भारत में आज सरकारी, निजी, विदेशी, स्मॉल फाइनेंस और पेमेंट्स बैंक मिलाकर दर्जनों बैंकिंग संस्थान काम कर रहे हैं। करोड़ों लोग रोजाना बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि भारत का पहला बैंक कौन-सा था और इसकी शुरुआत कब हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि भारत के पहले बैंक की स्थापना मुगल शासन के दौरान यूरोपीय कारोबारियों ने की थी। समय के साथ यही बैंक कई चरणों से गुजरते हुए आज देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की नींव बना।
Highlights
- 1683 में शुरू हुआ था भारत का पहला बैंक द मद्रास बैंक
- यूरोपीय कारोबारियों ने मुगल शासन के दौरान की थी स्थापना
- कई विलय और पुनर्गठन के बाद बना इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया
- 1955 में नाम बदलकर बना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- आज SBI देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है
भारत में कितने बैंक हैं?
भारत की बैंकिंग व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग प्रणालियों में से एक मानी जाती है। वर्तमान में देश में कई प्रकार के बैंक कार्यरत हैं।
इनमें शामिल हैं:
- 12 सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) के बैंक
- 21 निजी (Private Sector) बैंक
- 7 प्रमुख विदेशी बैंक
- कई स्मॉल फाइनेंस बैंक
- पेमेंट्स बैंक
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs)
- सहकारी (Co-operative) बैंक
सरकारी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा प्रमुख हैं, जबकि निजी क्षेत्र में HDFC Bank और ICICI Bank सबसे बड़े नामों में शामिल हैं।
भारत का पहला बैंक कौन था?
भारत का पहला बैंक द मद्रास बैंक (The Madras Bank) था, जिसकी स्थापना 1683 में हुई थी। उस समय देश के अधिकांश हिस्सों पर मुगल साम्राज्य का शासन था, जबकि दक्षिण भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार का विस्तार कर रही थी।
यूरोपीय व्यापारियों ने अपने व्यापार, भुगतान और वित्तीय लेन-देन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से इस बैंक की शुरुआत की। यही भारत में आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की पहली औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
यूरोपीय कारोबारियों ने रखी थी बैंकिंग की नींव
द मद्रास बैंक की स्थापना यूरोपीय व्यापारियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सहयोग से की थी। बैंक का संचालन और प्रबंधन भी मुख्य रूप से यूरोपीय अधिकारियों के हाथों में था।
उस समय बैंक की प्रमुख गतिविधियां थीं—
- व्यापारियों को ऋण उपलब्ध कराना
- व्यापारिक भुगतान की सुविधा देना
- धन जमा करना
- विदेशी व्यापार के लिए वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना
इसका मुख्यालय उस समय के जॉर्ज टाउन (वर्तमान चेन्नई) में था और इसकी अधिकांश शाखाएं मद्रास प्रेसिडेंसी क्षेत्र में संचालित होती थीं।
एक समय बंद होने की कगार पर पहुंच गया था बैंक
1683 में शुरुआत के बाद यह बैंक कई वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों से गुजरा। वर्ष 1806 में इसे बंद कर दिया गया, लेकिन उसी वर्ष फरवरी में इसे नए स्वरूप में फिर से मद्रास बैंक के नाम से शुरू किया गया।
इसके बाद यह बैंक फोर्ट सेंट जॉर्ज से संचालित होने लगा और धीरे-धीरे दक्षिण भारत की बैंकिंग व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
1843 में बना बैंक ऑफ मद्रास
वर्ष 1843 में मद्रास बैंक का विलय अन्य संस्थानों के साथ कर बैंक ऑफ मद्रास (Bank of Madras) का गठन किया गया।
बैंक ऑफ मद्रास उस दौर के तीन प्रमुख प्रेसीडेंसी बैंकों में से एक था। अन्य दो बैंक थे—
- बैंक ऑफ बंगाल
- बैंक ऑफ बॉम्बे
इन तीनों बैंकों ने ब्रिटिश भारत की बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत आधार दिया।
1921 में बना इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया
ब्रिटिश शासन के दौरान बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 1921 में तीनों प्रेसीडेंसी बैंकों—
- बैंक ऑफ मद्रास
- बैंक ऑफ बंगाल
- बैंक ऑफ बॉम्बे
का विलय कर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया (Imperial Bank of India) बनाया गया।
उस समय यह देश का सबसे बड़ा बैंक बन गया और सरकारी लेन-देन, व्यापारिक बैंकिंग तथा आम ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
1955 में बना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने देश की बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत और आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया।
इसके बाद इसका नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रखा गया। भारतीय रिजर्व बैंक की हिस्सेदारी के साथ शुरू हुआ SBI आज देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है।
आज क्यों खास है SBI?
आज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया केवल भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख बैंकों में भी शामिल है।
SBI की प्रमुख विशेषताएं—
- देशभर में हजारों शाखाओं का नेटवर्क
- लाखों करोड़ रुपये का व्यवसाय
- करोड़ों ग्राहकों का भरोसा
- डिजिटल बैंकिंग और YONO जैसी आधुनिक सेवाएं
- कृषि, उद्योग, MSME और रिटेल सेक्टर को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता
भारत की बैंकिंग यात्रा का ऐतिहासिक महत्व
1683 में एक छोटे व्यापारिक बैंक के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग व्यवस्थाओं में से एक का हिस्सा बन चुकी है। द मद्रास बैंक से शुरू होकर बैंक ऑफ मद्रास, इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया और अंततः स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनने तक का यह सफर भारतीय बैंकिंग इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में गिना जाता है।


