Hind Copper Share Price: कॉपर की कीमतों में तेज उछाल के बीच हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में सोमवार, 17 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। कमजोर घरेलू शेयर बाजार के बावजूद हिंदुस्तान कॉपर का शेयर करीब 7 फीसदी तक चढ़ गया। कॉपर से जुड़ी तेजी का असर केबल और वायर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। फिनोलेक्स केबल्स, पॉलीकैब और KEI इंडस्ट्रीज में भी बढ़त दर्ज की गई।
कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंचने की सबसे बड़ी वजह तत्काल सप्लाई की कमी और लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड में तेज बढ़ोतरी बताई जा रही है। बाजार में इस समय निकट अवधि की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है, जबकि लंबी अवधि में एनर्जी ट्रांजिशन और इलेक्ट्रिफिकेशन से कॉपर की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।
कॉपर की कीमतों में क्यों आई तेजी?
लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की हाजिर कीमत तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट से करीब $518.50 प्रति टन अधिक हो गई। इसे ‘बैकवर्डेशन’ कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि बाजार में अभी उपलब्ध कॉपर की मांग निकट अवधि में आने वाली सप्लाई की तुलना में ज्यादा है।
यह अंतर 2021 में देखने को मिले बड़े मार्केट स्क्वीज के बाद सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। ऐसे हालात में उन ट्रेडर्स पर दबाव बढ़ सकता है, जिन्होंने कॉपर की कीमत गिरने की उम्मीद में शॉर्ट पोजीशन ली है। उन्हें अपनी पोजीशन बंद करने के लिए ऊंची कीमत पर कॉपर खरीदना पड़ सकता है।
इस स्थिति ने कॉपर बाजार में संभावित शॉर्ट-टर्म सप्लाई संकट की आशंका बढ़ा दी है।
सातवें सप्ताह भी बढ़ा कॉपर फ्यूचर्स
LME पर तीन महीने के कॉपर फ्यूचर्स में भी तेजी जारी है। तीन महीने का कॉपर कॉन्ट्रैक्ट करीब 1.7 फीसदी बढ़कर $14,396 प्रति टन तक पहुंच गया। इसके साथ ही कॉपर की कीमत लगातार सातवें सप्ताह बढ़ी।
यह कीमत $14,527.50 प्रति टन के रिकॉर्ड हाई के काफी करीब है। यानी कॉपर बाजार इस समय अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है।
इस साल अब तक कॉपर की कीमतों में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। अमेरिका को कॉपर की सप्लाई बढ़ने, संभावित टैरिफ की अटकलों और दूसरी जगहों पर उपलब्धता घटने जैसे कारकों ने भी कीमतों को सपोर्ट दिया है।
अमेरिका को बढ़ी कॉपर की सप्लाई का असर
कॉपर बाजार में अमेरिका की भूमिका इस समय काफी महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से रिफाइंड कॉपर पर संभावित टैरिफ की आशंका के चलते ट्रेडर्स अमेरिका में कॉपर की इन्वेंट्री जमा कर रहे हैं।
टैरिफ लागू होने की संभावना को देखते हुए अमेरिका को कॉपर की शिपमेंट बढ़ी है। इससे दुनिया के दूसरे बाजारों में उपलब्ध कॉपर की मात्रा पर दबाव पड़ा है और कीमतों में तेजी को समर्थन मिला है।
हालांकि, अभी तक व्हाइट हाउस की ओर से रिफाइंड कॉपर पर टैरिफ लगाने की अंतिम योजना का ऐलान नहीं किया गया है। इसके बावजूद बाजार संभावित टैरिफ को पहले से कीमतों में शामिल कर रहा है।
LME कॉपर इन्वेंट्री भी घटी
कॉपर की तेजी का एक और अहम कारण LME द्वारा मॉनिटर की जाने वाली इन्वेंट्री में कमी है। एक्सचेंज की निगरानी वाली कॉपर इन्वेंट्री घटकर 2 लाख टन से थोड़ी अधिक रह गई है, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है।
इन्वेंट्री में गिरावट और स्पॉट कॉपर की कीमत के तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट से ऊपर जाने से बाजार में शॉर्ट-टर्म सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
अगर शॉर्ट पोजीशन रखने वाले ट्रेडर्स को डिलीवरी के लिए फिजिकल कॉपर की जरूरत पड़ती है, तो कम उपलब्धता के कारण उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे कीमतों में और तेजी आने का जोखिम बना रहता है।
चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण
हालांकि, ग्लोबल कॉपर इन्वेंट्री की तस्वीर पूरी तरह चिंताजनक नहीं है। कॉपर का एक बड़ा हिस्सा LME सिस्टम के बाहर, खासकर अमेरिका में जमा है। दूसरी ओर चीन में कॉपर की मांग फिलहाल अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है।
कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड में बढ़ोतरी से चीन से LME में कॉपर की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद भी बनी है। आम तौर पर जब हाजिर कीमत वायदा कीमत से ऊपर होती है और बैकवर्डेशन की स्थिति बनती है, तो ज्यादा सप्लाई बाजार में आने की संभावना बढ़ती है।
लेकिन अमेरिका को कॉपर भेजने से मिलने वाले बेहतर अवसरों के कारण चीन से LME में आने वाली अतिरिक्त सप्लाई सीमित रह सकती है।
कॉपर की तेजी से Hindustan Copper को मिला फायदा
कॉपर की कीमतों में तेजी का सीधा फायदा कॉपर उत्पादक कंपनियों के शेयरों में देखने को मिल रहा है। सोमवार को कमजोर बाजार के बीच Hindustan Copper का शेयर करीब 7 फीसदी तक चढ़ गया।
हिंदुस्तान कॉपर भारत की प्रमुख कॉपर कंपनियों में शामिल है। इसलिए कॉपर की कीमतों में लगातार मजबूती को कंपनी के कारोबार और मुनाफे के लिहाज से सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जाता है।
हालांकि, किसी कमोडिटी कंपनी के शेयर पर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तेजी का असर नहीं पड़ता। उत्पादन लागत, उत्पादन मात्रा, बिक्री कीमत, सरकारी नीतियां और कंपनी के वित्तीय नतीजे भी शेयर की चाल को प्रभावित करते हैं।
केबल और वायर कंपनियों में भी तेजी
कॉपर की कीमतों में उछाल का असर डाउनस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। सोमवार के कारोबार में:
- Finolex Cables का शेयर करीब 5.25 फीसदी चढ़ा।
- KEI Industries में करीब 2.5 फीसदी की तेजी रही।
- Polycab India का शेयर करीब 1.24 फीसदी मजबूत हुआ।
केबल और वायर कंपनियों के लिए कॉपर एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसलिए कॉपर की कीमतों में बदलाव इन कंपनियों की लागत और मार्जिन पर असर डाल सकता है। हालांकि, कंपनियां किस तरह से बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, यह उनके मार्जिन और प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अन्य बेस मेटल्स में भी बढ़त
शुरुआती कारोबार में LME के प्रमुख बेस मेटल्स में कॉपर का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। सिंगापुर में दोपहर 1:32 बजे कॉपर फ्यूचर्स करीब 1.4 फीसदी बढ़कर $14,364 प्रति टन पर पहुंच गए।
इसके अलावा एल्युमीनियम में करीब 0.4 फीसदी और जिंक में लगभग 0.7 फीसदी की तेजी देखने को मिली। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज को सहारा दिया।
अब क्या हो निवेश रणनीति?
BNP Paribas में मेटल्स स्ट्रैटेजी के हेड डेविड विल्सन के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में आमतौर पर चीन के प्रोड्यूसर्स से LME में ज्यादा मेटल सप्लाई आने की उम्मीद की जाती है। लेकिन अमेरिका को कॉपर भेजने के लगातार मिल रहे अवसरों की वजह से अतिरिक्त सप्लाई सीमित हो सकती है।
निवेशकों के लिए फिलहाल कॉपर की कीमतों के साथ-साथ LME इन्वेंट्री, अमेरिका की टैरिफ नीति, चीन की मांग और ग्लोबल सप्लाई की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
कॉपर की कीमतों में तेजी से हिंदुस्तान कॉपर जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है, लेकिन शेयर बाजार में कमोडिटी की कीमतें हमेशा एक जैसी दिशा में नहीं चलतीं। ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली, मांग में कमजोरी या नई सप्लाई आने से कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
इसलिए केवल कॉपर की रिकॉर्ड कीमत को देखकर किसी शेयर में निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। कंपनी के वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज, उत्पादन क्षमता और भविष्य की कमाई की संभावनाओं का भी विश्लेषण करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए विचार और जानकारी बाजार की उपलब्ध रिपोर्टों एवं परिस्थितियों पर आधारित हैं। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार और कमोडिटी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


