Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 7 सितंबर को एक बार फिर बिकवाली देखने को मिली। एशियाई बाजारों में रिकवरी के बावजूद घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स दबाव में रहे। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।
दिन के कारोबार के दौरान निफ्टी 23,750 और सेंसेक्स 76,000 के स्तर से भी नीचे फिसला। हालांकि, बाजार में कुछ चुनिंदा फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन IT, मीडिया, PSU बैंक और रियल्टी शेयरों में दबाव ने बाजार की रिकवरी की कोशिश को कमजोर कर दिया।
सेंसेक्स-निफ्टी की क्लोजिंग कैसी रही?
सोमवार के कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.50 फीसदी गिरकर 76,132.81 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 118.55 अंक यानी 0.50 फीसदी टूटकर 23,779.15 पर बंद हुआ।
ब्रॉडर मार्केट में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5 फीसदी गिरा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ।
मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ने का संकेत इंडिया VIX से भी मिला। सोमवार को इंडिया VIX में 5.62 फीसदी की तेजी आई। यह संकेत देता है कि निवेशक निकट अवधि में बाजार की दिशा को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं।
8 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन के मुताबिक, सोमवार को ज्यादातर एशियाई इक्विटी बाजारों में रिकवरी के बावजूद भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर नई चिंताओं ने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया।
टेक्निकल नजरिए से निफ्टी 23,900 के जोन के ऊपर टिकने में सफल नहीं रहा और 23,800 के नीचे बंद हुआ। यह शॉर्ट टर्म मोमेंटम में कमजोरी का संकेत है।
निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
- तत्काल सपोर्ट: 23,700–23,750
- अगला अहम सपोर्ट: 23,500
- पहला रेजिस्टेंस: 23,900
- मजबूत रेजिस्टेंस: 24,000–24,100
अगर निफ्टी 23,700–23,750 के सपोर्ट जोन से नीचे जाता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,500 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं 23,900 के ऊपर मजबूती आने पर 24,000–24,100 की तरफ पुलबैक देखने को मिल सकता है।
राधाकृष्णन के मुताबिक, जब तक निफ्टी 23,700 के ऊपर और बैंक निफ्टी 57,000 के स्तर के ऊपर बना हुआ है, तब तक बड़े टेक्निकल ब्रेकडाउन का खतरा सीमित है। हालांकि, निफ्टी के 23,900–24,000 जोन को दोबारा हासिल करने तक किसी भी तेजी को मजबूत रिकवरी की शुरुआत मानने के बजाय ‘राइज पर बिकवाली’ के नजरिए से देखना बेहतर होगा।
मिडकैप-स्मॉलकैप में क्यों दिख रही अलग चाल?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स और लार्ज-कैप शेयरों पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी घटनाओं का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत अलग ट्रेंड नजर आ रहा है।
मजबूत अर्निंग्स के कारण कुछ चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी बनी हुई है। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में हुई बिकवाली के बाद इन शेयरों में वैल्यू बाइंग बढ़ी है। इससे कई कंपनियों के वैल्यूएशन निवेशकों को आकर्षक नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा, कुछ कंपनियों की कॉरपोरेट अर्निंग्स में गिरावट के बजाय सुधार के संकेत मिल रहे हैं। यही वजह है कि चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
हालांकि, नायर का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में आई तेजी अब कुछ हद तक खिंच चुकी है। सप्लाई चेन में संभावित रुकावट और कमजोर हाई-फ्रीक्वेंसी मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक आगे बाजार के लिए जोखिम बन सकते हैं।
IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार, सोमवार को भारतीय बाजार में कमजोरी रही। सेंसेक्स करीब 383 अंक और निफ्टी लगभग 119 अंक गिरकर बंद हुआ।
बाजार के सेंटीमेंट पर दो प्रमुख ग्लोबल फैक्टर हावी रहे। पहला, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, जिससे ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। दूसरा, उम्मीद से बेहतर अमेरिकी पेरोल डेटा ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी।
सेक्टरों में IT शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी IT इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। Infosys, Tech Mahindra, HCLTech और LTIMindtree जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इसके अलावा PSU बैंक और रियल्टी शेयर भी दबाव में रहे।
इसके विपरीत फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी का रुख देखने को मिला।
HDFC Bank और ऑटो सेक्टर से मिली राहत
तिवारी के मुताबिक, HDFC Bank को RBI की FCNR(B) स्वैप विंडो से फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे बैंक के लिए करीब 11.5–12 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाने का रास्ता खुल सकता है। इससे त्योहारों के मौसम में लोन वितरण के लिए बैंक की लिक्विडिटी और फंडिंग स्थिति को सपोर्ट मिल सकता है।
दूसरी ओर, अगस्त में ऑटो रिटेल सेक्टर का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। वाहन रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर 17.5 फीसदी बढ़कर 24.23 लाख यूनिट हो गया। शहरी मांग की तुलना में ग्रामीण मांग बेहतर रहने से देश में कुल खपत के आउटलुक को भी सपोर्ट मिला है।
Asian Paints में बड़ा कॉरपोरेट अपडेट
Asian Paints ने लियो पुरी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया है। कंपनी उन्हें 23 जनवरी 2027 से चेयरमैन नियुक्त करने की योजना बना रही है। बाजार में कॉरपोरेट स्तर पर होने वाले ऐसे बदलावों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
तिवारी के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और दिग्गज शेयरों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। मजबूत घरेलू खपत बाजार के लिए एक सकारात्मक फैक्टर बनी हुई है।
23,850 का स्तर निफ्टी के लिए बेहद अहम
कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान के मुताबिक, बेंचमार्क इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग जारी है। सोमवार को निफ्टी 119 अंक और सेंसेक्स करीब 383 अंक गिरकर बंद हुआ।
सेक्टरों की बात करें तो चुनिंदा फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में इंट्राडे खरीदारी देखने को मिली। वहीं मीडिया और IT इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। मीडिया इंडेक्स करीब 3 फीसदी और IT इंडेक्स 2.28 फीसदी गिरा।
टेक्निकल चार्ट पर गैप-डाउन ओपनिंग के बाद ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली देखने को मिली। डेली चार्ट पर बनी बेयरिश कैंडल और इंट्राडे चार्ट पर लोअर टॉप का पैटर्न बाजार में आगे भी कमजोरी की संभावना की ओर संकेत कर रहा है।
डे ट्रेडर्स के लिए अहम लेवल
श्रीकांत चौहान के अनुसार, 23,850 का स्तर निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस बन गया है। जब तक इंडेक्स इस स्तर के नीचे रहता है, करेक्शन की लहर जारी रह सकती है।
नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,670–23,600 का जोन अहम सपोर्ट बन सकता है। वहीं अगर निफ्टी 23,850 के ऊपर टिकने में सफल होता है, तो पुलबैक बढ़कर 23,950–24,000 तक जा सकता है।
8 सितंबर के लिए क्या है बाजार का संकेत?
कुल मिलाकर 8 सितंबर को बाजार की दिशा में 23,700–23,750 का सपोर्ट और 23,850–23,900 का रेजिस्टेंस अहम भूमिका निभा सकता है।
अगर निफ्टी सपोर्ट जोन के ऊपर टिकता है और 23,850–23,900 को पार करता है, तो बाजार में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है। इसके बाद 24,000 का स्तर अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
इसके विपरीत 23,700 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर 23,600 और उसके बाद 23,500 की तरफ दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल मार्केट के संकेतों पर बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में तेजी आने पर भी जल्दबाजी में आक्रामक खरीदारी से बचना जरूरी हो सकता है। खासकर हाई-बीटा और महंगे वैल्यूएशन वाले शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है। दूसरी तरफ मजबूत अर्निंग्स और घरेलू मांग से जुड़े चुनिंदा शेयरों में कमजोरी के दौरान अवसर बन सकते हैं।
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