रभाव है कि इनमें कमजोरी आने पर पूरे इंडेक्स पर दबाव बन जाता है।
गिरावट के बाद Samsung Electronics का मार्केट कैप लगभग 1.31 ट्रिलियन डॉलर रह गया जबकि SK Hynix का बाजार मूल्य करीब 919.91 अरब डॉलर पर आ गया। दोनों कंपनियां AI चिप्स, हाई बैंडविड्थ मेमोरी और डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी वजह से पिछले एक साल में इनके शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी।
आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण मुनाफावसूली (Profit Booking) है। पिछले कई महीनों से AI थीम पर निवेशकों का उत्साह चरम पर था। बड़ी संख्या में निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में पैसा लगाया और उनके वैल्यूएशन लगातार बढ़ते चले गए।
जब किसी शेयर या सेक्टर में बहुत तेजी आती है तो निवेशक एक समय के बाद मुनाफा बुक करना शुरू कर देते हैं। दक्षिण कोरिया के बाजार में भी यही देखने को मिला।
इसके अलावा निवेशकों को यह चिंता भी सताने लगी कि AI से जुड़े शेयरों की कीमतें वास्तविक कमाई की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही हैं। कई विशेषज्ञों ने हाल के महीनों में चेतावनी दी थी कि AI आधारित कंपनियों में अत्यधिक उत्साह भविष्य में बड़े करेक्शन का कारण बन सकता है।
कंसंट्रेशन रिस्क ने बढ़ाई परेशानी
दक्षिण कोरिया के बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कंसंट्रेशन रिस्क माना जा रहा है। इसका अर्थ है कि बाजार का प्रदर्शन कुछ गिनी-चुनी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भर हो गया था।
कोस्पी इंडेक्स में Samsung Electronics और SK Hynix की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग आधी मानी जाती है। यही वजह है कि जब इन कंपनियों में गिरावट आई तो पूरा बाजार नीचे आ गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस साल कोस्पी में जो 79 फीसदी तक की तेजी दर्ज हुई थी, उसका लगभग दो-तिहाई योगदान केवल इन दो कंपनियों से आया था। यह स्थिति निवेशकों के लिए चेतावनी का संकेत मानी जाती है क्योंकि किसी एक सेक्टर या कुछ कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता बाजार को अस्थिर बना सकती है।
क्या AI शेयरों में बन रहा है नया बुलबुला?
दुनिया भर के निवेशक अब AI सेक्टर की तुलना वर्ष 2000 के डॉट-कॉम बबल से करने लगे हैं। डॉट-कॉम युग में इंटरनेट कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी लेकिन बाद में उनमें बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।
हालांकि वर्तमान AI क्रांति वास्तविक तकनीकी मांग पर आधारित है, फिर भी कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कई कंपनियों के वैल्यूएशन अत्यधिक बढ़ चुके हैं।
पिछले एक वर्ष में AI सर्वर, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ने से Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों को बड़ा लाभ मिला। लेकिन निवेशकों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं अपेक्षाओं से कम ग्रोथ आने पर इन शेयरों में और करेक्शन न देखने को मिले।
भारत और दक्षिण कोरिया के बाजार में बड़ा अंतर
दक्षिण कोरिया ने हाल में मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन दोनों बाजारों की संरचना में बड़ा अंतर है।
भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत अधिक विविध (Diversified) माना जाता है। यहां बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई सेक्टर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
दूसरी ओर दक्षिण कोरिया का बाजार मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर निर्भर है। यही कारण है कि जब टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट आती है तो पूरा बाजार प्रभावित हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में भी कुछ सेक्टरों में तेज़ी देखने को मिलती है, लेकिन वहां किसी एक कंपनी या दो कंपनियों का प्रभाव दक्षिण कोरिया जितना बड़ा नहीं है।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
दक्षिण कोरिया के बाजार में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण सबक छोड़ती है।
सबसे पहला सबक यह है कि केवल तेजी देखकर किसी सेक्टर में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। दूसरा, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा जरूरी होता है। तीसरा, जब किसी सेक्टर में अत्यधिक उत्साह दिखाई देने लगे तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
AI सेक्टर का भविष्य मजबूत माना जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर AI संबंधित शेयर लगातार ऊपर ही जाएगा। बाजार में समय-समय पर करेक्शन आना सामान्य बात है और निवेशकों को ऐसे उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब निवेशकों की नजर Samsung Electronics और SK Hynix के अगले तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि AI आधारित मांग मजबूत बनी रहती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन यदि कमाई अपेक्षा से कमजोर रही तो दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI थीम के दम पर दुनिया के शीर्ष बाजारों में शामिल हुआ दक्षिण कोरिया अब एक कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह गिरावट केवल मुनाफावसूली थी या फिर एक बड़े करेक्शन की शुरुआत।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


