North Korea Economic Success: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, आर्थिक अलगाव और दशकों से चली आ रही राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उत्तर कोरिया एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में उत्तर कोरिया को दुनिया की सबसे हैरान करने वाली आर्थिक सफलता की कहानियों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में ऐसे बदलाव दिखाई दे रहे हैं जो पिछले कई वर्षों में देखने को नहीं मिले थे। राजधानी प्योंगयांग में नए आवासीय प्रोजेक्ट, अस्पताल, ग्रीनहाउस कॉम्प्लेक्स और कारोबारी गतिविधियों का विस्तार इस बदलाव की झलक दे रहे हैं।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्योंगयांग पहुंचे हैं। हाल के वर्षों में चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों में आई मजबूती को भी इस आर्थिक बदलाव का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग का समर्थन और हथियारों के निर्यात से होने वाली कमाई ने उत्तर कोरिया को आर्थिक रूप से नई ताकत दी है।
प्रतिबंधों के बावजूद कैसे बढ़ रही है उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था?
उत्तर कोरिया लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कई आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाना रहा है। इसके बावजूद देश ने अपने लिए आय के नए स्रोत खोजे हैं।
WSJ की रिपोर्ट के अनुसार, हथियारों की बिक्री उत्तर कोरिया की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरी है। रूस और अन्य सहयोगी देशों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग से देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है। इसके अलावा चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आई है।
चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा, मशीनरी, कलपुर्जों और अन्य औद्योगिक सामानों की आपूर्ति में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे उत्तर कोरिया को घरेलू उत्पादन बढ़ाने और नई परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिली है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि प्योंगयांग ने प्रतिबंधों के बीच भी वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित किए हैं। इसी वजह से आवश्यक वस्तुओं और औद्योगिक कच्चे माल की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
शी जिनपिंग के दौरे का क्या है महत्व?
चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्योंगयांग पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू स्वयं हवाई अड्डे पर मौजूद रहे। इस दौरान 21 तोपों की सलामी दी गई और दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक महत्व का नहीं है बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। चीन और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सहयोग से निवेश, व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल सकती है।
ऐसे समय में जब दुनिया के कई बड़े देश उत्तर कोरिया से दूरी बनाए हुए हैं, चीन का खुला समर्थन किम जोंग उन सरकार के लिए एक बड़ी ताकत माना जा रहा है।
प्योंगयांग में दिखाई दे रहे हैं बदलाव के संकेत
WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी प्योंगयांग में कई ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शहर में नए पेट स्टोर, इंटरनेट कैफे और लग्जरी कार डीलरशिप खुल रहे हैं। BMW जैसी विदेशी ब्रांड की कारों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
इसके अलावा पिछले वर्ष राजधानी में लगभग 10,000 नए आवासीय यूनिट्स का निर्माण किया गया। यह संख्या दुनिया के कई विकसित शहरों में हुए आवास निर्माण के बराबर या उससे अधिक बताई जा रही है।
हालांकि स्वतंत्र एजेंसियों के लिए इन आंकड़ों का सत्यापन आसान नहीं है, फिर भी बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां उत्तर कोरिया की आर्थिक प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।
अस्पताल, ग्रीनहाउस और रिजॉर्ट प्रोजेक्ट्स ने खींचा ध्यान
उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। इनमें राजधानी का एक विशाल अस्पताल, अत्याधुनिक ग्रीनहाउस कॉम्प्लेक्स और नया पर्यटन रिजॉर्ट शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनहाउस कॉम्प्लेक्स का आकार न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क से भी बड़ा बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में खाद्य उत्पादन बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी कई परियोजनाओं पर काम किया गया है। उत्तर कोरिया उम्मीद कर रहा है कि भविष्य में मित्र देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और इससे विदेशी मुद्रा अर्जित होगी।
क्या है उत्तर कोरिया का ’20×10′ प्रोग्राम?
आर्थिक विकास को गति देने के लिए उत्तर कोरिया ने ’20×10′ नामक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है।
इस योजना के तहत अगले 10 वर्षों तक हर साल 20 शहरों और जिलों में नई फैक्ट्रियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा और औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा।
यदि यह योजना सफल होती है तो इससे राजधानी प्योंगयांग के बाहर भी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है। उत्तर कोरिया लंबे समय से क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या से जूझता रहा है, जहां अधिकांश निवेश राजधानी तक ही सीमित रहता है।
रक्षा उद्योग भी बना आर्थिक ताकत
उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था में रक्षा क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में किम जोंग उन ने एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन संयंत्र का निरीक्षण किया।
सरकारी मीडिया के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में हथियार-ग्रेड परमाणु सामग्री उत्पादन क्षमता को दोगुना करने में सफलता मिली है।
हालांकि पश्चिमी देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस विकास को सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय मानते हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से रक्षा उद्योग उत्तर कोरिया के लिए आय और तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण स्रोत बनता जा रहा है।
क्या वास्तव में आर्थिक चमत्कार हो रहा है?
यह सवाल अभी भी विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राजधानी में दिखाई देने वाला विकास पूरे देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाता।
उत्तर कोरिया अभी भी खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टें बताती हैं कि देश के कई हिस्सों में आर्थिक परिस्थितियां अब भी कठिन हैं।
इसके बावजूद यह भी सच है कि हाल के वर्षों में प्योंगयांग में बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यही वजह है कि WSJ ने इसे दुनिया की सबसे अप्रत्याशित आर्थिक सफलता की कहानी कहा है।
आगे क्या?
शी जिनपिंग के दौरे, चीन के बढ़ते समर्थन और उत्तर कोरिया की नई औद्योगिक योजनाओं को देखते हुए आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। यदि प्योंगयांग व्यापार और औद्योगिक विकास की वर्तमान गति को बनाए रखने में सफल रहता है तो यह वैश्विक आर्थिक विश्लेषकों के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
हालांकि प्रतिबंधों, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण उत्तर कोरिया का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। फिर भी इतना तय है कि दुनिया जिस देश को लंबे समय से आर्थिक रूप से अलग-थलग मानती रही, वह अब एक नए आर्थिक प्रयोग के रूप में चर्चा में है।


