IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों की नो-बॉल चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई। दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया के गेंदबाजों ने कुल 13 नो-बॉल फेंकीं। इस दौरान कई बार गेंदबाजों का पैर क्रीज से आगे निकलता नजर आया। लगातार हो रही इस गलती पर पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने एक अनोखा सुझाव दिया है।
गावस्कर का मानना है कि रेड-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल करने वाले गेंदबाज पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, अगर गेंदबाज दोबारा यही गलती करता है तो उस पर पहले से दोगुना फाइन लगाया जाए और जुर्माने की आधी रकम गेंदबाजी कोच से भी वसूली जाए।
दूसरे टेस्ट में 13 नो-बॉल ने बढ़ाई चिंता
श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों की नो-बॉल की संख्या ने सभी का ध्यान खींचा। टीम इंडिया की ओर से कुल 13 नो-बॉल डाली गईं। स्पिन गेंदबाज सारांश जैन और रवींद्र जडेजा की गेंदों पर कई बार पैर क्रीज से आगे निकल गया।
रवींद्र जडेजा के लिए यह समस्या नई नहीं है। गॉल में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में भी उन्होंने चार नो-बॉल फेंकी थीं। ऐसे में लगातार सामने आ रही इस गलती को लेकर टीम के गेंदबाजी विभाग पर सवाल उठने लगे।
नो-बॉल पर फ्री हिट नहीं, लगे दोगुना जुर्माना
दूसरे टेस्ट के दौरान रेड-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल को लेकर चर्चा हुई। भारतीय स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने सुझाव दिया कि टेस्ट क्रिकेट में भी नो-बॉल के बाद बल्लेबाज को फ्री हिट दी जा सकती है। हालांकि, गावस्कर इससे अलग राय रखते हैं।
‘मिड-डे’ के लिए लिखे अपने कॉलम में गावस्कर ने कहा कि नो-बॉल रोकने के लिए गेंदबाज पर आर्थिक जुर्माना ज्यादा प्रभावी उपाय हो सकता है। उनका सुझाव है कि पहली नो-बॉल पर फाइन लगाया जाए और गलती दोहराने पर जुर्माने की रकम दोगुनी कर दी जाए।
गावस्कर ने यह भी कहा कि गेंदबाजी कोच को भी जुर्माने का कुछ हिस्सा देना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे गेंदबाजों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ पर भी अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी आएगी।
आधुनिक तकनीक के दौर में नो-बॉल क्यों?
गावस्कर ने कहा कि मौजूदा दौर में गेंदबाजों के पास अपनी गेंदबाजी पर नियंत्रण रखने के लिए बेहतर तकनीक और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। ऐसे में नो-बॉल जैसी गलती को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
व्हाइट-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल के बाद मिलने वाली फ्री हिट पहले से ही गेंदबाज के लिए अतिरिक्त सजा का काम करती है। गावस्कर का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में भी नो-बॉल रोकने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जा सकता है, जिससे गेंदबाज इस गलती को लेकर ज्यादा सतर्क रहें।
हालांकि, उन्होंने फ्री हिट को इसका जरूरी समाधान नहीं माना। उनका सुझाव है कि आर्थिक जुर्माना खिलाड़ियों पर ज्यादा सीधा प्रभाव डाल सकता है।
फाइन की रकम से हो टीम डिनर
गावस्कर का सुझाव यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि नो-बॉल से वसूले गए जुर्माने की रकम का इस्तेमाल टीम के डिनर के लिए किया जा सकता है।
इसके अलावा उन्होंने मैदान पर होने वाली दूसरी गलतियों के लिए भी जुर्माने का सुझाव दिया। उदाहरण के तौर पर थ्रो करते समय अपनी जगह से पीछे नहीं हटना या मैदान पर अनुशासन से जुड़ी अन्य गलतियां करने पर टीम सामूहिक रूप से तय कर सकती है कि संबंधित खिलाड़ी पर फाइन लगाया जाए या नहीं।
गावस्कर बोले- कुछ गलतियां पूरी तरह खिलाड़ी के नियंत्रण में
गावस्कर ने इस बात पर जोर दिया कि क्रिकेट में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन पर खिलाड़ी का पूरा नियंत्रण होता है। उनके मुताबिक, बल्लेबाज का अपना गार्ड लेना और गेंदबाज का नो-बॉल नहीं करना ऐसी ही चीजें हैं।
इसी वजह से उनका मानना है कि नो-बॉल को महज एक छोटी तकनीकी गलती मानकर छोड़ना उचित नहीं है। अगर लगातार नो-बॉल की समस्या सामने आती है तो खिलाड़ियों को आर्थिक जुर्माने जैसे उपायों के जरिए अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकता है।
भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में नो-बॉल का मुद्दा सामने आने के बाद गावस्कर का यह सुझाव निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल को लेकर भविष्य में किसी तरह का नया नियम या दंड व्यवस्था लागू होती है या नहीं।


