ऑपरेशन सिंदूर के 15 महीने बाद फिर सक्रिय हो रहा जैश का बहावलपुर कॉम्प्लेक्स
Pakistan News: भारत के ऑपरेशन सिंदूर के करीब 15 महीने बाद पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के एक प्रमुख परिसर को दोबारा तैयार किए जाने की खबर सामने आई है। CNN-News18 की रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस परिसर में बड़े पैमाने पर निर्माण और मरम्मत का काम कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस गतिविधि में पाकिस्तान सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका के आरोप भी लगाए गए हैं।
अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर ऐसे समय में जब भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
25 करोड़ रुपये की फंडिंग का दावा
CNN-News18 की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने दावा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर कॉम्प्लेक्स के पुनर्निर्माण के लिए किश्तों में करीब 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस रकम में से लगभग 11 करोड़ रुपये मरकज सुभानअल्लाह के सेंट्रल हॉल के निर्माण पर खर्च किए गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर में निर्माण कार्य केवल मरम्मत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई हिस्सों को नया रूप देने की कोशिश की गई है।
2026 की शुरुआत से शुरू हुआ निर्माण कार्य
खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि बहावलपुर परिसर में निर्माण गतिविधियां 2026 की शुरुआत से नजर आने लगी थीं। इस दौरान भारी मशीनरी के साथ ईंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्री साइट पर पहुंचाई गई।
धीरे-धीरे परिसर के अलग-अलग हिस्सों में काम आगे बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल हॉल को बड़ा किया गया, दीवारों पर नया प्लास्टर और पेंट किया गया तथा फर्श पर नया संगमरमर लगाया गया।
परिसर की साफ-सफाई और अन्य निर्माण कार्यों के बाद इसके दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किए जाने का दावा किया गया है।
बहावलपुर कॉम्प्लेक्स क्यों है महत्वपूर्ण?
बहावलपुर का यह परिसर लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा एक अहम स्थान माना जाता रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा संगठन की भर्ती और अन्य गतिविधियों के लिए भी किया जाता रहा है।
यह परिसर पाकिस्तान के N-5 हाईवे के आसपास स्थित है और इसके नजदीक सैन्य प्रतिष्ठान भी मौजूद हैं। इसी वजह से सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इस इलाके को जैश की गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानते रहे हैं।
पुरानी रिपोर्ट्स में इस परिसर की पाकिस्तान की सैन्य संरचना से नजदीकी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी भी सैन्य या सरकारी संस्था की प्रत्यक्ष भूमिका के दावे को स्वतंत्र प्रमाणों के साथ देखना जरूरी है।
क्या था भारत का ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से मई 2025 में चलाया गया सैन्य अभियान था। इसकी पृष्ठभूमि में अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।
भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। भारत के अनुसार, इन स्थानों का संबंध आतंकी नेटवर्क और उसके बुनियादी ढांचे से था।
ऑपरेशन के बाद भारत ने स्पष्ट किया था कि उसका निशाना आतंकवादी संगठन और उनके ठिकाने हैं, न कि पाकिस्तान की आम जनता।
जैश-ए-मोहम्मद पर पहले भी लगते रहे हैं गंभीर आरोप
जैश-ए-मोहम्मद भारत के लिए लंबे समय से एक प्रमुख आतंकी खतरा रहा है। संगठन पर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने के आरोप हैं।
2019 का पुलवामा आतंकी हमला भी इसी संगठन से जुड़ा रहा है। इस हमले में CRPF के 40 जवानों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया था।
भारत लगातार पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी संगठनों की गतिविधियों के लिए किया जाता है। पाकिस्तान इन आरोपों को कई बार खारिज करता रहा है।
अगर रिपोर्ट सही है तो बढ़ सकती है चिंता
बहावलपुर परिसर के कथित पुनर्निर्माण की खबर ऐसे समय सामने आई है जब भारत आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है।
यदि खुफिया रिपोर्ट में किए गए दावे स्वतंत्र जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट किए गए आतंकी ढांचे को दोबारा खड़ा होने से रोकने के लिए पाकिस्तान ने क्या कदम उठाए?
फिलहाल सामने आई जानकारी मुख्य रूप से खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। इसलिए पुनर्निर्माण के पीछे की फंडिंग, इसमें शामिल संस्थाओं और परिसर के वास्तविक मौजूदा इस्तेमाल से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर परिसर में कथित तौर पर दोबारा निर्माण की खबर भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाली है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह परिसर वास्तव में फिर से सक्रिय हो रहा है, तो वहां किस तरह की गतिविधियां संचालित की जाएंगी और पाकिस्तान इस पर क्या कार्रवाई करता है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में आतंकवाद पहले से ही सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रहा है। ऐसे में बहावलपुर परिसर का कथित पुनर्निर्माण आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और कूटनीतिक बहस का एक और बड़ा मुद्दा बन सकता है।


