Nirmala Sitharaman Economic Reforms: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर सरकार की आर्थिक रणनीति पर बात की है। उन्होंने कहा कि आने वाले करीब दो दशकों में देश को आर्थिक सुधारों को तेज करने के साथ-साथ पर्याप्त पूंजी और विशेषज्ञता की जरूरत होगी। सरकार का एक अहम लक्ष्य सरकारी कर्ज को 2030 तक GDP के 50% तक लाना भी है।
2047 का लक्ष्य अब ज्यादा दूर नहीं
अमेरिका स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय किया है। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में चल रहे आर्थिक सुधारों को बड़े पैमाने पर समर्थन की आवश्यकता होगी।
वित्त मंत्री ने प्रवासी भारतीयों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे लोगों की जरूरत है, जिनके पास अनुभव, विशेषज्ञता और नए विचार हों। इसके अलावा विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना भी जरूरी होगा।
वैश्विक संकट के बीच भारत ने उठाए कदम
वित्त मंत्री ने वैश्विक स्तर पर पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि कच्चे तेल, एलपीजी और उर्वरकों की सप्लाई चेन में व्यवधान के बावजूद भारत में ईंधन या खाद का संकट पैदा नहीं होने दिया गया।
उन्होंने बताया कि शिपिंग कंपनियों के लिए बढ़े हुए जोखिम प्रीमियम से निपटने के लिए बजट में विशेष फंड का प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य आयात की प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाना था।
सीतारमण के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा, लेकिन भारत ने उपलब्ध संसाधनों और सीमाओं के बीच अपने नागरिकों तथा किसानों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की।
2030 तक सरकारी कर्ज घटाने की तैयारी
निर्मला सीतारमण ने सरकार की वित्तीय रणनीति का एक अहम लक्ष्य भी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार 2030 तक सरकारी उधारी को GDP के करीब 50% के स्तर पर लाने की दिशा में काम करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर अभी भी उनकी GDP के 200% से अधिक का कर्ज है। इसके मुकाबले भारत ने राजकोषीय अनुशासन पर जोर दिया है और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ा है।
राजकोषीय घाटे पर भी सरकार का फोकस
सरकार की रणनीति में सिर्फ कर्ज कम करना ही शामिल नहीं है, बल्कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना भी अहम हिस्सा है। सीतारमण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 तक जिस राजकोषीय अनुशासन के लक्ष्य को हासिल करना था, उसे पूरा कर लिया गया है।
सरकार का फोकस अब आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने पर है। एक तरफ देश में निवेश और विकास को बढ़ावा देने के लिए पूंजी की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी वित्त को मजबूत रखना भी जरूरी है।
सुधार, पूंजी और विशेषज्ञता पर जोर
वित्त मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ निजी और वैश्विक पूंजी की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे सकती है।
इसके लिए प्रवासी भारतीयों और वैश्विक स्तर पर अनुभव रखने वाले पेशेवरों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, निवेश, राजकोषीय अनुशासन और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटना सरकार की आर्थिक नीति के प्रमुख आधार बने रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, वित्त मंत्री का संदेश यही है कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले करीब दो दशक निर्णायक होंगे। सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने, निवेश और पूंजी को आकर्षित करने तथा सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।


