Google Success Story: आज इंटरनेट की दुनिया में Google का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सर्च इंजन से लेकर एंड्रॉयड, यूट्यूब, जीमेल, गूगल मैप्स और क्लाउड कंप्यूटिंग तक कंपनी का दबदबा है। मौजूदा समय में Google की पैरेंट कंपनी Alphabet दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में गिनी जाती है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब इसके संस्थापक लैरी पेज (Larry Page) और सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin) अपनी इस परियोजना को बेचने के लिए तैयार थे। हैरानी की बात यह है कि Microsoft, Yahoo और Excite जैसी बड़ी कंपनियों के पास Google को खरीदने का मौका था, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बाद में यही फैसला उनके लिए सबसे बड़ी चूक साबित हुआ।
BackRub से शुरू हुआ था Google का सफर
Google की शुरुआत किसी बड़ी कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी।
- वर्ष 1996 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने BackRub नाम का सर्च प्रोजेक्ट शुरू किया।
- यह प्रोजेक्ट वेबसाइटों के बीच मौजूद लिंक के आधार पर उनकी गुणवत्ता और महत्व का आकलन करता था।
- 1997 में इसका नाम बदलकर Google रखा गया, जो गणितीय शब्द Googol (1 के बाद 100 शून्य) से प्रेरित था।
- 4 सितंबर 1998 को Google Inc. की आधिकारिक स्थापना हुई।
शुरुआती दिनों में दोनों संस्थापक अपनी पीएचडी पूरी करना चाहते थे और कंपनी चलाने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे। इसलिए उन्होंने Google को बेचने की संभावना पर विचार किया।
जब Yahoo ने ठुकराया था 10 लाख डॉलर का प्रस्ताव
1998 में Google के संस्थापक Yahoo के पास पहुंचे और कंपनी को लगभग 10 लाख डॉलर (1 Million Dollar) में बेचने का प्रस्ताव रखा।
उस समय Yahoo दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय सर्च पोर्टल था। Yahoo का मानना था कि उसका बिजनेस मॉडल पहले से ही मजबूत है और उसे Google जैसी नई तकनीक की जरूरत नहीं है। इसी वजह से कंपनी ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ वर्षों बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।
फिर Yahoo खरीदना चाहता था Google, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी थी
साल 2002 तक Google की लोकप्रियता तेजी से बढ़ चुकी थी। तब Yahoo ने Google को खरीदने के लिए करीब 3 अरब डॉलर का प्रस्ताव दिया।
लेकिन इस बार स्थिति उलट चुकी थी। लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने कंपनी की कीमत 5 अरब डॉलर बताई। Yahoo इतनी बड़ी रकम देने को तैयार नहीं हुआ और सौदा फिर नहीं हो पाया।
अगर Yahoo उस समय Google का अधिग्रहण कर लेता, तो संभव है कि इंटरनेट की तस्वीर आज बिल्कुल अलग होती।
Excite ने भी गंवा दिया सुनहरा अवसर
Yahoo के बाद Google के संस्थापक 1999 में उस समय के दूसरे बड़े सर्च इंजन Excite के पास पहुंचे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Google को लगभग 7.5 लाख डॉलर में बेचने की बात हुई। शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन बाद में सौदा रुक गया।
आखिर क्यों नहीं बनी बात?
Google के संस्थापकों की प्रमुख शर्त थी कि यदि Excite Google को खरीदेगा, तो उसे अपनी पुरानी सर्च तकनीक हटाकर Google की तकनीक अपनानी होगी।
Excite के तत्कालीन सीईओ जॉर्ज बेल और कंपनी प्रबंधन इस बदलाव के लिए तैयार नहीं थे। उन्हें लगा कि मौजूदा सिस्टम बदलना जोखिम भरा होगा। यही निर्णय बाद में कंपनी की सबसे बड़ी रणनीतिक भूलों में गिना गया।
Microsoft ने भी नहीं दिखाई खास दिलचस्पी
कई रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख मिलता है कि शुरुआती दौर में Microsoft के साथ भी Google को लेकर अनौपचारिक बातचीत हुई थी।
हालांकि उस समय Microsoft का पूरा ध्यान Windows, Office और MSN Portal जैसे अपने मुख्य कारोबार पर था। कंपनी को यह अंदाजा नहीं था कि इंटरनेट सर्च आने वाले वर्षों में टेक इंडस्ट्री का सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा।
इसी वजह से Microsoft ने Google को खरीदने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई।
Google ने कैसे बदल दी पूरी इंटरनेट इंडस्ट्री?
Google ने केवल एक बेहतर सर्च इंजन नहीं बनाया, बल्कि इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका ही बदल दिया।
आज कंपनी के पास कई ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जिनका रोजाना अरबों लोग उपयोग करते हैं।
- Google Search
- Android
- YouTube
- Gmail
- Google Maps
- Google Chrome
- Google Drive
- Google Cloud
- Google Photos
- Gemini AI
इन्हीं सेवाओं की बदौलत Alphabet आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल है।
Yahoo और Excite क्यों पिछड़ गए?
Yahoo और Excite दोनों ने शुरुआती सफलता के बावजूद बदलती तकनीक के साथ खुद को तेजी से नहीं बदला।
Yahoo ने पोर्टल मॉडल, ईमेल और विज्ञापन पर ज्यादा भरोसा किया, जबकि Google लगातार अपने सर्च एल्गोरिद्म और यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाता रहा। दूसरी ओर Excite भी नई तकनीक अपनाने में पीछे रह गया और धीरे-धीरे बाजार से लगभग गायब हो गया।
Microsoft ने हालांकि बाद में Bing और AI के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की, लेकिन इंटरनेट सर्च के क्षेत्र में Google की बढ़त को चुनौती देना उसके लिए आसान नहीं रहा।
निष्कर्ष
Google की कहानी यह बताती है कि किसी भी नई तकनीक या स्टार्टअप की क्षमता का सही समय पर आकलन करना कितना महत्वपूर्ण होता है। Yahoo, Excite और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों के पास Google को खरीदने का अवसर था, लेकिन उन्होंने इसे भविष्य का बड़ा अवसर नहीं माना। बाद में यही छोटा-सा स्टार्टअप दुनिया की सबसे प्रभावशाली टेक कंपनियों में बदल गया और इंटरनेट की दिशा ही बदल दी।


