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Reading: LTCG टैक्स खत्म, ₹2.6 लाख करोड़ की बिकवाली के बाद सरकार ने FIIs को दी राहत; क्या भारत लौटेंगे विदेशी निवेशक?
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LTCG टैक्स खत्म, ₹2.6 लाख करोड़ की बिकवाली के बाद सरकार ने FIIs को दी राहत; क्या भारत लौटेंगे विदेशी निवेशक?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/16 at 11:52 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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विदेशी निवेश आकर्षित करने की बड़ी कोशिश, सरकार ने FII के लिए LTCG टैक्स खत्म किया

नई दिल्ली। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) को राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities या G-Secs) में विदेशी निवेशकों द्वारा किए गए निवेश पर लगने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (Long Term Capital Gains Tax – LTCG) को समाप्त कर दिया है। इस संबंध में शुक्रवार को अध्यादेश जारी कर आयकर अधिनियम में संशोधन किया गया।

Contents
विदेशी निवेश आकर्षित करने की बड़ी कोशिश, सरकार ने FII के लिए LTCG टैक्स खत्म कियाआखिर क्यों लिया गया यह फैसला?बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई हैजुलाई 2024 के बजट में बढ़ा था LTCG टैक्सरुपये की कमजोरी ने बढ़ाई सरकार की चिंताविदेशी मुद्रा भंडार भी घटाRBI ने भी उठाया अहम कदमक्या विदेशी निवेशक फिर भारत लौटेंगे?HDFC Securities के CEO ने क्या कहा?आगे क्या हो सकता है?निष्कर्षआज आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? यहां जानें

सरकार का मानना है कि यह कदम भारत में दीर्घकालिक और स्थिर विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेगा। ऐसे समय में यह फैसला आया है जब विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹2.6 लाख करोड़ की निकासी कर दी है। लगातार पूंजी निकासी से न केवल शेयर बाजार दबाव में आया है बल्कि रुपये की कमजोरी और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ा है।

आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?

पिछले कुछ महीनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू किया।

भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। विदेशी निवेशकों ने केवल जून 2026 के पहले तीन कारोबारी दिनों में ही करीब ₹34,000 करोड़ की बिकवाली कर दी। पूरे वर्ष में यह आंकड़ा ₹2.6 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से काफी अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि LTCG टैक्स हटाने का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाजार में अधिक आकर्षित करना और डॉलर की आमद बढ़ाना है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है।

बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है

👉 In a major reform, Government announces measures to deepen G-Sec market and facilitate greater Foreign Portfolio Investment (FPI) in equity segment

Read more ➡️ https://t.co/v1ILi2AkLN

(1/3) pic.twitter.com/KGYXI9vUjs

— Ministry of Finance (@FinMinIndia) June 5, 2026

हालांकि विदेशी निवेशकों ने इक्विटी बाजार से बड़ी निकासी की है, लेकिन भारतीय ऋण बाजार में उनकी रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने पूर्ण पहुंच मार्ग (Fully Accessible Route – FAR) के तहत भारतीय बॉन्ड बाजार में ₹17,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया है। इसके अलावा सामान्य ऋण सीमा के तहत लगभग ₹4,000 करोड़ और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (VRR) के माध्यम से करीब ₹340 करोड़ की निकासी दर्ज की गई।

सरकार का मानना है कि LTCG टैक्स हटने के बाद विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड पहले की तुलना में अधिक आकर्षक बन जाएंगे।

जुलाई 2024 के बजट में बढ़ा था LTCG टैक्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में अधिकांश परिसंपत्तियों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी थी।

वर्तमान में विदेशी निवेशकों को इक्विटी और ऋण निवेश से होने वाले दीर्घकालिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स देना पड़ता है। वहीं सूचीबद्ध शेयरों पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर (STCG) की दर 15 प्रतिशत है।

विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों पर LTCG समाप्त करने से भारत वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य बन सकता है।

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई सरकार की चिंता

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौती रुपये में आई कमजोरी रही है। 20 मई 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था।

साल 2026 की शुरुआत में रुपया लगभग 89.94 प्रति डॉलर के स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में भारतीय मुद्रा में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपये में लगभग 6 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये पर दबाव के पीछे कई कारण हैं—

  • विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
  • बढ़ता आयात बिल
  • मजबूत अमेरिकी डॉलर
  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव

यही वजह है कि सरकार विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार भी घटा

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 22 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा और डॉलर बेचने पड़े, जिससे भंडार में कमी आई।

अगर विदेशी निवेश बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा भंडार फिर से मजबूत हो सकता है और रुपये को स्थिरता मिल सकती है।

RBI ने भी उठाया अहम कदम

सरकार के फैसले के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक ने भी कुछ दीर्घकालिक सॉवरेन बॉन्ड को पूरी तरह सुलभ श्रेणी (Fully Accessible Route) में शामिल करने की अनुमति दी है।

इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक इन सरकारी प्रतिभूतियों में बिना किसी सीमा के निवेश कर सकेंगे। इससे भारतीय बॉन्ड बाजार में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बॉन्ड बाजार में बढ़ती विदेशी भागीदारी से सरकार की उधारी लागत कम हो सकती है और यील्ड पर दबाव घट सकता है।

क्या विदेशी निवेशक फिर भारत लौटेंगे?

यह सबसे बड़ा सवाल है। केवल LTCG टैक्स हटाने से विदेशी निवेशकों की वापसी की गारंटी नहीं दी जा सकती। निवेशकों का निर्णय कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें अमेरिकी ब्याज दरें, वैश्विक आर्थिक वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं।

हालांकि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर बैंकिंग प्रणाली, तेजी से बढ़ती घरेलू मांग और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का दर्जा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।

यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होती हैं और रुपये में स्थिरता आती है, तो LTCG छूट विदेशी निवेशकों की वापसी का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

HDFC Securities के CEO ने क्या कहा?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एमडी एवं सीईओ धीरज रेल्ली का मानना है कि एफपीआई निवेशों को LTCG से छूट मिलने से बॉन्ड बाजार में अल्पकालिक रूप से निवेश बढ़ सकता है और रुपये को स्थिरता मिल सकती है।

उनके अनुसार जी-सेक में निवेश की आसान शर्तें, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) की बेहतर स्थिति और विदेशी निवेश नियमों में उदारता भारत के पूंजी खाते को मजबूत बनाने में मदद करेगी। इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में इस फैसले के कई सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं।

  • भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ सकता है।
  • रुपये में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।
  • विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है।
  • सरकारी उधारी की लागत कम हो सकती है।
  • शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
  • भारत वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बाजार बन सकता है।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर LTCG टैक्स समाप्त करना केवल एक कर राहत नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी आकर्षित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। ₹2.6 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली, कमजोर होते रुपये और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच यह कदम समयानुकूल माना जा रहा है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह राहत विदेशी निवेशकों को फिर से भारतीय बाजारों की ओर आकर्षित कर पाती है या नहीं।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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