नई दिल्ली: भारत की प्रमुख सड़क प्राधिकरण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाल ही में एक अभिनव पहल की घोषणा की है। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के खाली जमीन के हिस्सों पर ‘आरोग्य वन’ (Thematic Medicinal Plantations) विकसित किए जाएंगे। यह पहल न केवल जैव विविधता बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
NHAI ने बयान में कहा कि इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जैव विविधता को समृद्ध करना है। इसके लिए ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जिनके औषधीय गुण हैं और जो परागण करने वाले कीट, पक्षियों और सूक्ष्म जीवों का समर्थन करते हैं। इस तरह यह पहल इकोसिस्टम की सहनशीलता और स्थायित्व को बढ़ाने में मदद करेगी।
‘आरोग्य वन’ का पहला चरण
इस परियोजना के पहले चरण में 17 जमीन के हिस्सों को चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल क्षेत्रफल 62.8 हेक्टेयर है। इन क्षेत्रों में लगभग 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे, जो विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के साथ स्थित हैं।
प्रदेश और क्षेत्रों की सूची:
- मध्य प्रदेश
- हरियाणा
- दिल्ली-एनसीआर
- आंध्र प्रदेश
- गुजरात
- कर्नाटक
- ओडिशा
- तमिलनाडु
- राजस्थान
- महाराष्ट्र
- छत्तीसगढ़
इन क्षेत्रों का चयन स्थानीय कृषि और जलवायु परिस्थितियों के आधार पर किया गया है ताकि पौधों की बढ़वार और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके।
औषधीय वृक्ष और उनकी विशेषताएँ
NHAI ने लगभग 36 औषधीय वृक्ष प्रजातियों की पहचान की है जिन्हें आरोग्य वन में लगाया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- नीम (Neem) – एंटीबैक्टीरियल और रोग प्रतिरोधक गुणों वाला
- आंवला (Amla) – विटामिन C से भरपूर और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाला
- इमली (Tamarind) – पाचन और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध
- जामुन (Jamun) – मधुमेह नियंत्रण में सहायक
- नींबू (Lemon) – रोग प्रतिरोधक और विटामिन C का स्रोत
- गुलर (Ficus glomerata) – औषधीय और पारिस्थितिक महत्व वाला
- मौलसरी (Maulsari) – हृदय स्वास्थ्य और पारंपरिक औषधि में उपयोगी
इन पौधों को स्थानीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति के अनुसार लगाया जाएगा, ताकि उनकी वृद्धि और औषधीय क्षमता अधिकतम हो सके।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर प्रभाव
आरोग्य वन की स्थापना के कई लाभ हैं:
- जैव विविधता में वृद्धि – औषधीय पौधे विभिन्न पक्षियों, कीट और छोटे जीवों का आवास प्रदान करेंगे।
- मिट्टी और जल संरक्षण – वृक्ष कटाव को रोकेंगे और भूमि की उर्वरता बनाए रखेंगे।
- कार्बन अवशोषण – यह पहल पर्यावरण संरक्षण में योगदान करेगी और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद करेगी।
- सामुदायिक लाभ – आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग औषधीय पौधों के उपयोग और स्वास्थ्य लाभ से जुड़ेंगे।
इस पहल से राष्ट्रीय राजमार्ग केवल यात्रा मार्ग नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी बन जाएंगे।
राष्ट्रीय महत्व और सरकारी दृष्टिकोण
NHAI की यह पहल भारत सरकार की हरित और सतत विकास नीतियों के अनुरूप है। औषधीय वृक्षों की रोपण से न केवल पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य जागरूकता में भी योगदान मिलेगा।
NHAI के अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्गों के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण का एक अभिनव उदाहरण है। भविष्य में इस योजना का विस्तार अन्य राज्यों और राजमार्ग परियोजनाओं तक किया जाएगा।
निष्कर्ष
‘आरोग्य वन’ पहल सिर्फ वृक्षारोपण नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता का मिश्रण है।
- 17 भूमि भूखंडों पर 62.8 हेक्टेयर में 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे
- 36 प्रजातियों के औषधीय वृक्ष, जैसे नीम, आंवला, जामुन, इमली और नींबू
- राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता में सुधार
इस पहल से स्पष्ट है कि NHAI केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी में भी सक्रिय है।
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