Success Story of Girish Mathrubootham: सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक चुनौतियां और शुरुआती असफलताएं इंसान के रास्ते में बड़ी बाधा बनकर सामने आती हैं। लेकिन अगर हौसला मजबूत हो और असफलताओं से सीखने का जज्बा हो, तो यही मुश्किलें आगे चलकर सफलता की नींव बन सकती हैं। ऐसी ही कहानी है Freshworks के फाउंडर गिरीश मातृभूतम की।
आज गिरीश मातृभूतम का नाम भारतीय टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमियों में लिया जाता है। उन्होंने जिस कंपनी को खड़ा किया, उसने अमेरिकी शेयर बाजार तक का सफर तय किया। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। कभी उनके परिवार के लिए उनकी MBA की फीस जुटाना भी चुनौती थी और उनके पिता को पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उधार लेना पड़ा था।
तमिलनाडु के मिडिल क्लास परिवार में हुआ जन्म
गिरीश मातृभूतम का जन्म तमिलनाडु के त्रिची में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता सरकारी नौकरी करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उच्च शिक्षा का खर्च आसानी से उठाया जा सके।
गिरीश के बचपन का एक और महत्वपूर्ण पहलू उनके माता-पिता का तलाक था। जब वह करीब 7 साल के थे, तभी उनके माता-पिता अलग हो गए। कम उम्र में परिवार में आए इस बदलाव ने उन्हें काफी प्रभावित किया। हालांकि, बाद में गिरीश ने इस अनुभव को अपने जीवन की एक सीख के तौर पर देखा और माना कि इससे उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए चेन्नई का रुख किया। इसके बाद उन्होंने MBA करने का फैसला लिया। लेकिन यहां भी आर्थिक स्थिति उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी।
MBA की फीस के लिए पिता ने लिया उधार
गिरीश की MBA की पढ़ाई के दौरान परिवार के सामने पैसों की समस्या थी। उनके पिता के लिए पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने एक रिश्तेदार से पैसे उधार लेकर बेटे की पढ़ाई पूरी कराई।
यही संघर्ष गिरीश की कहानी को खास बनाता है। आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को बीच में नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और आगे नौकरी के जरिए कॉरपोरेट दुनिया में कदम रखा।
उनके करियर की शुरुआत भी किसी बड़े बिजनेस आइडिया के साथ नहीं हुई थी। उन्होंने पहले नौकरी करके इंडस्ट्री को समझा, तकनीक और बिजनेस की बारीकियां सीखीं और इसी अनुभव ने आगे चलकर उनके उद्यमी बनने की राह तैयार की।
HCL और Zoho में किया काम
MBA के बाद गिरीश ने टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करना शुरू किया। उन्होंने HCL और Zoho जैसी कंपनियों में काम किया। इन कंपनियों में काम करने के दौरान उन्हें सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री, कस्टमर सर्विस और बिजनेस ऑपरेशंस की गहरी समझ मिली।
नौकरी के दौरान उन्होंने यह महसूस किया कि कंपनियों को ऐसे सॉफ्टवेयर की जरूरत है, जिन्हें इस्तेमाल करना आसान हो और जिन्हें अपनाने में बहुत ज्यादा तकनीकी जटिलता न हो।
यही सोच आगे चलकर Freshworks के बिजनेस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।
शुरुआत में असफलताओं का भी सामना किया
गिरीश मातृभूतम की कहानी को सिर्फ सफलता की कहानी कहना अधूरा होगा। Freshworks शुरू करने से पहले उन्होंने अलग-अलग बिजनेस आइडिया और स्टार्टअप्स पर भी काम किया। इनमें से सभी प्रयास सफल नहीं हुए।
लेकिन इन असफलताओं ने उन्हें पीछे हटने के बजाय अपने अनुभव से सीखने का मौका दिया। उन्होंने समझा कि किसी बिजनेस को सफल बनाने के लिए सिर्फ शानदार प्रोडक्ट ही काफी नहीं है। सही बाजार, ग्राहक की समस्या की समझ और आसान समाधान भी उतने ही जरूरी हैं।
यही अनुभव Freshworks की शुरुआत में उनके काम आया।
2010 में शुरू की Freshworks
साल 2010 में गिरीश मातृभूतम ने चेन्नई से Freshworks की शुरुआत की। कंपनी का शुरुआती नाम Freshdesk था। इसका उद्देश्य कंपनियों को कस्टमर सपोर्ट और सर्विस से जुड़ी समस्याओं के लिए आसान और क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराना था।
शुरुआत छोटी थी, लेकिन कंपनी ने जल्द ही ग्राहकों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया। साल 2011 में कंपनी को पहली फंडिंग मिली और इसी दौरान उसे अपना पहला ग्राहक भी मिला।
Freshworks ने ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित किए जिन्हें कंपनियां ग्राहक सेवा, सेल्स, CRM और दूसरे बिजनेस कामों के लिए इस्तेमाल कर सकती थीं।
आसान सॉफ्टवेयर बना कंपनी की पहचान
Freshworks की ग्रोथ के पीछे एक बड़ा कारण उसका आसान और इस्तेमाल में सुविधाजनक सॉफ्टवेयर था। कंपनी ने ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करने पर जोर दिया, जिसे छोटे और मध्यम आकार के बिजनेस भी आसानी से अपना सकें।
जहां कई एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर जटिल और महंगे माने जाते थे, वहीं Freshworks ने सरल इंटरफेस और क्लाउड आधारित मॉडल पर ध्यान दिया।
इस रणनीति ने कंपनी को भारत से बाहर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी विस्तार करने में मदद की।
2021 में आया सबसे बड़ा मोड़
Freshworks की कहानी में साल 2021 बेहद महत्वपूर्ण रहा। कंपनी ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज यानी NYSE पर IPO लॉन्च किया।
इस IPO ने Freshworks को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली प्रमुख भारतीय मूल की टेक्नोलॉजी कंपनियों में Freshworks का नाम शामिल हो गया।
IPO के समय कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹1.30 लाख करोड़ के आसपास बताया गया था। इस लिस्टिंग का फायदा कंपनी के कर्मचारियों को भी मिला और कई कर्मचारी करोड़पति बन गए।
गिरीश मातृभूतम भी इस IPO के बाद वैश्विक टेक्नोलॉजी जगत में काफी चर्चित हुए।
कंपनी ने तेजी से हासिल किया रेवेन्यू
Freshworks ने कुछ ही वर्षों में अपने कारोबार को तेजी से बढ़ाया। कंपनी ने करीब आठ साल में लगभग 100 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल किया। इसके बाद सिर्फ करीब डेढ़ साल में कंपनी ने 200 मिलियन डॉलर का आंकड़ा भी पार कर लिया।
कंपनी का बिजनेस मॉडल तेजी से बढ़ते SaaS यानी Software-as-a-Service सेक्टर पर आधारित था। इस मॉडल में ग्राहक सॉफ्टवेयर को खरीदने के बजाय सब्सक्रिप्शन के जरिए इस्तेमाल करते हैं।
यह मॉडल टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए नियमित और बढ़ती आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
50 हजार से ज्यादा ग्राहक
Freshworks आज सिर्फ भारत तक सीमित कंपनी नहीं है। इसका कारोबार कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फैला हुआ है। कंपनी के भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों में ऑफिस रहे हैं।
कंपनी ने दुनिया भर में हजारों बिजनेस ग्राहकों को अपने सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन उपलब्ध कराए हैं। कंपनी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इसके ग्राहक आधार में 50 हजार से ज्यादा ग्राहक शामिल रहे हैं।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक छोटे से स्टार्टअप आइडिया ने किस तरह वैश्विक SaaS कंपनी का रूप लिया।
IPO के बाद कंपनी के वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट
हालांकि, Freshworks की कहानी का दूसरा पहलू भी है। IPO के समय कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹1.30 लाख करोड़ था। इसके बाद टेक्नोलॉजी और SaaS कंपनियों के वैल्यूएशन में आई गिरावट का असर Freshworks पर भी पड़ा।
कंपनी के शेयर में IPO के बाद काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और इसके मार्केट कैप में भी बड़ी गिरावट आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, IPO के समय के मुकाबले कंपनी के वैल्यूएशन में 70 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
फिर भी कंपनी की कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने भारत से निकलकर वैश्विक SaaS बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
₹31,200 करोड़ की कंपनी तक पहुंचने का सफर
आज Freshworks की वैल्यू करीब ₹31,200 करोड़ बताई जाती है। यह आंकड़ा IPO के समय के करीब ₹1.30 लाख करोड़ के मुकाबले काफी कम है, लेकिन इसके बावजूद गिरीश मातृभूतम की उद्यमशीलता की यात्रा प्रेरणादायक बनी हुई है।
जिस व्यक्ति के परिवार को कभी MBA की फीस जुटाने के लिए उधार लेना पड़ा था, उसने आगे चलकर ऐसी टेक्नोलॉजी कंपनी खड़ी की जिसने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर दस्तक दी।
यह सफर बताता है कि शुरुआती आर्थिक कठिनाइयां किसी व्यक्ति की अंतिम सफलता तय नहीं करतीं।
गिरीश मातृभूतम की कहानी से क्या सीख मिलती है?
गिरीश की कहानी में कई ऐसी बातें हैं जो युवा उद्यमियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
पहली सीख है कि आर्थिक मुश्किलें अंत नहीं हैं। शुरुआत में संसाधनों की कमी हो सकती है, लेकिन सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा व्यक्ति को नई दिशा दे सकती है।
दूसरी सीख असफलता से जुड़ी है। हर बिजनेस आइडिया सफल नहीं होता। महत्वपूर्ण यह है कि असफलता से क्या सीखा गया और अगली कोशिश में उस सीख का इस्तेमाल कैसे किया गया।
तीसरी सीख है कि ग्राहक की समस्या को समझना जरूरी है। Freshworks ने जटिल बिजनेस सॉफ्टवेयर को अपेक्षाकृत आसान और उपयोगी बनाने पर ध्यान दिया। यही कंपनी के विकास की बड़ी वजहों में शामिल रहा।
चौथी सीख यह है कि सफलता के बाद भी चुनौतियां खत्म नहीं होतीं। Freshworks का IPO बेहद सफल रहा, लेकिन इसके बाद कंपनी के शेयर और वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट भी आई। यानी बिजनेस की दुनिया में उतार-चढ़ाव लगातार बने रहते हैं।
निष्कर्ष
गिरीश मातृभूतम की Success Story सिर्फ करोड़ों की कंपनी बनाने की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा है जिसने सीमित आर्थिक संसाधनों और निजी जीवन की चुनौतियों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की, नौकरी से अनुभव हासिल किया, असफलताओं से सीखा और फिर अपना बिजनेस खड़ा किया।
आज Freshworks की वैल्यू IPO के समय के मुकाबले काफी कम हो चुकी है, लेकिन कंपनी का वैश्विक स्तर तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। गिरीश की कहानी युवा उद्यमियों को यह संदेश देती है कि शुरुआत छोटी हो सकती है, संसाधन सीमित हो सकते हैं और रास्ते में असफलताएं भी आ सकती हैं, लेकिन लगातार सीखने और सही दिशा में मेहनत करने से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।


