Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 17 अगस्त को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी 24,300 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जबकि मेटल और रियल्टी इंडेक्स में खरीदारी रही। ऐसे में अब निवेशकों की नजर 18 अगस्त को बाजार की दिशा और अहम सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तरों पर रहेगी।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
17 अगस्त के कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 फीसदी गिरकर 77,728.16 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 फीसदी की गिरावट के साथ 24,287.65 पर बंद हुआ।
बाजार में कुल मिलाकर मिलाजुला रुख देखने को मिला। करीब 2,025 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,213 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 181 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी के कमजोर प्रदर्शन वाले प्रमुख शेयरों में इन्फोसिस, सन फार्मा, HCL टेक, नेस्ले और TCS शामिल रहे। दूसरी तरफ हिंडाल्को, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, HDFC लाइफ और ONGC में खरीदारी देखने को मिली।
IT इंडेक्स में करीब 2% की गिरावट
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सोमवार को IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। IT इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिर गया। इसके विपरीत मेटल इंडेक्स में करीब 1.2 फीसदी और रियल्टी इंडेक्स में लगभग 1.5 फीसदी की तेजी रही।
मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन लगभग सपाट रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.36 फीसदी ऊपर बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन बड़े शेयरों में दबाव अभी बना हुआ है।
इनपुट कॉस्ट और कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, एनर्जी से जुड़ी इनपुट लागत का दबाव फिलहाल शॉर्ट-टर्म मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाल रहा है।
वहीं, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर कंपनियों के नतीजों को देखते हुए आने वाली तिमाहियों में अर्निंग अनुमान बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, पिछली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कंपनियों को मार्जिन में फायदा मिला था। अब सवाल यह है कि क्या यह फायदा आगे भी कायम रह पाएगा।
अगर कंपनियों को ज्यादा लागत पर नया स्टॉक खरीदना पड़ता है तो Q2FY27 में मार्जिन विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। यही वजह है कि निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों और कंपनियों की लागत संरचना पर बनी रहेगी।
मिडकैप-स्मॉलकैप में चुनिंदा शेयरों पर नजर
मौजूदा बाजार परिस्थितियों में निवेशकों का फोकस खास तौर पर उन मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर रह सकता है जिनकी अर्निंग ग्रोथ मजबूत है और जिनका बिजनेस आउटलुक बेहतर दिखाई दे रहा है।
हालांकि, बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए केवल तेजी की उम्मीद में जोखिम लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और कमाई के अनुमान को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
बॉन्ड यील्ड और RBI के फैसले का असर
घरेलू बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के अलावा RBI द्वारा FCNR(B) डिपॉजिट विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे बाजार के शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट पर दबाव बना रह सकता है।
ग्लोबल बाजारों की बात करें तो कमजोर अमेरिकी डॉलर और कंज्यूमर से जुड़े नरम आंकड़ों ने फिलहाल मॉनेटरी पॉलिसी के ज्यादा सख्त होने की आशंकाओं को कुछ कम किया है। इससे लंबी अवधि में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सपोर्ट मिल सकता है।
18 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
अब सबसे अहम सवाल है कि 18 अगस्त को निफ्टी किस दिशा में जा सकता है? तकनीकी स्तरों के लिहाज से एक्सपर्ट्स ने कुछ अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल बताए हैं।
Nifty के लिए 23,700-23,900 का सपोर्ट
मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,700-23,900 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। पिछले सप्ताह निफ्टी करीब 0.83 फीसदी गिरकर 24,366 पर बंद हुआ था।
दूसरी तरफ बैंक निफ्टी ने बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन यह भी 0.44 फीसदी गिरकर 57,491 पर बंद हुआ।
इस सप्ताह निफ्टी के लिए:
- सपोर्ट: 23,700-23,900
- रेजिस्टेंस: 24,800-25,000
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन स्तरों के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Bank Nifty के अहम स्तर
बैंक निफ्टी के लिए 55,800-56,300 का स्तर सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं, ऊपर की तरफ 58,700-59,200 के बीच रेजिस्टेंस देखा जा सकता है।
इसका मतलब है कि बैंकिंग इंडेक्स में भी बाजार की व्यापक दिशा के अनुरूप ही कारोबार रहने की संभावना है।
24,400 के नीचे निफ्टी में दबाव बरकरार
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के अनुसार, उतार-चढ़ाव वाले कारोबारी सत्र के बाद बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ और लाल निशान में बंद होने का सिलसिला जारी रहा।
उनके मुताबिक निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड अभी कमजोर है, क्योंकि इंडेक्स 24,400 के अहम रेजिस्टेंस के नीचे बना हुआ है। जब तक निफ्टी 24,400 के नीचे रहता है, तब तक बाजार का ट्रेंड कमजोर रहने की संभावना है।
निचले स्तर पर 24,225 निफ्टी के लिए पहला महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर यह स्तर भी टूटता है तो गिरावट बढ़कर 24,190 और फिर 24,050 तक जा सकती है।
इसलिए 18 अगस्त के कारोबार में 24,400 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। इसके ऊपर टिकने पर बाजार में सुधार की कोशिश देखने को मिल सकती है, जबकि इसके नीचे बने रहने पर बिकवाली का दबाव कायम रह सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में तेजी और गिरावट दोनों के लिए अहम तकनीकी स्तर स्पष्ट हैं। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में पोजीशन लेने के बजाय बाजार की दिशा की पुष्टि का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
विशेष रूप से निफ्टी के 24,400 रेजिस्टेंस और 24,225 सपोर्ट पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप में केवल मजबूत अर्निंग आउटलुक वाली कंपनियों पर ही फोकस करना जोखिम प्रबंधन के लिहाज से बेहतर रणनीति हो सकती है।
कुल मिलाकर, 18 अगस्त को बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है और निफ्टी के लिए 24,400 का स्तर निर्णायक रह सकता है। इस स्तर के नीचे कमजोरी जारी रहने पर 24,225 और उसके बाद 24,190-24,050 के स्तर महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
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