Smart City News: छत्तीसगढ़ की नई राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) को देश के सबसे आधुनिक स्मार्ट शहरों में शामिल करने का सपना देखा गया था। चौड़ी सड़कें, हरित क्षेत्र, आधुनिक सरकारी इमारतें और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी पहचान हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी, कैब सेवा, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट में छात्रों, स्थानीय निवासियों और अधिकारियों से बातचीत के आधार पर सामने आया कि शहर की आधारभूत संरचना तो तैयार हो रही है, लेकिन नागरिक सुविधाएं अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
स्मार्ट सिटी बनने के बावजूद क्यों परेशान हैं लोग?
नवा रायपुर को भविष्य का शहर माना जा रहा है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद दैनिक जीवन आसान नहीं है। कई सुविधाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और निजी सेवाओं की उपलब्धता भी सीमित है।
शहर की आबादी अभी अपेक्षाकृत कम है, जिसके कारण कई निजी कंपनियां यहां अपनी सेवाओं का विस्तार करने से बच रही हैं। इसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है।
Zomato, Blinkit और Uber जैसी सेवाएं नहीं दे पा रहीं पूरी सुविधा
नवा रायपुर में रहने वाले छात्रों और परिवारों का कहना है कि Zomato, Blinkit और अन्य ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से ऑर्डर करना आसान नहीं है। कई बार ऑर्डर स्वीकार ही नहीं किए जाते, जबकि कई मामलों में डिलीवरी काफी देर से पहुंचती है।
इसी तरह Uber और अन्य कैब सेवाओं में भी राइड कैंसिल होने की शिकायतें आम हैं। कई बार कैब उपलब्ध ही नहीं होती, जिससे लोगों को निजी वाहन या महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है।
बाजार और सार्वजनिक परिवहन की कमी बनी बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों के अनुसार नवा रायपुर में अभी तक बड़ा और व्यवस्थित बाजार विकसित नहीं हो पाया है। इसी कारण छोटे-छोटे अस्थायी और अनधिकृत बाजारों का सहारा लेना पड़ता है।
सार्वजनिक परिवहन भी लोगों की सबसे बड़ी चिंता है। बस सेवाएं सीमित हैं और रेल कनेक्टिविटी भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही। रोजाना आने-जाने वाले लोगों और छात्रों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
छात्रों ने बताई अपनी मुश्किलें
हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU) के छात्रों का कहना है कि शहर में रहने के दौरान उन्हें कई व्यावहारिक समस्याओं से जूझना पड़ता है।
रायपुर की रहने वाली तीसरे वर्ष की लॉ छात्रा खुशी वर्मा ने बताया कि कॉलेज से बस स्टॉप काफी दूर होने के कारण उन्हें हॉस्टल में रहना पड़ा और परिवार को स्कूटी खरीदनी पड़ी।
वहीं उत्तर प्रदेश से पढ़ाई करने आई छात्रा श्रेया का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन डिलीवरी पर निर्भर रहना लगभग छोड़ दिया है। अब वे सप्ताहभर का सामान पहले से खरीदकर रखती हैं ताकि रोजमर्रा की दिक्कतों से बचा जा सके।
लोग निवेश तो कर रहे हैं, लेकिन रहने से बच रहे हैं
रियल एस्टेट निवेशकों का मानना है कि नवा रायपुर आने वाले वर्षों में एक बेहतरीन शहर बन सकता है। इसी उम्मीद में कई लोगों ने यहां प्लॉट और मकान खरीदे हैं।
हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए अधिकांश लोग यहां स्थायी रूप से रहने के बजाय लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर पुराने रायपुर शहर में रहना अधिक सुविधाजनक समझते हैं, जहां बाजार, अस्पताल, स्कूल और परिवहन जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।
प्रशासन का क्या है विजन?
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) इस शहर को टिकाऊ और आधुनिक शहरी मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है।
- कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल 237 वर्ग किलोमीटर
- मुख्य विकसित क्षेत्र 80.13 वर्ग किलोमीटर
- लगभग 95.22 वर्ग किलोमीटर ग्रीन बेल्ट
- कुल 40 सेक्टरों में से 5 सेक्टर पूरी तरह विकसित
प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा योगदान है। अब सर्विस सेक्टर को मजबूत बनाने और निजी निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
5 से 10 मिनट वॉक का है मास्टर प्लान
प्रशासन का लक्ष्य ऐसा शहर विकसित करना है जहां हर रिहायशी इलाके से स्कूल, अस्पताल, पार्क और अन्य आवश्यक सुविधाएं सिर्फ 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी पर उपलब्ध हों।
इसके अलावा भविष्य के ट्रांसपोर्ट प्लान के तहत बस और रेलवे स्टेशन इस तरह विकसित किए जाएंगे कि लोग अधिकतम 800 मीटर या करीब 10 मिनट पैदल चलकर वहां पहुंच सकें।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि फिलहाल यह लक्ष्य पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाया है और ट्रेनों व सार्वजनिक परिवहन की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है।
क्या नवा रायपुर भविष्य का सफल स्मार्ट सिटी मॉडल बन पाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि नवा रायपुर की आधारभूत संरचना मजबूत है और दीर्घकालिक योजना भी आकर्षक दिखाई देती है। लेकिन किसी भी स्मार्ट सिटी की सफलता केवल चौड़ी सड़कों और आधुनिक भवनों से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली रोजमर्रा की सुविधाओं से तय होती है।
यदि सार्वजनिक परिवहन, ऑनलाइन सेवाओं, बाजार, स्वास्थ्य सुविधाओं और निजी निवेश की रफ्तार तेज होती है, तो आने वाले वर्षों में नवा रायपुर वास्तव में देश के सबसे सफल स्मार्ट शहरों में शामिल हो सकता है। फिलहाल यह शहर विकास और वास्तविक नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से गुजर रहा है।


