नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई और शुरुआती घंटों में बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी लौटने से बाजार ने जोरदार वापसी की, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
बीएसई सेंसेक्स 303.67 अंक यानी 0.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,346.17 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 78 अंक टूटकर 23,405 के स्तर पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि दिन के दौरान सेंसेक्स ने अपने निचले स्तर से 900 अंकों से ज्यादा की रिकवरी दिखाई, जबकि निफ्टी ने भी लगभग 300 अंकों की वापसी दर्ज की।
शुरुआती कारोबार में क्यों टूटा बाजार?
कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, मध्य-पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाने वाली प्रमुख वजह रही।
निफ्टी दिन के दौरान 23,151.50 के स्तर तक फिसल गया था, जो पूरे सत्र का निचला स्तर रहा। इसी दौरान सेंसेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
दूसरे हाफ में कैसे लौटी बाजार में तेजी?
विश्लेषकों के अनुसार निचले स्तरों पर निवेशकों ने वैल्यू बाइंग शुरू की। कई मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे, जिसके चलते खरीदारी बढ़ी और बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाई।
PSU बैंक शेयरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और सरकारी बैंकिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन का असर आने वाले नतीजों में दिखाई दे सकता है।
निवेशकों की नजर RBI की नीति बैठक पर
बाजार की दिशा तय करने में आगामी RBI मौद्रिक नीति बैठक अहम भूमिका निभा सकती है। निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और महंगाई पर अपना रुख स्पष्ट करेगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार विदेशी निवेश को आकर्षित करने वाले संभावित नीतिगत कदमों ने बाजार को कुछ सहारा दिया है, लेकिन निवेशक अभी भी RBI के फैसले, आर्थिक विकास दर के आंकड़ों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता पर भी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक वार्ताओं की प्रगति भी बाजार की दिशा प्रभावित कर सकती है। यदि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
इसके विपरीत यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या तेल की कीमतों में और तेजी आती है तो बाजार पर दबाव देखने को मिल सकता है।
रुपये में लगातार दूसरे दिन कमजोरी
भारतीय मुद्रा भी बुधवार को दबाव में रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे टूटकर 95.70 पर बंद हुआ।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के अनुसार लगातार पूंजी निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता रुपये पर दबाव बना रही हैं।
कमजोर रुपया आयात आधारित उद्योगों के लिए लागत बढ़ा सकता है, जबकि निर्यातकों को इससे कुछ राहत मिल सकती है।
सोने की कीमतों में भी गिरावट
कमोडिटी बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। सोने की कीमत लगभग 500 रुपये गिरकर 1,58,800 रुपये के आसपास कारोबार करती दिखाई दी।
एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च जतीन त्रिवेदी के अनुसार मजबूत डॉलर और ऊंचे कच्चे तेल के दामों ने सोने की चमक फीकी कर दी है। इसके अलावा यह आशंका भी बढ़ रही है कि दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं।
आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कई बड़े कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें RBI की नीति बैठक, भारत की आर्थिक विकास दर के आंकड़े, विदेशी निवेशकों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति प्रमुख हैं।
बाजार में आई तेज रिकवरी यह संकेत देती है कि निचले स्तरों पर अभी भी खरीदारी की मजबूत रुचि बनी हुई है। हालांकि अनिश्चित वैश्विक माहौल को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)


