Railway Porter Service: रेलवे स्टेशन पर कुलियों की मदद लेना यात्रियों के लिए अक्सर जरूरी हो जाता है, खासकर तब जब सामान ज्यादा हो और परिवार में छोटे बच्चे या बुजुर्ग साथ हों। लेकिन कई बार इसी मजबूरी का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना पैसा वसूलने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा रेलवे स्टेशन से सामने आया है, जहां एक यात्री से उसके सामान को प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर ₹4,700 वसूले गए।
मामला सामने आने के बाद पूर्व रेलवे ने कार्रवाई की। जांच में उस कुली की पहचान की गई, जिस पर यात्री से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक रकम लेने का आरोप था। रेलवे ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया और उसे रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि उसके साथ काम करने वाले कुछ अन्य कुली भी यात्रियों से अधिक पैसे वसूलने में शामिल हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कूच बिहार के रहने वाले अरुणाभ मुखर्जी से जुड़ा है। पेशे से एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में इंजीनियर मुखर्जी अपनी पत्नी, चार महीने की बेटी, बुजुर्ग मां और एक सहायिका के साथ कूच बिहार से मुंबई की यात्रा कर रहे थे।
उनकी यात्रा के दौरान उन्हें हावड़ा स्टेशन पर ट्रेन बदलनी थी। शुक्रवार की सुबह करीब 5 बजे उनकी ट्रेन हावड़ा स्टेशन पहुंची। उस समय स्टेशन के बाहर और आसपास भारी बारिश हो रही थी। परिवार के साथ बड़ी संख्या में सामान होने के कारण उनके लिए उसे खुद उठाकर दूसरे प्लेटफॉर्म तक ले जाना मुश्किल था।
बताया गया कि उनके पास कुल 7 ट्रॉली बैग और 4 हैंड लगेज थे। इसी दौरान कुछ कुली उनके पास पहुंचे और सामान दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की पेशकश की।
अरुणाभ मुखर्जी ने जब उनसे सामान पहुंचाने का शुल्क पूछा तो आरोप के मुताबिक कुलियों ने शुरुआत में कोई निश्चित रकम नहीं बताई। उन्होंने केवल इतना कहा कि काम कम पैसे में हो जाएगा।
यात्री ने उनकी बात पर भरोसा किया और सामान कुलियों को सौंप दिया।
सामान उठाने के बाद मांगे ₹6,000
कुलियों ने सारा सामान एक बड़ी ट्रॉली पर लादा और उसे दूसरे प्लेटफॉर्म की तरफ ले जाने लगे। इसी दौरान कथित तौर पर उन्होंने यात्री से ₹6,000 की मांग कर दी।
मुखर्जी ने इतनी बड़ी रकम मांगे जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इतनी रकम सामान को कुछ दूरी तक ले जाने के लिए बहुत ज्यादा है। लेकिन आरोप है कि कुली अपनी मांग पर अड़े रहे।
स्थिति उस समय और मुश्किल हो गई क्योंकि परिवार में चार महीने की बच्ची और बुजुर्ग मां भी मौजूद थीं। इसके अलावा बारिश तेज थी और जिस ट्रेन से उन्हें मुंबई जाना था, उसके रवाना होने में ज्यादा समय नहीं बचा था।
इसी बीच कथित तौर पर कुली ने उन्हें धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनका सामान रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया जाएगा।
दूसरे कुलियों को भी बुलाया गया
मामला यहीं नहीं रुका। आरोप के मुताबिक संबंधित कुली ने फोन करके अपने कुछ अन्य साथियों को भी बुला लिया। इससे यात्री और उसके परिवार पर दबाव और बढ़ गया।
मुखर्जी ने स्थिति को देखते हुए कुलियों से मोलभाव करना शुरू किया। पहले ₹6,000 की मांग की गई थी। बातचीत के बाद रकम घटाकर करीब ₹5,500 बताई गई। अंत में कथित तौर पर ₹4,700 में सौदा तय हुआ।
मुखर्जी के पास इतनी नकदी नहीं थी। इसलिए उन्होंने ₹1,700 कैश दिए और बाकी ₹3,000 का भुगतान UPI के जरिए किया।
इसके बाद वह अपने परिवार और सामान के साथ ट्रेन में सवार होकर मुंबई के लिए रवाना हो गए।
मुंबई पहुंचने के बाद हुआ ज्यादा पैसे वसूलने का एहसास
अरुणाभ मुखर्जी शनिवार को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुंचे। वहां भी उनके पास लगभग उतना ही सामान था। सामान को स्टेशन से बाहर तक ले जाने के लिए उन्होंने एक कुली की मदद ली।
लेकिन मुंबई में उसी तरह के सामान के लिए उनसे करीब ₹800 शुल्क लिया गया।
यहीं उन्हें महसूस हुआ कि हावड़ा स्टेशन पर उनसे ली गई ₹4,700 की रकम सामान्य शुल्क की तुलना में कितनी ज्यादा थी। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले को सार्वजनिक करने और रेलवे प्रशासन से कार्रवाई की मांग करने का फैसला किया।
फेसबुक पोस्ट के जरिए उठाई आवाज
अरुणाभ मुखर्जी ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर विस्तार से पोस्ट किया। उन्होंने घटना की जानकारी देने के साथ कुछ तस्वीरें भी साझा कीं।
उन्होंने पूर्व रेलवे से मामले की जांच करने और संबंधित कुलियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों की मदद से संबंधित लोगों की पहचान की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद यह पोस्ट तेजी से चर्चा में आया और पूर्व रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।
पूर्व रेलवे ने शुरू की जांच
मामले की जानकारी मिलने के बाद पूर्व रेलवे की टीम ने यात्री से संपर्क किया। रेलवे की पब्लिसिटी टीम ने घटना से जुड़े विवरण जुटाए और आरोपी कुली की पहचान करने के लिए जांच शुरू की।
इस जांच में RPF की भी मदद ली गई। यात्री से किए गए UPI भुगतान का स्क्रीनशॉट भी महत्वपूर्ण सबूत साबित हुआ। डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड से आरोपी तक पहुंचने में रेलवे अधिकारियों को मदद मिली।
पूर्व रेलवे के पब्लिसिटी इंस्पेक्टर उत्पल दत्ता के मुताबिक, यात्री से UPI पेमेंट का स्क्रीनशॉट लिया गया था और इसी आधार पर संबंधित कुली की पहचान करने में मदद मिली।
आरोपी कुली गिरफ्तार, लाइसेंस भी रद्द
जांच के दौरान रेलवे ने कथित तौर पर मुख्य पोर्टर मुन्ना यादव की पहचान की। इसके बाद उसे RPF के सुपुर्द किया गया और गिरफ्तार कर लिया गया।
रेलवे ने केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। आरोपी कुली का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।
इस कार्रवाई का मकसद रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों से निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूलने वाले कुलियों को सख्त संदेश देना भी माना जा रहा है।
सिर्फ एक कुली नहीं, कई लोगों की भूमिका की जांच
पूर्व रेलवे के अधिकारियों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कुली के तहत काम करने वाले कुछ अन्य पोर्टर भी यात्रियों से अधिक रकम वसूलने की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
रेलवे ने ऐसे कुलियों की पहचान शुरू कर दी है और कुछ लोगों को RPF द्वारा पकड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि रेलवे इस मामले को केवल एक यात्री और एक कुली के बीच विवाद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि स्टेशन पर यात्रियों से ओवरचार्जिंग की संभावित व्यवस्था की भी जांच कर रहा है।
यात्री को वापस दिलाई गई अतिरिक्त रकम
रेलवे अधिकारी के मुताबिक, जांच में यह पाया गया कि संबंधित सामान के लिए रेलवे द्वारा निर्धारित अधिकृत शुल्क करीब ₹220 होना चाहिए था।
ऐसे में यात्री से वसूले गए ₹4,700 और निर्धारित शुल्क के बीच बड़ा अंतर था। रेलवे ने कार्रवाई के दौरान यात्री को अतिरिक्त वसूली गई रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया भी की।
अगर निर्धारित शुल्क ₹220 माना जाए, तो ₹4,700 की वसूली उससे करीब 21 गुना से भी अधिक बैठती है। यही वजह है कि रेलवे ने मामले को गंभीरता से लिया।
रेलवे स्टेशन पर कुली का चार्ज कितना है?
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को सामान उठाने में मदद देने वाले लाइसेंसधारी कुलियों के लिए शुल्क निर्धारित होता है। इसका उद्देश्य यही है कि यात्रियों से मनमाने तरीके से पैसे न वसूले जाएं।
उपलब्ध संशोधित दरों के मुताबिक, बड़े रेलवे स्टेशनों पर 40 किलोग्राम तक सामान के लिए कुली का शुल्क करीब ₹85 निर्धारित है। मझोले स्टेशनों पर यह शुल्क करीब ₹80, जबकि छोटे स्टेशनों पर करीब ₹75 बताया गया है।
वहीं, अगर यात्री सामान ले जाने के लिए दो पहिये या चार पहिये वाली ट्रॉली की सुविधा लेते हैं तो इसके लिए करीब ₹135 शुल्क निर्धारित है। इस ट्रॉली के जरिए अधिकतम करीब 160 किलोग्राम सामान ले जाने का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, किसी विशेष स्टेशन, सेवा या परिस्थितियों के अनुसार लागू दरों की पुष्टि यात्री को स्टेशन पर प्रदर्शित अधिकृत शुल्क सूची से कर लेनी चाहिए।
यात्रियों को क्या करना चाहिए?
हावड़ा का यह मामला यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक है। स्टेशन पर कुली की सेवा लेते समय सबसे पहले अधिकृत शुल्क की जानकारी लेना जरूरी है। अगर कुली शुरुआत में रकम बताने से बचता है और बाद में अचानक बड़ी राशि मांगता है तो यात्री को सावधान हो जाना चाहिए।
यात्री को कोशिश करनी चाहिए कि:
- कुली से काम शुरू कराने से पहले शुल्क स्पष्ट रूप से पूछें।
- संभव हो तो निर्धारित रेट की स्टेशन पर लगी सूची देखें।
- भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड रखें।
- ओवरचार्जिंग होने पर UPI या अन्य भुगतान की रसीद सुरक्षित रखें।
- कुली का बैज या लाइसेंस नंबर नोट कर लें।
- धमकी या जबरदस्ती की स्थिति में तुरंत रेलवे सुरक्षा बल या रेलवे प्रशासन से शिकायत करें।
- घटना से जुड़े फोटो, वीडियो या अन्य सबूत सुरक्षित रखें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी मजबूरी के कारण यात्री को मनमाना शुल्क देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति धमकी देता है या सामान को नुकसान पहुंचाने की बात करता है, तो मामला केवल ओवरचार्जिंग का नहीं रह जाता, बल्कि यात्री की सुरक्षा का भी बन जाता है।
रेलवे की कार्रवाई से क्या संदेश गया?
हावड़ा स्टेशन का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद रेलवे ने तेजी से जांच शुरू की। UPI भुगतान के रिकॉर्ड और RPF की मदद से आरोपी की पहचान की गई और कार्रवाई की गई।
लाइसेंस रद्द करने और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई से रेलवे ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि यात्रियों से मनमानी रकम वसूलने की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
रेलवे स्टेशनों पर कुली यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी सेवा देते हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों और भारी सामान वाले यात्रियों के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन इस सेवा का भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब शुल्क पारदर्शी हो और यात्रियों से तय दर के मुताबिक ही पैसे लिए जाएं।
हावड़ा स्टेशन पर अरुणाभ मुखर्जी से कथित तौर पर ₹4,700 वसूलने का मामला इसी पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। रेलवे की कार्रवाई से जहां यात्री को राहत मिली, वहीं दूसरे कुलियों के खिलाफ चल रही जांच से यह उम्मीद भी जगी है कि रेलवे स्टेशनों पर ओवरचार्जिंग की शिकायतों पर आगे भी सख्ती की जाएगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की ओर से सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। शुल्क की दरों में स्टेशन या रेलवे के नए आदेश के अनुसार बदलाव संभव है। यात्रियों को भुगतान से पहले स्टेशन पर प्रदर्शित आधिकारिक शुल्क सूची की पुष्टि करनी चाहिए।


