भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी अहम रहने वाला है। निवेशकों की नजर एक साथ कई घरेलू और वैश्विक संकेतकों पर रहेगी। भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ से लेकर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों तक, कई ऐसे डेटा सामने आने वाले हैं जो बाजार की अगली दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीद-बिक्री और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII का सपोर्ट भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
पिछले कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन बाजार में खरीदारी लौटी। BSE Sensex 331 अंक चढ़कर 77,264 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 85 अंकों की तेजी रही और यह 24,178 पर बंद हुआ। लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में तेजी जरूर आई, लेकिन आने वाले सप्ताह में महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और ग्लोबल न्यूज फ्लो के कारण उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
आइए जानते हैं वे 7 बड़े फैक्टर, जिन पर निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
1. भारत की GDP Growth से मिलेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर
सप्ताह की शुरुआत भारत की अप्रैल-जून तिमाही यानी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों से होगी। यह डेटा बताएगा कि इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कैसी रही।
इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ करीब 7.3 फीसदी रह सकती है। सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों और कुछ वस्तुओं की ऊंची कीमतों के बावजूद घरेलू खपत, निर्यात और सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर ने आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट दिया है।
GDP का आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहता है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं, उम्मीद से कमजोर ग्रोथ बाजार में आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ा सकती है।
2. अमेरिकी Non-Farm Payrolls पर रहेगी ग्लोबल मार्केट की नजर
इस सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण ग्लोबल डेटा अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट हो सकती है। 4 सितंबर को जारी होने वाली Non-Farm Payrolls रिपोर्ट से अमेरिका के जॉब मार्केट की स्थिति का संकेत मिलेगा।
अमेरिकी रोजगार बाजार फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि रोजगार के आंकड़े मजबूत आते हैं तो ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर हो सकती है। इसके विपरीत कमजोर रोजगार आंकड़े फेड के नरम रुख की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं।
इसका असर केवल अमेरिकी बाजार पर ही नहीं, बल्कि भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है। निवेशक अमेरिकी डॉलर और Treasury Yield की चाल पर भी नजर रखेंगे।
3. कच्चे तेल की कीमतें बदल सकती हैं बाजार का मूड
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत हमेशा एक महत्वपूर्ण संकेतक रही है। पिछले सप्ताह क्रूड ऑयल की कीमत में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। शुक्रवार को Brent Crude करीब 89.31 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
तेल बाजार में निवेशक वैश्विक सप्लाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। खासतौर पर Strait of Hormuz की स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सप्लाई बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए क्रूड महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, तेल की कीमतों में नरमी से आयातित महंगाई को राहत मिल सकती है।
4. FII की बिकवाली बनाम DII की खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां इस समय बाजार के लिए एक बड़ा संकेत हैं। 28 अगस्त को FII ने करीब 5,040 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने इसी दिन करीब 5,184 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस तरह घरेलू संस्थानों की खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक कम किया।
महीने की पूरी तस्वीर देखें तो FII करीब 454 करोड़ रुपये के मामूली शुद्ध खरीदार रहे हैं, जबकि DII का निवेश करीब 79,620 करोड़ रुपये रहा है।
घरेलू संस्थानों की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट बनी हुई है। अगर FII की बिकवाली बढ़ती है, तो DII की खरीदारी बाजार में गिरावट को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
5. रुपये की चाल भी होगी अहम
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की चाल पर भी बाजार की नजर रहेगी। रुपये में कमजोरी आने पर खासकर उन कंपनियों पर असर पड़ सकता है जो बड़ी मात्रा में आयात करती हैं।
वहीं, मजबूत रुपया आयात की लागत को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों के साथ रुपये की चाल का सीधा संबंध भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार की आकर्षकता को प्रभावित कर सकता है।
6. US Treasury Yield से समझें विदेशी पूंजी का संकेत
अमेरिकी Treasury Yield भी इस सप्ताह बाजार के रडार पर रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी होने पर निवेशकों को अमेरिका में अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न मिल सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है।
इसके विपरीत अमेरिकी यील्ड में नरमी से जोखिम वाली परिसंपत्तियों और उभरते बाजारों में निवेश को कुछ समर्थन मिल सकता है।
इसलिए भारतीय निवेशकों के लिए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के साथ Treasury Yield और डॉलर की दिशा को देखना भी जरूरी होगा।
7. ब्याज दर और बॉन्ड मार्केट से मिलेगा अतिरिक्त संकेत
घरेलू बॉन्ड बाजार और ब्याज दरों की दिशा भी इक्विटी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। RBI की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों के बीच घरेलू बॉन्ड यील्ड पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव से कंपनियों की borrowing cost प्रभावित होती है। यदि ब्याज दरों को लेकर नरम रुख बनता है तो ब्याज पर निर्भर सेक्टरों को फायदा मिल सकता है। दूसरी ओर, सख्त मौद्रिक माहौल बाजार की liquidity और निवेश धारणा पर दबाव डाल सकता है।
निवेशकों के लिए कैसा रहेगा यह सप्ताह?
कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए डेटा और ग्लोबल संकेतों से भरा रहने वाला है। भारत की GDP, अमेरिकी Non-Farm Payrolls, कच्चा तेल, FII-DII गतिविधियां, रुपया, अमेरिकी Treasury Yield और ब्याज दरों से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर रहेंगे।
घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और DII की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकते हैं। वहीं, FII की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये में कमजोरी या कच्चे तेल में अचानक उछाल बाजार की चिंता बढ़ा सकता है।
ऐसे में निवेशकों को केवल एक आंकड़े के आधार पर फैसला लेने के बजाय इन सभी संकेतकों को साथ में देखना चाहिए। आने वाले दिनों में किसी भी बड़े आर्थिक या भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव के रूप में दिखाई दे सकता है।


