नई दिल्ली: देश की करोड़ों गरीब और जरूरतमंद आबादी को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने वाली राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत राशन वितरण के नियमों को बदलने का प्रस्ताव रखा गया है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो वर्षों से चली आ रही “प्रति परिवार 35 किलोग्राम अनाज” की व्यवस्था में बदलाव होगा और राशन वितरण को प्रति व्यक्ति आधार पर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे खाद्यान्न वितरण अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और जरूरत के अनुरूप बन सकेगा।
क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?
फिलहाल अंत्योदय अन्न योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता है, चाहे परिवार में सदस्यों की संख्या कम हो या ज्यादा।
नए ड्राफ्ट के अनुसार अब प्रत्येक पात्र सदस्य को प्रति माह 7 किलोग्राम अनाज देने का प्रस्ताव है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिवार को मिलने वाले खाद्यान्न की अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम प्रति माह ही रहेगी।
यानी अगर किसी परिवार में:
- 2 सदस्य हैं तो उन्हें 14 किलो अनाज मिलेगा।
- 3 सदस्य हैं तो 21 किलो अनाज मिलेगा।
- 5 सदस्य हैं तो 35 किलो अनाज मिलेगा।
- 5 से अधिक सदस्य होने पर भी अधिकतम 35 किलो अनाज ही मिलेगा।
बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार के आकार के आधार पर असमानता पैदा होती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी परिवार में केवल दो सदस्य हैं तो उन्हें 35 किलो अनाज मिलता है, यानी प्रति व्यक्ति 17.5 किलो। वहीं पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवार को भी कुल 35 किलो ही मिलता है, जिससे प्रति व्यक्ति उपलब्ध अनाज काफी कम हो जाता है।
इसी असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार ने प्रति व्यक्ति आधार पर वितरण की व्यवस्था प्रस्तावित की है ताकि सभी लाभार्थियों को समान मानक पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।
बड़े परिवारों को मिल सकता है फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से राशन वितरण अधिक संतुलित होगा। खासतौर पर उन परिवारों को फायदा मिल सकता है जिनमें सदस्यों की संख्या ज्यादा है और वर्तमान व्यवस्था में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न की मात्रा कम पड़ जाती है।
इसके अलावा पात्र लाभार्थियों की सही पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर वितरण होने से पारदर्शिता भी बढ़ सकती है।
खाद्य और पोषण सुरक्षा को मिलेगा बल
सरकार का उद्देश्य केवल अनाज बांटना नहीं बल्कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करना भी है। प्रति व्यक्ति आधार पर वितरण से वास्तविक जरूरत के अनुसार लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
यह बदलाव राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लाभार्थियों के बीच समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जनता और विशेषज्ञों से मांगे गए सुझाव
केंद्र सरकार ने इस ड्राफ्ट विधेयक को सार्वजनिक करते हुए नागरिकों, खाद्य नीति विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
इच्छुक लोग 13 जुलाई 2026 तक अपने सुझाव सरकार को भेज सकते हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद विधेयक में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं और फिर इसे आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए तैयार किया जाएगा।
क्या बदल सकता है राशन सिस्टम का भविष्य?
यदि यह संशोधन कानून का रूप लेता है तो अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभार्थियों को राशन मिलने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। इससे खाद्यान्न वितरण में समानता बढ़ने, वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
आने वाले महीनों में इस ड्राफ्ट पर मिलने वाले सुझाव और सरकार का अंतिम निर्णय तय करेगा कि देश की राशन व्यवस्था में यह बड़ा बदलाव कब और किस रूप में लागू होगा।


