Raksha Bandhan Gifting: इस रक्षाबंधन अगर आप बहन को कैश, मिठाई या कपड़ों के बजाय ऐसा तोहफा देना चाहते हैं जो लंबे समय में उसकी संपत्ति बढ़ाने में मदद कर सके, तो शेयर और म्यूचुअल फंड यूनिट्स एक विकल्प हो सकते हैं। जानें शेयर या म्यूचुअल फंड गिफ्ट करने का तरीका और इससे जुड़े टैक्स नियम।
Raksha Bandhan Gifting: रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे को प्यार और शुभकामनाओं के साथ गिफ्ट देते हैं। आमतौर पर इसके लिए कैश, मिठाई, कपड़े, ज्वेलरी या कोई उपयोगी सामान चुना जाता है। लेकिन अगर आप इस बार अपनी बहन को कुछ अलग और लंबे समय के लिए उपयोगी देना चाहते हैं, तो शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स का गिफ्ट एक विकल्प हो सकता है।
ऐसा गिफ्ट सिर्फ तत्काल खुशी देने तक सीमित नहीं रहता। अगर निवेश अच्छा प्रदर्शन करता है, तो समय के साथ उसकी वैल्यू बढ़ सकती है और यह बहन के किसी बड़े वित्तीय लक्ष्य में काम आ सकता है। हालांकि, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और निवेश का मूल्य घट भी सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि भाई और बहन आयकर कानून के तहत ‘रिश्तेदार’ की श्रेणी में आते हैं। इसलिए निर्धारित शर्तों के तहत भाई से बहन को दिए गए शेयर या म्यूचुअल फंड जैसे पूंजीगत एसेट पर सिर्फ गिफ्ट प्राप्त करने के कारण आयकर नहीं लगता। लेकिन भविष्य में इन्हें बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं।
बहन को शेयर गिफ्ट करने के लिए क्या जरूरी है?
अगर आप अपनी बहन को शेयर या ETF गिफ्ट करना चाहते हैं, तो आम तौर पर दोनों के पास अपने नाम से डीमैट अकाउंट होना चाहिए। ट्रांसफर की सुविधा और प्रक्रिया ब्रोकर तथा डिपॉजिटरी के हिसाब से अलग हो सकती है।
शेयर गिफ्ट करने से पहले बहन के डीमैट अकाउंट की जानकारी सही तरीके से लेना जरूरी है। गलत DP ID, Client ID या अन्य विवरण दर्ज होने पर ट्रांसफर में परेशानी हो सकती है।
शेयर गिफ्ट करने का सामान्य प्रोसेस
- अपने ब्रोकर के ऐप या वेब प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करें।
- वहां Gift Stocks, Gifting या Off-Market Transfer से जुड़ा विकल्प देखें।
- जिस व्यक्ति को शेयर गिफ्ट करना है, यानी बहन की जरूरी डीमैट जानकारी दर्ज करें।
- गिफ्ट किए जाने वाले शेयर या ETF और उनकी संख्या चुनें।
- ट्रांसफर की जानकारी को ध्यान से जांचें।
- उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार OTP, TPIN या अन्य ऑथेंटिकेशन पूरा करें।
- कुछ मामलों में रिसीवर यानी बहन को भी ट्रांसफर स्वीकार करना पड़ सकता है।
- ट्रांसफर पूरा होने के बाद दोनों डीमैट अकाउंट में इसकी स्थिति जांच लें।
ध्यान रखें: हर ब्रोकर में शेयर गिफ्ट करने का इंटरफेस और प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती। इसलिए ट्रांसफर शुरू करने से पहले अपने ब्रोकर की मौजूदा प्रक्रिया और शुल्क जरूर जांचें।
क्या शेयर गिफ्ट करने पर बहन को टैक्स देना होगा?
आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) के तहत कुछ रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट को टैक्स से छूट मिलती है। भाई और बहन इस ‘relative’ की परिभाषा में शामिल हैं।
इसका मतलब है कि अगर भाई अपनी बहन को शेयर या म्यूचुअल फंड जैसी संपत्ति गिफ्ट करता है, तो सामान्य तौर पर सिर्फ गिफ्ट प्राप्त करने के कारण उसकी पूरी मार्केट वैल्यू को बहन की taxable income नहीं माना जाता।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन निवेशों पर भविष्य में कभी टैक्स नहीं लगेगा।
बहन बाद में शेयर बेचती है तो क्या होगा?
यहां एक महत्वपूर्ण टैक्स नियम समझना जरूरी है। गिफ्ट में मिले शेयरों को बेचने पर कैपिटल गेन्स की गणना करते समय गिफ्ट देने वाले व्यक्ति की मूल लागत (cost of acquisition) को ध्यान में रखा जाता है।
साथ ही, कुछ परिस्थितियों में गिफ्ट देने वाले के पास शेयर रखने की अवधि भी नए मालिक की holding period में जोड़ी जाती है। इसलिए सिर्फ गिफ्ट मिलने की तारीख से holding period गिनना हमेशा सही नहीं होगा।
उदाहरण के लिए, अगर भाई ने कोई शेयर काफी समय पहले खरीदा था और बाद में उसे बहन को गिफ्ट किया, तो बहन के भविष्य में उस शेयर को बेचने पर कैपिटल गेन्स की गणना के लिए भाई की मूल खरीद लागत और लागू holding-period नियम महत्वपूर्ण होंगे।
इसलिए शेयर गिफ्ट करने के साथ-साथ पुराने purchase records, contract notes और अन्य निवेश दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
म्यूचुअल फंड कैसे गिफ्ट करें?
म्यूचुअल फंड में शेयरों की तरह सिर्फ ‘गिफ्ट’ बटन दबाकर हर स्थिति में यूनिट ट्रांसफर करना संभव नहीं होता। प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि म्यूचुअल फंड यूनिट्स डीमैट फॉर्म में हैं या फोलियो के रूप में, और संबंधित प्लेटफॉर्म/रजिस्ट्रार कौन-सी सुविधा देता है।
म्यूचुअल फंड गिफ्ट करने के लिए दो व्यावहारिक तरीके समझे जा सकते हैं।
तरीका 1: बहन के नाम नया निवेश करें
यह सबसे आसान विकल्पों में से एक है। आप अपनी बहन के नाम मौजूद म्यूचुअल फंड फोलियो में लमसम निवेश कर सकते हैं, बशर्ते संबंधित फंड हाउस और प्लेटफॉर्म की प्रक्रिया इसकी अनुमति देती हो।
अगर बहन के नाम निवेश खाता या फोलियो पहले से नहीं है, तो KYC और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ सकती हैं।
आप चाहें तो बहन के वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से उसके नाम पर नया निवेश शुरू करने में भी मदद कर सकते हैं।
तरीका 2: मौजूदा म्यूचुअल फंड यूनिट्स ट्रांसफर करें
अगर आपके पास पहले से म्यूचुअल फंड यूनिट्स हैं और उन्हें ही गिफ्ट करना चाहते हैं, तो पहले यह जांचना जरूरी है कि संबंधित यूनिट्स और प्लेटफॉर्म पर ऑफ-मार्केट ट्रांसफर या गिफ्टिंग की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।
डीमैट में रखी यूनिट्स के मामले में डिपॉजिटरी और ब्रोकर की प्रक्रिया लागू हो सकती है। वहीं, सीधे फोलियो में रखी यूनिट्स के लिए म्यूचुअल फंड/RTA की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
इसलिए किसी भी ट्रांसफर से पहले संबंधित AMC, RTA या ब्रोकर से मौजूदा नियम और दस्तावेजों की जानकारी लेना बेहतर है।
क्या SIP को गिफ्ट या ट्रांसफर किया जा सकता है?
यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। SIP खुद कोई संपत्ति नहीं, बल्कि नियमित निवेश का तरीका है। इसलिए मौजूदा SIP को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम सीधे ‘ट्रांसफर’ करने की बात सही नहीं है।
अगर आप बहन के लिए हर महीने निवेश करना चाहते हैं, तो उनके नाम से अलग SIP शुरू की जा सकती है। इसके लिए उनकी KYC और निवेश खाते से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इस तरह आप रक्षाबंधन पर सिर्फ एक बार का गिफ्ट देने के बजाय बहन के लिए लंबे समय तक निवेश की आदत बनाने में भी मदद कर सकते हैं।
गिफ्ट किए गए म्यूचुअल फंड बेचने पर टैक्स कैसे लगेगा?
शेयरों की तरह गिफ्ट में मिले म्यूचुअल फंड यूनिट्स को भविष्य में बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स का सवाल उठ सकता है।
आम तौर पर गिफ्ट के समय टैक्स न लगने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में बिक्री पर टैक्स से भी पूरी तरह छूट मिल गई। बिक्री के समय लागत, खरीद की तारीख, holding period और उस समय लागू capital gains tax rules को ध्यान में रखना होगा।
म्यूचुअल फंड का प्रकार भी महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए बिक्री के समय लागू नियमों के अनुसार टैक्स कैलकुलेशन करना चाहिए।
क्या गिफ्ट की कोई लिमिट है?
रिश्तेदार से मिले गिफ्ट के मामले में सामान्य ₹50,000 वाली सीमा को सीधे लागू करना सही नहीं है। आयकर कानून में ‘relative’ से मिले कुछ गिफ्ट को अलग तरीके से ट्रीट किया जाता है।
चूंकि भाई और बहन एक-दूसरे के लिए निर्धारित relative category में आते हैं, इसलिए भाई से बहन को मिले पात्र गिफ्ट पर सिर्फ इस वजह से टैक्स नहीं लगता कि उसकी वैल्यू ₹50,000 से ज्यादा है।
फिर भी ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखना समझदारी है, खासकर जब गिफ्ट की वैल्यू बड़ी हो।
गिफ्ट देने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
1. डीमैट डिटेल सही जांचें: बहन का नाम, PAN, DP ID और Client ID जैसी जानकारी गलत नहीं होनी चाहिए।
2. ब्रोकर की फीस देखें: कुछ ट्रांसफर या ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू हो सकता है।
3. रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: शेयर की मूल खरीद कीमत, खरीद की तारीख और संबंधित दस्तावेज संभालकर रखें।
4. टैक्स रिकॉर्ड बनाए रखें: भविष्य में बिक्री के समय capital gains की गणना के लिए गिफ्ट से जुड़े दस्तावेज काम आ सकते हैं।
5. निवेश का जोखिम समझें: शेयर और म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े निवेश हैं। इनकी वैल्यू बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है।
6. बहन के लक्ष्य को ध्यान में रखें: सिर्फ गिफ्ट के लिए कोई भी शेयर खरीदने के बजाय निवेश का उद्देश्य, जोखिम और समयावधि समझना बेहतर है।
रक्षाबंधन पर फाइनेंशियल गिफ्ट क्यों हो सकता है खास?
रक्षाबंधन का गिफ्ट सिर्फ एक दिन की खुशी तक सीमित नहीं होना चाहिए। अगर आपकी बहन निवेश करना चाहती हैं, तो उनके नाम शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करना लंबे समय में उपयोगी साबित हो सकता है।
मान लीजिए आज दिया गया निवेश आने वाले कई वर्षों तक बना रहता है और बाजार के प्रदर्शन के साथ उसकी वैल्यू बढ़ती है। तब यही छोटा-सा रक्षाबंधन गिफ्ट भविष्य में शिक्षा, घर, यात्रा या किसी अन्य वित्तीय लक्ष्य के लिए बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, रिटर्न निश्चित नहीं है। इसलिए किसी शेयर या म्यूचुअल फंड को सिर्फ इसलिए नहीं चुनना चाहिए क्योंकि वह गिफ्ट के रूप में दिया जा रहा है। निवेश से पहले जोखिम, अवधि और बहन की जरूरतों को समझना जरूरी है।
निष्कर्ष
इस रक्षाबंधन अगर आप बहन को कुछ ऐसा देना चाहते हैं जिसकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे, तो शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश एक अलग तरह का फाइनेंशियल गिफ्ट हो सकता है। भाई-बहन के बीच पात्र गिफ्ट पर प्राप्तकर्ता के स्तर पर सामान्यतः gift tax नहीं लगता, लेकिन भविष्य में निवेश बेचने पर capital gains tax के नियम लागू हो सकते हैं।
शेयर ट्रांसफर करने के लिए दोनों के डीमैट अकाउंट और सही डिटेल जरूरी हैं, जबकि म्यूचुअल फंड में यूनिट्स की प्रकृति और प्लेटफॉर्म के आधार पर प्रक्रिया बदल सकती है। इसलिए निवेश करने से पहले अपने ब्रोकर, AMC/RTA और लागू टैक्स नियमों की ताजा जानकारी जरूर जांच लें।


