CBDT ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ITR Scrutiny Guidelines जारी कर दी हैं। जानिए किन टैक्सपेयर्स के रिटर्न की अनिवार्य जांच होगी, किन मामलों में नोटिस आ सकता है और स्क्रूटनी से कैसे बचें।
किन टैक्सपेयर्स के ITR की होगी अनिवार्य जांच?
नई दिल्ली: आयकर रिटर्न (ITR) भरने वाले करोड़ों करदाताओं के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनिवार्य स्क्रूटनी (Compulsory Scrutiny) संबंधी नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशानिर्देशों के तहत कुछ विशेष श्रेणी के मामलों में आयकर विभाग रिटर्न की गहन जांच करेगा। हालांकि आम करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया केवल चुनिंदा मामलों पर लागू होगी।
आयकर विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रूटनी का उद्देश्य करदाताओं को परेशान करना नहीं बल्कि रिटर्न में दी गई जानकारी की सत्यता की पुष्टि करना है। विभाग यह जांचता है कि आय, खर्च, कटौती और टैक्स भुगतान से जुड़ी जानकारी सही है या नहीं। यदि किसी मामले में विसंगति मिलती है तो अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
CBDT द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार जिन करदाताओं के यहां हाल के वर्षों में सर्वे, छापेमारी या जब्ती की कार्रवाई हुई है, उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है। इसके अलावा ऐसे मामले भी जांच के दायरे में आएंगे जहां आयकर विभाग को टैक्स चोरी या आय छिपाने से संबंधित ठोस जानकारी प्राप्त हुई हो।
सर्वे और छापेमारी वाले मामलों पर रहेगी विशेष नजर
CBDT ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2024 के बाद जिन करदाताओं के यहां आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत सर्वे किया गया है, उनके रिटर्न को अनिवार्य स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है। इसी तरह जिन मामलों में आयकर विभाग ने तलाशी (Search) या जब्ती (Seizure) की कार्रवाई की है, वहां भी विस्तृत जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभाग के पास पहले से कुछ सूचनाएं मौजूद होती हैं, इसलिए रिटर्न की गहन जांच लगभग तय मानी जाती है।
सेक्शन 148 के नोटिस वाले मामलों की भी होगी जांच
यदि किसी करदाता को आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया गया है, तो उसका मामला भी स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है। यह धारा आमतौर पर तब लागू होती है जब विभाग को लगता है कि किसी व्यक्ति की आय का कुछ हिस्सा कराधान से बच गया है या घोषित नहीं किया गया है।
CBDT ने ऐसे मामलों को भी अनिवार्य जांच की श्रेणी में रखा है जिनकी जांच प्रक्रिया 31 मार्च 2027 तक पूरी की जानी है।
ट्रस्ट और संस्थानों पर भी लागू होंगे नियम
नई गाइडलाइंस केवल व्यक्तिगत करदाताओं तक सीमित नहीं हैं। ऐसे ट्रस्ट, एनजीओ और संस्थान जिन्हें आयकर अधिनियम की धारा 12A या 10(23C) के तहत मिलने वाली कर छूट अस्वीकार कर दी गई है या रद्द कर दी गई है, लेकिन उन्होंने फिर भी ITR-7 में टैक्स छूट का दावा किया है, उनके मामलों की भी गहन जांच होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में चैरिटेबल संस्थाओं और ट्रस्टों की टैक्स छूट को लेकर विभाग काफी सख्त रुख अपना रहा है।
बड़े टैक्स विवादों वाले करदाता भी रडार पर
CBDT ने उन मामलों को भी स्क्रूटनी के लिए योग्य माना है जिनमें पिछले वर्षों के आकलन के दौरान आय में बड़े स्तर पर संशोधन किया गया था और वही विवाद इस वर्ष भी जारी है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में यह सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। अन्य शहरों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये रखी गई है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले मेट्रो शहरों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे कई करदाताओं को राहत मिल सकती है क्योंकि कम राशि वाले मामलों में अनिवार्य स्क्रूटनी की संभावना घटेगी।
क्या आम करदाता को चिंता करनी चाहिए?
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपने अपनी वास्तविक आय घोषित की है, बैंकिंग लेनदेन का रिकॉर्ड सही रखा है और सभी दावों के समर्थन में दस्तावेज मौजूद हैं तो स्क्रूटनी का डर नहीं होना चाहिए।
आज आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके रिटर्न का विश्लेषण करता है। बैंक खातों, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड, संपत्ति खरीद, विदेशी लेनदेन और टीडीएस डेटा को आपस में मिलान किया जाता है। यदि किसी भी स्तर पर बड़ा अंतर दिखाई देता है तो मामला जांच के लिए चुना जा सकता है।
स्क्रूटनी नोटिस आने पर क्या करें?
यदि किसी करदाता को स्क्रूटनी नोटिस प्राप्त होता है तो उसे घबराने की बजाय समय पर जवाब देना चाहिए। विभाग आमतौर पर आय, निवेश, खर्च, बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति खरीद-बिक्री और कटौती से जुड़े दस्तावेज मांग सकता है। समय पर सही जानकारी देने से अधिकांश मामलों का समाधान आसानी से हो जाता है।
निष्कर्ष
CBDT की नई गाइडलाइंस से यह साफ है कि आयकर विभाग अब भी उच्च जोखिम वाले मामलों, टैक्स चोरी की आशंका वाले लेनदेन और बड़े टैक्स विवादों पर विशेष फोकस बनाए हुए है। हालांकि ईमानदारी से रिटर्न भरने वाले सामान्य करदाताओं को इन नियमों से घबराने की जरूरत नहीं है। सही दस्तावेज, पारदर्शी आय विवरण और समय पर ITR फाइलिंग ही स्क्रूटनी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।


