नई दिल्ली | 20 अप्रैल 2026:
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित India-Korea Business Forum को दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
इस मंच का मुख्य उद्देश्य केवल व्यापारिक रिश्तों को बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना है, जहां business-to-business (B2B) और government-to-government (G2G) सहयोग को नई गति दी जा सके।
दक्षिण कोरिया के मंत्री Yong Seok Rooh ने इस मौके पर कहा कि भारत और कोरिया के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें अब एक “एक्सपोनेंशियल ग्रोथ” की दिशा में ले जाने की जरूरत है।
भारत-कोरिया साझेदारी: सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीतिक सहयोग का विस्तार
भारत और दक्षिण कोरिया का रिश्ता पिछले कुछ वर्षों में केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में बदल रहा है। इस साझेदारी में तकनीक, स्टार्टअप, रक्षा, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
मंत्री योंग सियोक रू ने अपने बयान में कहा कि भारत का बाजार कोरियाई कंपनियों, खासकर SMEs (Small and Medium Enterprises) और स्टार्टअप्स के लिए बेहद संभावनाओं से भरा हुआ है। उन्होंने भारत को एक “promising land” बताया, जहां तेजी से बढ़ता हुआ उपभोक्ता वर्ग और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर कोरिया की बढ़ती रुचि
दुनिया में भारत आज सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप हब्स में से एक बन चुका है। यूनिकॉर्न कंपनियों की बढ़ती संख्या, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मजबूत टेक इकोसिस्टम ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है।
कोरियाई मंत्री ने खास तौर पर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि यहां सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि कोरियाई टेक्नोलॉजी और भारतीय स्केलेबिलिटी मिलकर एक मजबूत इनोवेशन मॉडल तैयार कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग खासकर AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
B2B और G2G सहयोग: नए आर्थिक ढांचे की ओर कदम
इस फोरम में सबसे ज्यादा जोर B2B (Business-to-Business) और G2G (Government-to-Government) सहयोग पर दिया गया। इसका मतलब है कि अब केवल निजी कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि सरकारों के स्तर पर भी नीतिगत सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
यह मॉडल दोनों देशों के बीच निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक साझेदारी को आसान बना सकता है। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण: शांति और स्थिरता का संदेश
इस मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी दोनों देशों के संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक तनावपूर्ण माहौल में भारत और कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं।
भारत और दक्षिण कोरिया ने हाल ही में अपने संबंधों को “फ्यूचरिस्टिक पार्टनरशिप” के रूप में अपग्रेड करने का फैसला किया है, जो आने वाले समय में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।
इसके साथ ही दक्षिण कोरिया ने भारत की दो प्रमुख वैश्विक पहलों—
- International Solar Alliance
- Indo-Pacific Oceans Initiative
में शामिल होकर अपनी भागीदारी को और मजबूत किया है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी
भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, व्यापार मार्ग और आर्थिक स्थिरता प्रमुख मुद्दे हैं।
दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग जरूरी है। यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास बल्कि वैश्विक राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर सहमति
फोरम में यह भी चर्चा हुई कि वर्तमान वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत है ताकि वे आधुनिक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। भारत और कोरिया दोनों इस बात पर सहमत हैं कि वैश्विक शासन संरचना को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना जरूरी है।
आर्थिक साझेदारी का भविष्य: तकनीक और नवाचार केंद्र में
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग
- ग्रीन एनर्जी
- इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी
- डिजिटल स्टार्टअप्स
यह सहयोग दोनों देशों को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति दिला सकता है।
निष्कर्ष: एक नई आर्थिक साझेदारी का उदय
India-Korea Business Forum सिर्फ एक बिजनेस इवेंट नहीं है, बल्कि यह भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एक नए आर्थिक युग की शुरुआत का संकेत है।
जहां एक ओर भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बन रहा है, वहीं दक्षिण कोरिया अपनी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों का यह सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत शक्ति केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
Also Read:


